वाराणसी, जागरण संवाददाता। विवाद की शुरुआत के बाद प्रशासनिक कार्रवाई के तहत चार जनवरी वर्ष 1993 के बाद जिलाधिकारी सौरभ चंद्र के निर्देशन में मस्जिद के तीन कमरों में ताले लगाए गए थे। कमरे की दो चाबियां प्रशासन और मुस्लिम पक्ष के पास सुरक्षित थीं। अब मस्जिद के बंद हिस्‍सों का ताला आखिरकार शनिवार को एडवोकेट कमिश्‍नर की कार्रवाई के दौरान खुला तो काफी कुछ अतीत के झरोखों से सुबूतों ने दस्‍तक दी। साक्ष्‍यों की पड़ताल के लिए दोनों पक्षों के 52 सदस्‍य वीडियोग्राफी के लिए पहुंचे और एक एक कर सुबूतों को तलाशने के साथ ही सुबह आठ बजे से दोपहर 12 बजे तक जांच की। 

सुबह छह बजे से ही परिसर और आसपास के क्षेत्र को सुरक्षा बलों के हवाले कर दिया गया। ज्ञानवापी परिसर के चारों ओर बने ऊंचे मकानों की छतों पर सुरक्षा बलों की टीम चौकस हो गई ताकि कोई भी एडवोकेट कमिश्‍नर की परिसर में कार्यवाही के दौरान सुरक्षा से खिलवाड़ न कर सके। सभी 52 सदस्‍यों की लिस्‍ट सुरक्षा बलों को सौंप दी गई थी। जांच के बाद ही सभी को परिसर में प्रवेश करने दिया गया। इस दौरान गोपनीयता को बरकरार रखते हुए सभी सदस्‍यों के मोबाइल सहित अन्‍य उपकरणों को गेट पर ही जमा कराया गया तो कुछ लोगों ने विरोध भी किया। लेकिन, सुरक्षा और गोपनीयता का हवाला देते हुए उपकरणों को भीतर नहीं जाने दिया गया। सिर्फ वीडियो रिकार्डिंग का कैमरा और रोशनी के लिए उच्‍च गुणवत्‍ता की टार्च को ही भीतर जाने दिया गया।  

अदालत के आदेश पर 29 वर्ष चार माह और 10 दिन के बाद ज्ञानवापी परिसर में बंद कमरों और तहखानों को साक्ष्‍य संकलन के लिए वीडियोग्राफी करने के लिए  के तालों को खोला गया तो भीतर सीलन और बदबू भी खूब रही। बाहर निकलकर आए जांच टीम के सदस्‍यों ने जांच के दौरान जो देखा उसे अदालत के निर्देशों के तहत जाहिर तो नहीं किया लेकिन बताया कि -

1- 50 फीसद तक जांच का क्रम शनिवार को पूरा : डीएम वाराणसी

2- तहखानों में भी कई हिस्‍से बने हुए हैं, जिनकी जांच रविवार को भी होगी : हिंदू पक्ष

3- मंदिर होने के साक्ष्यों की पड़ताल की गई : हिंदू पक्ष

4- मुस्लिम पक्ष की ओर से पर्याप्‍त सहयोग मिला 

5- पूरे चार घंटों तक 8-12 बजे तक टीम ने जुटाए साक्ष्‍य

6- मस्जिद परिसर में जांच सार्थक दिशा की ओर 

7- प्रतिवादी पक्ष के अधिवक्ता मोहम्मद तौहीद ने कहा चाबी हमारे पास थी

8- मस्जिद के भीतर तहखाने की मौजूदगी की पुष्टि

9- परिसर में मंदिर होने के प्रतीकों पर विशेष नजर

10- हिंदू पक्ष जांच और परिणाम को लेकर आशान्वित 

वादी और प्रतिवादी बोले : अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी यानी मस्जिद पक्ष के अधिवक्ता रईस अहमद ने कहा कि कमीशन की कार्यवाही सौहार्दपूर्ण वातावरण में आंशिक रुप से (लगभग 50 प्रतिशत) संपन्न हुई है। शेष कार्यवाही कल पूरी की जाएगी। सभी का पूरा सहयोग मिला। वहीं वादी पक्ष के अधिवक्ता सुधीर त्रिपाठी व सुभाष नंदन चतुर्वेदी का कहना है कि सभी पक्षों का भरपूर सहयोग मिला। किसी पक्ष ने कोई अवरोध उत्पन्न नहीं किया। कार्यवाही सुचारु रूप से संपन्न हो इसके लिए प्रशासन द्वारा सुरक्षा से लेकर मौके पर लाइट, सफाईकर्मियों आदि की उचित व्यवस्था की गई थी।

तीन दशक से तालों के भीतर थे साक्ष्‍य : दरअसल चार जनवरी 1993 को तत्कालीन जिलाधिकारी ने विवाद के बाद कमरों को बंद करवाया था इसके बाद बाद से ही इन्हें नहीं खोला गया था। हिंदू पक्ष की ओर से बताया गया कि 1993 के पहले यहां रोजाना व्यास जी का आना जाना था और यहां पर उनका कमरा भी था लेकिन यह वाद न्यायालय में लंबित है। हालांकि, अदालत के सख्‍त आदेश के बाद जिलाधिकारी की ओर से जारी नोटिस पर कमेटी ने सभी चाबी होने की बात स्वीकार की और प्रशासन का पूरा सहयोग का आश्वासन दिया। वहीं शनिवार को करीब तीन दशक से बंद कमरों के खुलने के बाद रोशनी की गई तो पूरा क्षेत्र सीलन और बदबू से भरा नजर आया। वहीं परिसर में जहरीला सांप दिखा तो वन‍ विभाग को भी सूचित कर उसे हटाने की बात प्रशासन ने कही।

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Edited By: Abhishek Sharma