यह एक आर्काइव लेख है, जिसे May 15, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
प्राकृतिक कीटनाशकों से सुरक्षित रहेगा खाद्यान्न, सेहत को नहीं पहुंचेगा नुकसान
काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के शोधकर्ताओं ने औषधीय पौधों से एक इको-फ्रेंडली कीटनाशक विकसित किया है। यह कीटनाशक न केवल ...और पढ़ें

संग्राम सिंह, वाराणसी। खेती के बाद खाद्यान्न भंडारण करते समय कीट, फफूंद और जीवाणुओं का हमला हमेशा से ही एक बड़ी समस्या रही है। इससे निपटने के लिए रासायनिक कीटनाशकों का उपयोग किया जाता है। रासायनिक कीटनाशक मानव स्वास्थ्य के लिए तो घातक हैं ही, पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचाते हैं।
अब इस चुनौती का समाधान खोजते हुए काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के शोधकर्ताओं ने औषधीय पौधों से एक इको-फ्रेंडली कीटनाशक विकसित किया है।
यह कीटनाशक न केवल रासायनिक कीटनाशक से अधिक प्रभावी और किफायती है, बल्कि पूरी तरह से सुरक्षित भी है। भारत सरकार से इसे पेटेंट भी मिल चुका है और जल्द ही यह किसानों के लिए बाजार में उपलब्ध होगा।

बीएचयू के वनस्पति विज्ञान विभाग के प्रो. एनके दुबे के नेतृत्व में शोधकर्ताओं ने शाहजीरा (कैरम कार्वी), चाय का पेड़ (मेलालियूका लियोकोडेंडरोन) और लेमनग्रास (सिंबोपागन स्ट्रीट्स) जैसे पारंपरिक औषधीय पौधों का उपयोग कर यह प्राकृतिक कीटनाशक तैयार किया है।
शाहजीरा पेट संबंधी समस्याओं और वात रोगों में उपयोगी है, मेलालियूका का तेल रोगाणुरोधी और एंटीसेप्टिक गुणों के लिए जाना जाता है, जबकि लेमनग्रास का तेल अरोमाथेरेपी और फफूंद नाशक के रूप में प्रभावी है।
15 से 20 रुपए की लागत
प्रो. दुबे के अनुसार, यह प्राकृतिक कीटनाशक रासायनिक कीटनाशकों की तुलना में न सिर्फ सस्ता है, अधिक प्रभावी और कम मात्रा में बेहतर परिणाम देता है। मात्र 15 से 20 रुपये की लागत से यह एक क्विंटल खाद्यान्न को कीटों, फफूंद और माइकोटाक्सिन (फफूंद द्वारा उत्पन्न विषाक्त पदार्थ) से सुरक्षित रख सकता है। चूहों पर किए गए परीक्षणों में इसे पूरी तरह सुरक्षित पाया गया है।
स्वास्थ्य के लिहाज से भी सुरक्षित
भारत जैसे उष्ण कटिबंधीय देश में, भंडारण के दौरान नमी कीटाणुओं और जहरीली फफूंद की वृद्धि को बढ़ावा देती है। ये फफूंद माइकोटाक्सिन जैसे हानिकारक रसायन उत्पन्न करती हैं, जो खाद्यान्न के साथ मानव शरीर में प्रवेश कर लिवर, किडनी और पाचन तंत्र को नुकसान पहुंचाते हैं।
पारंपरिक रासायनिक कीटनाशक इनका मुकाबला तो करते हैं, लेकिन ये मानव स्वास्थ्य को भी कई तरह से प्रभावित करते हैं। नया प्राकृतिक कीटनाशक फ्यूमिगेंट (वाष्प के रूप में प्रयुक्त) के रूप में काम करता है, जो खाद्यान्न को कीटों, फफूंद और माइकोटाक्सिन से बचाता है।

यह मानव स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित होने के साथ-साथ पर्यावरण के लिए भी अनुकूल है। शोध में प्रो. दुबे के साथ डा. भानु प्रकाश, डा. अभिषेक द्विवेदी और डा. शिखा तिवारी ने महत्वपूर्ण योगदान दिया है। यह नवाचार न केवल खाद्यान्न सुरक्षा को बढ़ावा देगा, बल्कि किसानों और उपभोक्ताओं को स्वास्थ्यवर्धक और पर्यावरण-अनुकूल विकल्प भी प्रदान करेगा।
