वाराणसी में घटाव की ओर गंगा का रुख, दशाश्वमेध घाट पर गंगा मंदिर के खुले कपाट
वाराणसी में गंगा का जलस्तर घटने लगा है, जिससे दशाश्वमेध घाट स्थित गंगा मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए फिर ...और पढ़ें

वाराणसी में गंगा का जलस्तर घटा, दशाश्वमेध घाट पर खुले गंगा मंदिर के द्वार।
HighLights
गंगा का जलस्तर घटने से वाराणसी में मिली थोड़ी राहत।
दशाश्वमेध घाट स्थित गंगा मंदिर के कपाट फिर से खुले।
बाढ़ के हालात बरकरार, जल पुलिस-एनडीआरएफ सतर्क।
जागरण संवाददाता, वाराणसी। गंगा का जलस्तर घटने लगा है। बाढ़ का पानी दशाश्वमेध स्थित प्राचीन शीतला माता मंदिर की छत से नीचे उतर गया है। जल पुलिस चौकी से भी पानी नीचे हो गया है, जिसके बाद दशाश्वमेध के गंगा मंदिर के कपाट खोल दिए गए हैं। केंद्रीय जल आयोग की रिपोर्ट के अनुसार 12 सितंबर 2026 को सुबह 8 बजे तक गंगा का जलस्तर 69.08 मीटर दर्ज किया गया। रिपोर्ट में गंगा की स्थिति आज स्थिर बताई गई है।
हालांकि, जलस्तर में कमी के बावजूद अभी भी बाढ़ के हालात बरकरार हैं। सभी घाटों का आपसी संपर्क टूटा हुआ है और गंगा किनारे बसे इलाकों में अभी भी पानी भरा हुआ है। स्थिति को देखते हुए जल पुलिस और एनडीआरएफ की टीमें लगातार पेट्रोलिंग कर रही हैं और लोगों को गहरे पानी में न जाने की अपील कर रही हैं।
गंगा के जलस्तर में आई कमी से स्थानीय निवासियों में कुछ राहत की भावना है, लेकिन बाढ़ के प्रभावों से निपटने के लिए सतर्कता बनाए रखना आवश्यक है। जल पुलिस और एनडीआरएफ की टीमें लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दे रही हैं।
दशाश्वमेध घाट पर स्थित गंगा मंदिर के कपाट खोलने का निर्णय स्थानीय प्रशासन द्वारा लिया गया है, ताकि श्रद्धालुओं को दर्शन करने में कोई कठिनाई न हो। प्रशासन ने यह सुनिश्चित किया है कि सभी सुरक्षा उपायों का पालन किया जाए।
स्थानीय लोगों का कहना है कि गंगा का जलस्तर घटने से कुछ राहत मिली है, लेकिन बाढ़ के कारण अभी भी कई समस्याएं बनी हुई हैं। जल पुलिस और एनडीआरएफ की टीमें लगातार स्थिति की निगरानी कर रही हैं और लोगों को सुरक्षित रहने की सलाह दे रही हैं।
स्थानीय प्रशासन ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्यों को तेज कर दिया है। प्रभावित परिवारों को आवश्यक सामग्री और चिकित्सा सहायता प्रदान की जा रही है। गंगा के जलस्तर में कमी आने के बावजूद, बाढ़ के कारण उत्पन्न चुनौतियों का सामना करने के लिए सभी संबंधित एजेंसियों को सक्रिय रहना होगा। स्थानीय निवासियों को भी सतर्क रहने की आवश्यकता है, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से बचा जा सके।
