वाराणसी, जागरण संवाददाता। फोर्डा (फेडरेशन आफ रेजिडेंट डाक्टर्स एसोसिएशन आफ इंडिया) केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री को पत्र भेजकर कहा है कि उनकी मांगें नहीं मानी गई तो वे छह दिसंबर से इमरजेंसी सेवा भी बाधित करेंगे। मालूम हो कि नियुक्त के लिए काउंसिलिंग में हो रही देरी के खिलाफ चिकित्सा विज्ञान सस्थान, बीएचयू के जेआर जूनियर रेजिडेंट पिछले शनिवार से ही हड़ताल पर हैं। उनकी ओर से ओपीडी व आइपीडी की सेवा का बहिष्कार किया जा रहा है। इसके कारण मरीजों की भर्ती नहीं हो पा रही है। सामर्थवान मरीज तो निजी अस्पताल में चल जा रहे हैं लेकिन गरीब मरीजों की मुसीबत बढ़ गई है।

अब फाेर्डा के आह्वान के बाद यहां के भी जेआर ने सोमवार से इमरजेंसी सेवा बाधित करने का ऐलान किया है। वहीं इसके विरोध में एनएसयूआइ बीएचयू इकाई के सदस्यों ने हड़ताली डाक्टरों पर कार्रवाई करने की मांग की है। चेताया है कि अगर जूनियर डाक्टर हड़ताल से बाहर नहीं आए तो उनके खिलाफ छात्र भी धरने पर बैठ जाएंगे। इस संबंध में एनएसयूआई बीएचयू इकाई का एक प्रतिनिधिमंडल शनिवार को प्रभारी कुलपति से मिला। बीएचयू अस्पताल के डाक्टरों के अवैध हड़ताल और कार्य बहिष्कार के वजह से मरीजों को हो रही समस्या से अवगत कराया और यह चेतावनी दी कि यदि विश्वविद्यालय प्रशासन 12 घंटे में अविलंब या धरना खत्म नहीं कराता है तो एनएसयूआई बीएचयू इकाई के सदस्य भी शांतिपूर्ण तरीके से विरोध दर्ज कराएंगे।

ज्ञापन के माध्यम से एनएसयूआइ बीएचयू इकाई ने हड़ताली डॉक्टरों से अपील किया है कि वे विरोध का लोकतांत्रिक तरीका अपनाएं और काम पर वापस लौटें। इस धरने की वजह से आमजन का काफी नुकसान हुआ है और कोरोना महामारी के समय इस तरह का रवैया बहुत ही घातक है। इसलिए, एनएसयूआइ बीएचयू इकाई ने हड़ताली डाक्टरों पर एस्मा और महामारी अधिनियम के तहत कार्यवाही करने की भी मांग की। प्रतिनिधिमंडल में राणा रोहित, नीरज, कपीश्वर, जंग बहादुर, अभिनव आदि शामिल रहे।

Edited By: Abhishek Sharma