वाराणसी, जेएनएन। राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने कहा कि काशी अत्यंत प्राचीन नगरी है और भारतीय संस्कृति, साहित्य, संगीत व साधना की केंद्र स्थली के रूप में यह पूरे विश्व में विख्यात है। यहां की जीवन रेखा के रूप में विख्यात गंगा भारत की संस्कृति, आध्यात्मिक चिंतन, जलवायु और अर्थव्यवस्था पर अपनी अमिट छाप छोड़ती है। गंगा हमारी संस्कृति व आध्यात्मिक चिंतन का महत्वपूर्ण भाग है। उन्होंने कहा कि हिमालय से निकलकर गंगा सागर तक गंगा जनमानस के लिए सिर्फ आस्था का प्रतीक ही नहीं, बल्कि एक जीवन धारा है। गंगा एक प्राकृतिक संसाधन के रूप में देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

आध्यात्मिक व सांस्कृतिक नगरी काशी के राजघाट स्थित गंगा तट पर आयोजित देव दीपावली उत्सव में मंगलवार को कार्तिक पूर्णिमा पर गंगा स्नान व गुरु नानक जयंती तथा देव दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए राज्यपाल ने कहा कि  हमें अपनी इस विरासत को स्वच्छ और निर्मल बनाए रखना है। इसके संरक्षण के लिए हमें केवल कानूनों पर ही निर्भर नहीं रहना चाहिए। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जो इस पावन नगरी से ही सांसद हैं, के प्रयासों से वाराणसी का तीव्र विकास हो रहा है। आजादी के बाद उतने विकास कार्य यहां नहीं हुए, जितने पिछले पांच वर्ष के दौरान हुए हैं।

तमसो मां ज्योतिर्गमय का प्रतीक पर्व देव दीपावली हमें अंधेरे से लडऩे की प्रेरणा देता है। गत 26 अक्टूबर को अयोध्या में पांच लाख 51 हजार दीपों से दीपावली उत्सव का भव्य शुभारंभ हुआ था और आज यहां काशी के 84 घाटों पर 21 लाख दीपों से देव दीपावली यानी देवताओं की दीपावली मना कर उत्सव का समापन हो रहा है। प्रदेश के पर्यटन, संस्कृति व धर्मार्थ कार्य राज्यमंत्री ( स्वतंत्र प्रभार) डा. नीलकंठ तिवारी ने राज्यपाल आनंदीबेन पटेल सहित देव दीपावली पर्व पर मौके पर उपस्थित विशाल जनसमूह का स्वागत किया और काशी की महत्ता पर प्रकाश डाला। 

Posted By: Abhishek Sharma

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