वाराणसी, जागरण संवाददाता। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की दूसरी वर्षगांठ के उपलक्ष्य में मंगलवार को आनलाइन कार्यशाला में वक्ताओें ने स्किल इंडिया को बढ़ावा देने में गतिशक्ति विश्वविद्यालय की भूमिका को सराहा। अध्यक्षीय संबोधन में बरेका की महाप्रबंधक व एनआरटीआइ बड़ोदरा की कुलपति अंजली गोयल ने समृद्ध विरासत संपन्न देश को नए भारत के रूप निर्मित करने के लिए नव-स्थापित केंद्रीय विश्वविद्यालय की भूमिका को लेकर विशेषज्ञों से सुझाव मांगे। कहा कि यह विश्वविद्यालय आत्मनिर्भर भारत के उद्देश्य को पूरा करने के लिए तकनीकी और कौशल का केंद्र बनेगा।

संसद में पारित केंद्रीय विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक के अनुसार राष्ट्रीय रेल परिवहन संस्थान को केंद्रीय विश्वविद्यालय 'गति शक्ति विश्वविद्यालय' के रूप में स्थापित किया गया है। मुख्य अतिथि और कार्यशाला के सभी पैनलिस्टों का स्वागत करते हुए प्रो. सीपी नंदा (डीन, प्रशासन) एनआरटीआइ ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि यह वैश्विक नागरिक और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अग्रणी बनाने में हमारी मदद करेगा। मुख्य वक्ता डा. सुजीत मिश्रा (ओएसडी, एनआरटीआइ) ने छात्रों का आह्वान किया कि उन्हें भविष्योन्मुखी शिक्षा ग्रहण कर बदलती तकनीकों और मांगों के साथ तालमेल बिठाने की आवश्यकता है।

डा. राम कृष्ण उपाध्याय (एनआरटीआइ) ने धन्यवाद ज्ञापित किया। राष्ट्रीय शिक्षा नीति की मसौदा समिति के सदस्य प्रो. टी.वी. कट्टिमणि कुलपति आंध्र प्रदेश, केंद्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय ने भी गतिशक्ति विश्वविद्यालय को स्किल इंडिया के संकल्प व आकांक्षाओं को गति प्रदान करने वाला बताया। मसौदा समिति की सचिव डा. शकीला टी शम्सू ने नीति की मुख्य विशेषताओं से अवगत कराया। प्रो. अमरेंद्र प्रसाद बेहरा ने डिजिटल शिक्षा पर जोर दिया। प्रो. जी रघुराम, शान कश्यप, प्रो. जितेश जे ठक्कर आदि रहे।

Edited By: Saurabh Chakravarty