Gen-Z ने थाम लिया है दुर्गा पूजन के आयोजन का जिम्मा, डिजिटल मंत्रोच्चार और आनलाइन चंदे से भी आगे तक संभाला मोर्चा
काशी की दुर्गा पूजा में युवा पीढ़ी परंपरा और तकनीक का अद्भुत संगम प्रस्तुत कर रही है। वे डिजिटल मंत्रोच्चार, ...और पढ़ें

युवाओं के हाथ में काशी की दुर्गा पूजा की कमान, परंपरा और तकनीक का अनूठा संगम।
HighLights
युवा पीढ़ी काशी दुर्गा पूजा आयोजन में निभा रही मुख्य भूमिका।
डिजिटल मंत्रोच्चार, ऑनलाइन चंदा, ऊर्जा बचत जैसे नवाचारों का प्रयोग।
परंपरा संरक्षण के साथ सामाजिक सरोकार और आधुनिकता का संगम।
शैलेश अस्थाना, जागरण, वाराणसी। काशी की दुर्गा पूजा में नई पीढ़ी अपनी परंपरा और संस्कृति की ध्वजवाहक बन रही है। बुजुर्गों के मार्गदर्शन में युवाओं ने आयोजन की कमान संभाल ली है। पूजा के विधि-विधान और सांस्कृतिक विरासत को सहेजने के साथ वे व्यवस्था को भी नया रूप दे रहे हैं।
ढाक की थाप, धुनुची नृत्य, सिंदूर खेला के साथ कहीं डिजिटल माध्यमों से मंत्रोच्चार और रोशनी का संचालन हो रहा है, तो कहीं आनलाइन चंदा जुटाने और बिजली बचाने के प्रयोग किए जा रहे हैं। सजावट से लेकर सुरक्षा, भीड़ प्रबंधन और प्रसाद वितरण तक की जिम्मेदारी युवा निभा रहे हैं। उनकी पहल से काशी की दुर्गा पूजा में परंपरा की जड़ें भी मजबूत हो रही हैं और बदलाव के नए रंग भी उभर रहे हैं।
परंपरा को सहेजते हुए नई पीढ़ी तकनीक का प्रयोग तो कर रही है, विश्व शांति, पर्यावरण संरक्षण आदि के मसलों पर सामुदायिक भागीदारी भी व्यापक संदर्भ में निभाने को तत्पर है। पूजा पंडालों में ढाक की थाप से डिजिटल धमक तक का जो रंग देखने को मिल रहा है। वह इसी युवा पीढ़ी की युवा सोच का परिणाम है।
डिजिटल व्यवस्था से ऊर्जा बचत तक
ईगल क्लब में 88 सदस्य हैं, जिनमें 18 से 35 वर्ष आयु वर्ग के करीब 25 युवा हैं। अध्यक्ष शांतनु भट्टाचार्य व सचिव रवि पाल के अनुसार, युवाओं ने आयोजन के कई काम डिजिटल माध्यमों से जोड़ दिए हैं। मंत्रोच्चार के लिए साउंड सिस्टम ब्लूटूथ और यूट्यूब से संचालित होता है। लाइटिंग भी डिजिटल है। सुबह रोशनी स्वतः धीमी हो जाती है और धीरे-धीरे बंद हो जाती है।
हैलोजन का प्रयोग कम करने से बिजली की खपत घटी है। पूजा की पद्धति युवा भी सीखें, इसके लिए 24 वर्षीय ज्योतिक गोस्वामी और अर्जित मुखर्जी को पूजा सह-सचिव बनाया गया है। उनके नेतृत्व में युवा भोग वितरण, सुरक्षा, प्रशासनिक समन्वय, भीड़ प्रबंधन और सजावट संभाल रहे हैं।
ज्योतिक का कहना है कि वरिष्ठों से मिले संस्कार और मार्गदर्शन के साथ युवा नई जरूरतों के अनुरूप आयोजन को आगे बढ़ा रहे हैं। इस बार हम लोग पंडाल में ‘सोलार साज’ के माध्यम से विश्व शांति और देश के युवाओं को परंपरा व संस्कृति से जुड़ने का संदेश दे रहे हैं।
जिम स्पोर्टिंग क्लब के सचिव महेंद्र केशरी बनर्जी ने बताया कि क्लब में कुल 59 सदस्य हैं। समिति के अनुसार, इनमें 18 से 35 वर्ष के करीब 40 युवा हैं। अध्यक्ष और प्रमुख पदाधिकारी वरिष्ठ हैं, लेकिन पूजा की परंपरा अगली पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए 24 वर्षीय अभय रतन बनर्जी और 40 वर्षीय पीयूष कुमार नंदी को पूजा का प्रभार दिया गया है।
सुरक्षा, भीड़ प्रबंधन और तकनीकी व्यवस्था में युवा योगदान दे रहे हैं। बच्चों के लिए मेहंदी, सजावट और हिंदी-अंग्रेजी लेखन प्रतियोगिताओं के साथ शास्त्रीय गायन और नृत्य के आयोजन भी होते हैं। स्थानीय कलाकारों को मंच देना भी समिति की पहल का हिस्सा है।
परंपरा के साथ सामाजिक सरोकार
काशी की सबसे पुरानी दुर्गा पूजा समितियों में शामिल वाराणसी दुर्गोत्सव सम्मिलनी 105 वर्षों से आयोजन कर रही है। अध्यक्ष देवाशीष दास के अनुसार, समिति के 135 सदस्यों में 75 से 80 प्रतिशत युवा हैं। 32 वर्षीय संजीव बोस संयुक्त सचिव हैं तो उसी आयु वर्ग की नंदिता दत्ता व दीपक मुखर्जी एक्जिक्यूटिव सदस्य हैं।
इनके नेतृत्व में युवाओं की सक्रियता से सजावट और डिजिटल माध्यमों के इस्तेमाल में बदलाव आया है। पंडाल में लगे दो बड़े एलईडी पर पूजा और अन्य गतिविधियां बाहर मौजूद श्रद्धालु भी देख सकते हैं। समिति में अष्टमी पर जरूरतमंदों को अन्न और बर्तन दान करने की परंपरा पिछले 15 वर्षों से जारी है। सप्तमी से नवमी तक भोग प्रसाद भी वितरित किया जाता है।
युवा जोश और तकनीक प्रयोग से हुई आसानी
जंगमबाड़ी के विशाल क्लब में 60 सदस्यों में 18 से 35 वर्ष के 25 युवा हैं। युवा सदस्य गौरव राय चौधरी बताते हैं कि वरिष्ठों का मार्गदर्शन मिलता है, लेकिन पंडाल की सजावट से प्रसाद वितरण तक की जिम्मेदारी युवा ही संभालते हैं। चंदा जुटाने में आनलाइन माध्यम का प्रयोग बढ़ा है, जबकि रसीद की परंपरा भी कायम है। व्यवस्था में नए बदलावों का साुझाव युवा भी देते हैं परंतु अंतिम निर्णय वरिष्ठजनों का ही मान्य होता है।
हमारी युवा टीम अनुशासन के साथ दिशा-निर्देशों का पालन करती है। इस बार मंच को सीढ़ीदार बनाया जा रहा है। प्रकाश व्यवस्था के लिए पहले इस्तेमाल होने वाले जेनरेटर को हटा दिया गया है। जरूरत पड़ने पर आसपास के बड़े होटलों से बिजली कनेक्शन लिया जाता है। इस बार क्लब का 50वां वर्ष है, पहली बार भगवती जागरण और माता की चौकी का आयोजन भी किया जा रहा है।
