आजमगढ़ [राकेश श्रीवास्तव ]। शक्ति शर्मा के घर शनिवार की शाम सुहानी रही ...। फादर्स डे की पूर्व संध्या पर बैडमिंटन के अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी शिवम शर्मा व राष्ट्रीय खिलाड़ी शांतनु शर्मा पिता के पास पहुंच आए थे। लाजिमी भी कि शक्ति शर्मा ने बेटों के हुनर को तराशने में सबकुछ न्योछावर कर दिया। बेकरी का कारोबार बेटों को मंजिल तक पहुंचाने के एकतरफा प्रयास की भेंट चढ़ गया। बहरहाल, अंत भला तो सब भला की तर्ज पर बेटों की कामयाबी से खुशियों ने शक्ति के घर में डेरा डाला तो एक क्या शर्मा फैमिली के लिए हर शाम सुहाना रहने लगी है।

बेटों की फिटनेस को उनके संग फील्ड में लगाते दौड़

शहर के खत्री टोला निवासी शक्ति शर्मा की रुचि क्रिकेट में थी। लेकिन उन्हें बड़े बेटे शिवम में रुचि बैडमिंटन के प्रति दिखी। बड़े भाई को देख छोटे शांतनु को भी बैडमिंटन भाने लगा। शक्ति ने दोनों बेटों के हुनर को भांप उन्हें तराशने को खुद बैडमिंटन की बारीकियां सीखीं। बच्चों को निखारने के लिए उनके साथ खुद खेलते ताकि उन्हें तराश सकें। फिटनेस के लिए दोनों बेटों संग खुद ग्राउंड के चक्कर लगाने रोजाना उनके साथ पहुंच जाते। उम्र के 15 वें पड़ाव पर पहुंचते ही शिवम को लखनऊ स्पोर्ट्स कालेज में भेज दिया, जहां से स्टेट, नेशनल खेलते शिवम अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी बन गए।

खुद भी बने 50 प्लस वर्ग के स्टेट चैंपियन

शक्ति अपने बेटों को तराशने के दौरान खुद के खेल को भी निखारते गए। जिला स्तर के बाद मंडल व प्रदेश स्तर की प्रतियोगिताओं में अपने ग्रुप वर्ग में दो बार स्टेट चैंपियन बने थे। पड़ाव की ओर बढ़ रही उम्र में भी पिता की जीजिविशा ने भी दोनो बेटों में सफलता की ऊर्जा भरने कोई कसर बाकी नहीं रखी।

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‘उम्मीदें परवान चढ़ीं हैं। मैं दोनों बेटों की सफलता से संतुष्ट हूं। शिवम इंडियन कैंप में हैं। शांतनु भी अच्छा कर रहा है। इतना जरूर कहूंगा कि सरकार को सहयोग के लिए आना चाहिए। ऐसा हुआ तो घर-घर से शिवम और शांतनु निकलेंगे।’ -शक्ति शर्मा

Edited By: Abhishek Sharma