चंदौली [अमित द्विवेदी]। कुंभ मेले में प्रयोग की गई युक्ति गंगा को प्रदूषण से मुक्ति दिलाएगी। शासन ने निकायों तक फरमान पहुंचा दिया है कि बायोरेमेडिएशन विधि से नालों का दूषित जल शोधित कराना सुनिश्चित करें। इस तकनीक का प्रयोग कुंभ के दौरान प्रयागराज में किया गया था। सुखद परिणाम सामने आए तो सरकार ने इसे अमलीजामा पहनाने का निर्णय लिया। प्रदेश के तीन नगर निगम, 12 पालिका और छह नगर पंचायतों को निर्देश हैं कि निकाय निधि, राज्य वित्त या 14वें वित्त की धनराशि से योजना को मूर्त प्रदान करें। जरूरत पडऩे पर उन फर्मों की मदद लेने को कहा गया है जिन्होंने मेले के दौरान बायोरेमेडिएशन विधि का उपयोग किया था।

बगैर शोधन गंगा में नहीं गिरेगा नालों का पानी

27 से 31 जनवरी के बीच प्रस्तावित गंगा यात्रा की तैयारियों के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट निर्देश जारी किया है कि किसी प्रकार के नगरीय सीवेज को बगैर निस्तारण के गंगा नदी में प्रवाहित न किया जाए। नगर निगम कानपुर, प्रयागराज और वाराणसी तथा नगर पालिका परिषद बिजनौर, फर्रूखाबाद, कन्नौज, मिर्जापुर, गाजीपुर, बलिया, गढ़मुक्तेश्वर-हापुड़, अनूपशहर-बुलंदशहर, चुनार, रामनगर, पं. दीनदयाल नगर और गंगा घाट-उन्नाव व नगर पंचायतों हस्तिनापुर-मेरठ, बिठूर-कानपुर, झूंसी-प्रयागराज, बबराला-संभल, सैदपुर-गाजीपुर और नरौरा-बुलंदशहर निकायों को शासन स्तर से चिटठी जारी कर दी गई है।

बायोरेमेडिएशन विधि से प्रदूषणमुक्त होंगी गंगा

दरअसल कुंभ मेले के दौरान प्रयागराज में राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान द्वारा छह नालों पर बायोरेमेडिएशन किया गया। जिन फर्मों ने कार्य को अंजाम दिया उसकी सूची भी निकायों को उपलब्ध करा दी गई है और जरूरत महसूस होने पर मदद लेने की बात कही गई है। शासन का निर्देश मिलते ही नगर पालिका परिषद ने योजना पर अमल शुरू कर दिया है। इस बारे में अधिशासी अधिकारी, नगर पालिका परिषद पीडीडीयू नगर,कृष्णचंद्र ने कहा कि नालों पर बायोरेमेडिएशन का निर्देश प्राप्त होने के बाद इसे मूर्त रूप देने की कवायद शुरू कर दी गई है। प्राथमिकता के आधार पर इसे पूरा कराया जाएगा। नीरी के अधिकारियों से वार्ता कर कार्य को पूरा कराया जाएगा।

 

Posted By: Saurabh Chakravarty

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