वाराणसी । बीते तीन दिनों से गंगा के जलस्‍तर में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। जिसकी वजह से अंचलों में ही नहीं बल्कि तटवर्ती निचले इलाकों में भी अब चिंता बढ़ गई है। मंगलवार को दोपहर बाद से लगातार जलस्‍तर में लगातार बढ़ाव से गंगा अब काशी की गलियों में प्रवेश कर चुकी हैं। अब गंगा में उफान से गलियों में भी नाव चलने की नौबत आ गई है।

रौद्र रूप में आईं गंगा

गंगा अब अपना रौद्र रूप धारण करने लगी हैं। गंगा के लगातार बढ़ते जल स्तर के कारण अस्सी घाट से लेकर टिकरी तक रहने वाले लोगों की धड़कने बढ़ने लगी है। सामनेघाट नाले से पानी पटेल नगर, रत्नाकर विहार, मारुति नगर, गायत्री नगर से लगायत छितुपुर भगवानपुर की तरफ बढ़ने लगा है। वहीं नगवां नाले से पानी घुसने नगवा पार्क के सामने बस्ती में जाने वाला मार्ग डूब गया है। गंगा में बढ़ाव को देखते हुए लोग अपने अपने सुरक्षित स्थानों की तलाश में जुट गए है। 

देर शाम घाट पर पलायन की स्थिति

सामनेघाट के रहने वाले विकास मिश्र, नित्यानंद पाठक, अजय यादव और नगवा के रहने वाले पप्पू यादव ने बताया कि बीते साल आई बाढ़ से हुई तबाही से भी कोई सबक नही लिया गया। बाढ़ को रोकने के लिए तटबंध नही बनने के कारण इस बार बाढ़ में पुनः पूरा इलाका जलमग्न हो जाएगा। बाढ़ से बचाव करने के लिए ना ही भी तक लंका और भेलूपुर थाने पर लाइफ जैकेट, टार्च और रस्सी नही पहुंचा है। दूसरी तरफ शाम होते होते सामनेघाट के मारुति नगर के रहने वाले विकास सिंह के दरवाजे तक पानी पहुंचने के कारण मंगलवार को परिवार को दूसरी जगह शिफ्ट करने में लगे रहे।

अस्सी घाट पूरी तरह डूबा

नया अस्सी घाट स्थित सुबह -ए - बनारस का मंच जहां सांस्कृतिक कार्यक्रम होता है वह पूरी तरह डूब चुका है। सुबहे बनारस मंच पर इस समय नाव बंधी हुई है। जबकि गली में पानी भरने की वजह से लोगों की घाटों तक आवाजाही अब थम गई है। अगर गंगा का जलस्‍तर ऐसे ही बढ़ता रहा तो अगले चौबीस घंटों में गंगा के तटवर्ती कई इलाकों में जलभराव की नौबत आ सकती है।

तटवर्ती इलाकों में बढ़ी चिंता

गंगा के तटवर्ती निचले इलाकों में पहले ही पानी भरा हुआ है। अब घाटों के ऊपर गंगा का जलस्‍तर आने से कारोबारियों को भी दिक्‍कत का समना करना पड़ेगा। वहीं शवदाह करने के लिए भी अब कतार लगने लगी है क्‍योंकि घाट तो पहले ही डूबे थे अब गलियों में भी कतार की स्थिति आ गई है। आने वाले चौबीस घंटों में जलस्‍तर बढ़ने से सामने घाट, ढाब क्षेत्र, रमना आदि इलाकों में भी अब चिंता बढ़ गई है।

Posted By: Abhishek Sharma