वाराणसी, जेएनएन। पहाड़ों पर लगातार बारिश होने से मैदानी इलाकों में नदियों में बढ़ाव दर्ज किया जा रहा है। पूर्वांचल में गंगा, सरयू (घाघरा), तमसा, वरुणा, सोन और कर्मनासा आदि प्रमुख नदियां हैं। हालांकि इसके अलावा कई अन्‍य पहाडी नदी आैर नाले सोनभद्र, मीरजापुर और चंदौली जिले में आती हैं जो बरसात के ही दिनों में अपने अस्तित्‍व में नजर आती हैं।

अब गंगा का जलस्‍तर काशी के लिए चिंता का विषय बन गया है। गंगा के जलस्‍तर में बढोतरी होने से दशाश्वमेध घाट पर गंगा सेवा निधि द्वारा होने वाली दैनिक गंगा आरती का स्थान दोबारा परिवर्तित किया गया है। गंगा सेवा निधि संस्‍था की ओर से होने वाली नैत्यिक गंगा आरती के पूर्व के स्थान पर जलस्‍तर बढ़ने से यह परिवर्तन हुआ है। आगे जलस्‍तर और भी बढ़ता रहा तो गंगा आरती का स्‍तर और ऊपर किया जाएगा। 

वहीं सबसे बड़ी नदी गंगा में बीते तीन दिनों में छह फिट तक जलस्‍तर बढ़ गया है। इन दिनों में गंगा का जलस्तर खतरे का निशान छूने को तैयार नजर आ रहा है। हालांकि अभी यह स्‍तर खतरे के निशान से काफी नीचे है मगर बीते कुछ वर्षों में गंगा अपने पाटों को छोड़कर कई बार शहर का रुख कर चुकी हैं। गंगा के शहर में प्रवेश करने से लंका सहित कई इलाके अक्‍सर बाढ़ में डूब जाते हैं।

हालांकि अभी खतरा तो नहीं है मगर जिस तरह प्रतिदिन गंगा के जलस्‍तर में लगातार बढोतरी हो रही है उससे उम्‍मीद है कि अगले चौबीस घंटों में गंगा के जलस्‍तर में बढोतरी से गंगा आरती का स्‍थल और भी बदलने की जरूरत पड़े। गंगा में उफान के बीच अब भी नौका संचालन होने से पर्यटकों की सुरक्षा को देखते हुए प्रशासन भी शीघ्र गंगा में नौका विहार पर रोक लगा सकती है। वहीं गंगा में जल पुलिस को भी हालात देखते हुए अलर्ट कर दिया गया है। 

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