वाराणसी (जेएनएन) । भगवान बुद्ध की प्रथम उपदेश स्थली सारनाथ में साढ़े सात करोड़ रुपये से बुद्धाथीम पर बनने वाले पहला मल्टी स्पेशियलिटी हास्पिटल के डिजाइन में बदलाव कर दिया गया है। अब एक मंजिल करते हुए अब तीन मंजिला बनाने का निर्णय लिया गया है। जमीन कम होने के कारण नक्शे में बदलाव किया गया है। नक्शा तैयार करने के साथ कार्यदायी एजेंसी समाज कल्याण निगम को तय कर दिया गया है। योजना पर अंतिम मुहर लगान के लिए फाइल शासन में भेजी गई है।

स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि इस माह के अंत तक हरी झंडी मिलते ही काम शुरू कर दिया जाएगा। बौद्ध अनुयायियों के तीर्थ स्थलों में एक सारनाथ भी है। यहां रोज सैकड़ों की संख्या में देशी-विदेशी पर्यटक आते हैं। यहां हास्पिटल नहीं होने के कारण पर्यटकों को काफी परेशानी होती है। चिकित्सा के अभाव में कई पर्यटकों की मौत भी हो चुकी हैं, क्योंकि समय पर चिकित्सक उपलब्ध नहीं हो पाते हैं। बीमार लोगों को पंडित दीनदयाल या बीएचयू ले जाना पड़ता है। सरकारी अस्पताल नहीं होने के कारण पर्यटकों को निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ता है, ऐसे में चिकित्सक उनका उत्पीड़न करते हैं। इसको लेकर कई बार विवाद भी हो चुका है। सारनाथ चौराहे पर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हैं।

यहां चिकित्सा व्यवस्था समुचित नहीं होने पर बौद्ध मंदिर प्रभारियों ने आधुनिक माडल के अस्पताल बनाने की मांग थी। महाबोधि सोसायटी आफ इंडिया के कार्यक्रम में भी मंदिर प्रभारियों ने पूर्व मुख्यमंत्री के सामने मामला उठाया था। 30 बेड के मल्टी स्पेशियलिटी हास्पिटल में महिला प्रसूति, हड्डी, नेत्र, गैस्टिक, एक्स-रे मशीन समेत कई चिकित्सकों की तैनाती होगी। इसके अलावा चिकित्सक आवास और पार्किंग सुविधा होगी। बुद्धाथीम पर मल्टी स्पेशियलिटी हास्पिटल प्रस्तावित है।नक्शा तैयार करने के साथ कार्यदायी एजेंसी समाज कल्याण निगम को तय कर दिया गया है। 10 बिस्वा जमीन में पूरी सुविधाएं नहीं हो पा रही थी, ऐसे में अब तीन मंजिला हास्पिटल बनाने का निर्णय लिया गया है। -डा. वीबी सिंह, सीएमओ।

केस स्टडी : श्रीलंका के सियोनि दयाल की पिछले वर्ष एक गेस्ट हाउस में हालत बिगड़ने पर लोग उपचार कराने को लेकर सारनाथ में भटकते रहे। समय से उपचार नहीं होने के कारण उसकी मौत हो गई थी।