वाराणसी, जागरण संवाददाता। खनन मंत्रालय के पत्र के बाद सोनभद्र जिला प्रशासन दोबारा सक्रिय हुआ है। अब सोने की खदान की तलाश के लिए जिला प्रशासन ने टीम गठित की है। इसके तहत ओबरा और दुद्धी तहसील क्षेत्र में स्थित खदानों की रिपोर्ट तैयार कर एक सप्ताह के अंदर खनन मंत्रालय को भेजनी है। दरअसल दो साल पूर्व दैनिक जागरण की ओर से इस बात को उजागर किया गया था कि जिले में सोने की मात्रा कुछ इलाकों में है। हालांकि, सरकार ने कम सोने की मात्रा बताकर मामले को ठंडे बस्‍ते में डालने की कोशिश की थी। इस दौरान सर्वे की रिपोर्ट लगभग स्‍पष्‍ट होने के बाद अब उन खदानों को बेचने की तैयारी की जा रही है। जी हां, सोनभद्र जिले में सोना मौजूद है। इस लिहाज से इसे निकालने के लिए खदानों को सरकार बेचने की तैयारी भी कर रही है। इस बाबत जिला प्रशासन रिपोर्ट तैयार कर सरकार को भेजने जा रही है।

सोनांचल की कोख खनिज संपदा से भरा पड़ा है। सोने व एंडालुसाइड को लेकर चल रहे सभी कयासों पर खनन मंत्रालय नई दिल्ली के पत्र के बाद पूर्ण विराम लग गया है। मंत्रालय ने जनपद के चिन्हित स्वर्ण व एंडालुसाइड खदान की भूमि को चिन्हित करने व उसकी जीओ मैपिंग कराने का निर्देश दिया है। मंत्रालय से पत्र आने के बाद जिलाधिकारी अभिषेक सिंह ने विभिन्न विभागों की संयुक्त टीम बनाकर एक सप्ताह के अंदर रिपोर्ट प्रेषित करने का निर्देश दिया है। इसके क्रम में शनिवार को एसडीएम दुद्धी की अगुवाई में संयुक्त टीम ने डूमरा में चिन्हित खनन क्षेत्र का जीपीएस सीमांकन किया। दुद्धी तहसील के चक डूमरा गांव के भुइयां टोला में शनिवार को एंडालुसाइट खनिज के दो ब्लाकों का जीपीएस सीमांकन किया गया। इस दौरान दुद्धी उपजिलाधिकारी के नेतृत्व में वन भूमि, निजी भूमि तथा सरकारी भूमि का विवरण तैयार करने के लिए संयुक्त टीम द्वारा स्थलीय निरीक्षण भी किया गया। सीमांकन प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद यहां पर खनन के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

जिलाधिकारी ने बताया कि जिले के तीन ब्लाक नीलामी प्रक्रिया के लिए उपलब्ध हैं। इसके लिए ज्वाइंट वर्किंग ग्रुप का गठन भी किया गया है। खदान के आसपास भूमि चयन के दौरान यह देखा जाएगा कि वन भूमि, राजस्व भूमि व निजी भूमि कितनी है। इसके लिए टीम काे एक सप्ताह का समय दिया गया है। टीम में डीएफओ रेणुकूट, डीएफओ ओबरा, उप जिलाधिकारी दुद्धी, उप जिलाधिकारी ओबरा व खान अधिकारी हैं। बताया कि टीम से रिपोर्ट मिलने के बाद इसकी जानकारी खनन निदेशालय को उपलब्ध कराई जाएगी।

क्या है सिलीमैनाइट व एंडालुसाइट : सिलीमैनाइट एक अनुमिनी-सिलिकेट खनिज है। इसका नाम अमेरिका के रसायन शास्त्री बेंजामिन सिलीमैन के नाम पर रखा गया है। तापरोधक सामग्री के अतिरिक्त इसका उपयोग अन्य कार्यों में होता है। एंडालुसाइट का प्रयोग स्पार्क प्लग और पोर्सलेन बनाने में होता है। उत्तर प्रदेश में यह मीरजापुर समेत कई स्थानों पर मिलता है।

12 साल बाद शुरू हुई प्रक्रिया : जीएसआइ की टीम ने वर्ष 2005 से 2012 तक इस दिशा में काम किया था। सोने के भंडार की पुष्टि वर्ष 2012 में हुई थी, लेकिन इस दिशा में काम अब शुरू हो रहा है। बीस माह पूर्व दैनिक जागरण ने ही इसको लेकर खबर दी थी, लेकिन मात्रा को लेकर मंत्रालयों में सामन्जस्य नहीं होने के कारण यह मामला ठंडे बस्ते में चला गया था। एक बार फिर से यह प्रक्रिया शुरू हो गई है। देरी के पीछे सोने की गुणवत्ता व सरकार के आदेश का इंतजार का हवाला दिया गया।

खनिकर्म विभाग व जीएसआइ में चला था आंकड़ों का खेल : फरवरी 2020 में दैनिक जागरण ने खनिकर्म विभाग के आंकड़ों के हिसाब से खबर प्रकाशित की थी कि जनपद में तीन हजार टन सोने का भंडार मिला है। जिस पर बाद में जीएसआइ (भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण) ने यह कहते हुए इंकार कर दिया कि सोनांचल में महज 160 किलो सोना मिलने की उम्मीद है। अब जब एक बार फिर से सोना खनन को लेकर केंद्र सरकार कवायद शुरू कर रही है, तो यह प्रश्न उठना लाजिमी है कि महज 160 किलो सोने के लिए खनन तो होगा नहीं। इस विषय पर जनपद स्तर का कोई भी अधिकारी कुछ बोलने से साफ इंकार कर रहा है। उनका कहना है कि यह मामला अत्यंत गंभीर है, इस पर कुछ नहीं कह सकते।

Edited By: Abhishek Sharma