खाद पर किसानों की निर्भरता घटी, 78 हजार बोरी का कम इस्तेमाल, आंकड़ों ने चौंकाया
काशी के किसान अब जैविक खेती की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं, जिससे उर्वरकों का इस्तेमाल काफी कम हुआ ...और पढ़ें

काशी में जैविक खेती का बढ़ता रुझान, किसानों ने घटाई खाद पर निर्भरता।
HighLights
काशी के किसान जैविक खेती की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं।
पिछले सीजन से 78 हजार बोरी कम उर्वरक का उपयोग हुआ।
सरकार को उर्वरक सब्सिडी में 15.70 करोड़ रुपये की बचत हुई।
जागरण संवाददाता, वाराणसी। काशी के किसानों का रूझान जैविक खेती की ओर तेजी से बढ़ा है। अब तक उर्वरकों का इस्तेमाल कर फसल तैयार करने वाले किसान भी प्राकृतिक खेती को तवज्जो दे रहे हैं। पिछले सीजन के मुकाबले 78हजार बोरी से कम उर्वरक का इस्तेमाल इसका प्रमाण है। कृषि विभाग ने जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए शहंशाहपुर में 40 एकड़ जमीन पर जैविक तरीके से सब्जी की खेती भी शुरू कराई है। ऐसे प्रयास ही उर्वरक के इस्तेमाल को सीमित कर रहे हैं।
खरीफ सीजन में 67,462 हेक्टेयर क्षेत्रफल में पिछले वर्ष खरीफ के 10 फसलों की बुआई हुई थी। इसमें धान 49,883 हेक्टेयर में बोया गया जबकि बाजरा 4184 हेक्टेयर में बोया गया था। अरहर दाल 4298 हेक्टेयर, मक्का 2390 हेक्टेयर, ज्वार 2499 हेक्टेयर, उर्द 1491 हेक्टेयर, मूंग की फसल 1198 हेक्टेयर, तिल 1237 हेक्टेयर में बोया गया था। इसमें उर्वरक का सबसे कम इस्तेमाल किया गया।
रबी सीजन 2025 के मुकाबले इस खरीफ सीजन में 3534 बोरी यूरिया कम इस्तेमाल किया गया। यह आंकड़ा रबी सीजन के मुकाबले 18 % कम रहा। कुल 3534 एमटी यूरिया कम लगी। काशी में एक एमटी में तकरीबन 22 बोरी उर्वरक होता है। यानी कुल 78525 बोरी उर्वरक कम लगा। एक बोरी पर सरकार की तरफ से 2000 रुपये सब्सिडी दी जाती है। इस हिसाब से सरकार के 15.70 करोड़ रुपये बच गए, जो सब्सिडी के रूप में उसे देना था।
पिछले सीजन के मुकाबले 78525 बोरी यूरिया का कम इस्तेमाल हुआ है। सब्सिडी के रूप में 15.70 करोड़ रुपये की बचत भी हुई। उर्वरक के कम इस्तेमाल से कई तरह की समस्याएं भी खत्म हो जाती हैं।
संगम सिंह, जिला कृषि अधिकारी
