दुनिया का सबसे लंबे नदी मार्ग वाला क्रूज 'गंगा विलास' यूरोपीय देशों के यात्रियों को लेकर काशी पहुंचा
दुनिया का सबसे लंबा रिवर क्रूज गंगा विलास 15 विदेशी यात्रियों के साथ रामनगर, वाराणसी पहुंचा। यह क्रूज निर्धारित समय ...और पढ़ें

गंगा विलास क्रूज दूसरी बार विदेशी यात्रियों को लेकर काशी पहुंचा, पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा।
HighLights
दुनिया का सबसे लंबा रिवर क्रूज गंगा विलास काशी पहुंचा।
15 विदेशी यात्री रामनगर मल्टी मॉडल टर्मिनल पर उतरे।
यात्री काशी के धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों का भ्रमण करेंगे।
जागरण संवाददाता, (रामनगर) वाराणसी। भारत में निर्मित दुनिया का सबसे लंबा रिवर क्रूज गंगा विलास मंगलवार शाम चार बजे 15 विदेशी यात्रियों को लेकर रामनगर स्थित मल्टी माडल टर्मिनल पहुंचा। क्रूज 12 अक्टूबर को कोलकाता से रवाना हुआ था। रामनगर आते समय यात्री दूर से गंगा के घाटों का दृश्य देखते हुए यात्रा का आनंद लेते रहे।
गंगा विलास निर्धारित कार्यक्रम से एक दिन पहले काशी पहुंचा। इसके 28 अक्टूबर को यहां आने का कार्यक्रम तय था। मंगलवार को यात्रियों का दल क्रूज पर ही आराम करेगा। आने वाले दिनों में यात्री गंगा आरती में शामिल होंगे और काशी विश्वनाथ मंदिर के दर्शन करेंगे। उनका सारनाथ स्थित बौद्ध तीर्थ स्थल जाने का भी कार्यक्रम है। इसके अलावा वे चुनार और रामनगर किले का भ्रमण करेंगे तथा दोनों ऐतिहासिक स्थलों के महत्व के बारे में जानेंगे।
यात्रियों का दल तीन नवंबर को इसी क्रूज से कोलकाता के लिए रवाना होगा। वापसी के दौरान वे बिहार के सांस्कृतिक, धार्मिक और पर्यटन स्थलों का भ्रमण करेंगे। गंगा विलास इससे पहले जनवरी 2023 में 36 विदेशी यात्रियों को लेकर रामनगर स्थित मल्टी माडल टर्मिनल आया था। यह दूसरी बार है जब क्रूज विदेशी यात्रियों के साथ काशी पहुंचा है।
इसमें पांच सितारा होटल जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। क्रूज में 50 यात्रियों के ठहरने की व्यवस्था है। साथ ही आधुनिक जिम, रेस्टोरेंट और सनडेक की सुविधा है, जहां से गंगा किनारे का दृश्य देखा जा सकता है।
पिछली यात्रा के दौरान गंगा विलास उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और असम से होकर गंगा में विकसित जलमार्ग के रास्ते डिब्रूगढ़ और बांग्लादेश तक गया था। इसने 3200 किलोमीटर की दूरी तय की थी और नदियों में विश्व की सबसे लंबी दूरी तय करने वाला पहला जहाज बना था।ज्ञात हो कि अगस्त में विदेशी यात्रियों को लेकर कोलकाता से चला राजमहल क्रूज गंगा में जलस्तर अधिक होने के कारण भागलपुर से ही लौट गया था।
