जागरण संवाददाता, वाराणसी। आषाढ़ शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को गुरु पूजन का पर्व मनाया जाएगा। शनिवार यानी गुरु पूर्णिमा के दिन इस बार तीन महत्वपूर्ण योग बन रहे हैं। ख्यात ज्योतिषाचार्य पं. ऋषि द्विवेदी के अनुसार सुबह से दोपहर 1:26 तक जय योग रहेगा। दोपहर 1:26 बजे के बाद श्रवण नक्षत्र और सवार्थ सिद्धि योग व रात्रि में प्रीति योग का विशेष संयोग बनेगा। तीन महत्वपूर्ण योग घटित होने से इस बार आदि गुरु वेदव्यास जी की कृपा से श्रद्धाओं के समस्त कार्यों में सफलता की प्राप्ति होगी।

इस तरह करें गुरु का पूजन : ख्यात ज्योतिषाचार्य पं. ऋषि द्विवेदी के अनुसार प्रातःकाल स्नान से निवृत होकर एक स्वच्छ आसन पर बैठकर व्यासपीठ की स्थापना एक चौकी पर करें। उस पर अपने गुरुजी एवं व्यासजी और संभव हो तो शुक्रदेव, सनातन धर्म के अभ्यदय में सहायक शंकराचार्य जी की प्रतिमा स्थापित करें। उसके बाद हाथ में जल और अक्षत लेकर ‘गुरु परंपरा सिद्धयर्थं व्यास पूजनं करिष्ये’ मंत्र का उच्चारण कर संकल्प करें। इसके बाद चंदन, रोली, पुष्प, धूप, दीप, मिष्ठान, फल से पूजन करें। यदि मंत्र देने वाले गुरुजी का आवास समीप हो तो उनके घर जाकर उन्हें फल, मीठा और दक्षिणा अर्पित करें। फिर उनका आशीष ग्रहण करें। यदि दूर हो तो कोरोना महामारी को देखते हुए घर में ही पूजन करें।

Edited By: Abhishek Sharma