वाराणसी, जेएनएन। सूर्यदेव के उत्तरायण होने के साथ श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर विस्तारीकरण-सुंदरीकरण परियोजना के दूसरे चरण का श्रीगणेश हो गया। मकर संक्रांति पर बुधवार को शुभ मुहूर्त में सुबह 11.39 बजे अहमदाबाद की निर्माण कंपनी पीएसपी प्रोजेक्ट्स कारिडोर क्षेत्र में इसका शुभारंभ किया। वैदिक ब्राह्मïणों द्वारा सस्वर मंत्रों के बीच मुख्य कार्यपालक अधिकारी विशाल सिंह ने अमृतेश्वर महादेव मंदिर के पास पहली ईंट रखी। कारिडोर निर्माण के लिए 18 माह का लक्ष्य रखा गया है।

वर्क आर्डर को संशोधित शासनादेश का इंतजार

परियोजना के दूसरे चरण में निर्माण कार्यों के लिए भूमि पूजन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आठ मार्च 2019 को कर चुके हैैं। बीते 27 दिसंबर को निविदा में पीएसपी प्रोजेक्ट्स को न्यूनतम दर के आधार पर कार्य दिया गया था। हालांकि निर्माण के लिए शासन से स्वीकृत बजट 318.67 करोड़ रुपये से 20 करोड़ रुपये अधिक न्यूनतम निविदा आने पर 339 करोड़ की हाल में फिर से स्वीकृति कराई गई। ऐसे में वर्क आर्डर के लिए संशोधित शासनादेश का इंतजार किया जा रहा है। मुहूर्त देखते हुए कंपनी ने पूजन की औपचारिकता पूरी कर ली। मशीनें भी अहमदाबाद से आने लगी हैैं। पहले चरण में 283 भवनों की खरीद लगभग 398 करोड़ रुपये की लागत से की जा चुकी है। कार्यदायी एजेंसी पीडब्ल्यूडी के अधीक्षण अभियंता एसके अग्रवाल ने बताया कि दो दिन में संशोधित शासनादेश आ जाएगा।

चार चरणों में होगा निर्माण कार्य 

श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर से गंगा तट तक 50 हजार वर्ग मीटर में बन रहे कारिडोर का निर्माण चार चरणों में किया जाएगा। मंदिर सीईओ विशाल सिंह के अनुसार प्रथम चरण में मंदिर परिसर, दूसरे में गंगा छोर और तीसरे में ललिता घाट, जलासेन और मणिकर्णिका का सुंदरीकरण किया जाएगा।

विस्तार की दिशा में दूसरा प्रयास

श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर के वर्तमान स्वरूप का इंदौर की महारानी अहिल्याबाई होल्कर ने 1780 में निर्माण कराया था। वर्ष 1839 में पंजाब के महाराज रणजीत सिंह ने शिखर को स्वर्ण मंडित कराया। मंदिर का प्रदेश शासन ने वर्ष 1983 में अधिग्रहण किया और व्यवस्था संचालन के लिए न्यास व कार्यपालक समिति गठित की गई। वर्ष 2006 में रानी भवानी और तारकेश्वर महादेव को एक कर मुख्य मंदिर परिसर को विस्तार दिया गया था।

Posted By: Saurabh Chakravarty

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