भदोही [महेंद्र दुबे]। सरकारी योजनाओं में कितना फर्जी आंकडा भरा गया है यह भदोही जिले में जांच के दौरान उजागर होने के बाद अधिकारियों के माथे पर बल है। केंद्र सरकार की ओर से 2012 में जनपद के सभी 561 ग्राम पंचायतों में कराए गए बेसलाइन सर्वें की फीडिंग में फर्जीवाड़ा कर दिया गया है। प्रधानों और सचिवों की तैयार सूची से 2.40 शौचालयों का निर्माण करा दिया गया है। केंद्र सरकार की वेबसाइट पर आनलाइन फीड लाभार्थी गांवों में खोजे नहीं मिल रहे हैं। पंचायत राज विभाग की ओर से बेसलाइन सर्वे को संशोधित करने के लिए पत्राचार किया गया लेकिन अभी तक अनुमति नहीं मिली।

सर्वे में कैसे हुआ फर्जीवाड़ा 

केंद्र सरकार ने वर्ष 2012 में शौचालय के लिए पात्र लाभार्थियों को चयनित करने के लिए बेसलाइन सर्वे कराने के लिए निर्देशित किया था। इसके लिए संबंधित गांव के सचिव और सहायक विकास अधिकारी पंचायत के साथ ही साथ अन्य कर्मियों की ड्यूटी लगाई गई थी। सर्वे करने वाली टीम ने मनमानी तरीके से एक ही नाम को सर्वे सूची में कई बार फीड कर दिया। कई गांव तो ऐसे हैं जहां पर उस जाति के लोग निवास ही नहीं करते हैं। उस जाति के लोग भी सर्वे सूची में शामिल हैं। एक नहीं जनपद के सभी 561 ग्राम पंचायतों में बेसलाइन सर्वे में फर्जीवाड़ा कर दिया गया है। सर्वे में 2.40 लाख पात्रों की सूची तैयार की गई। इसी के सापेक्ष भारत सरकार की ओर से बजट भी जारी कर दिया गया। सर्वे में फर्जीवाड़ा की जानकारी होते ही ग्राम पंचायतों ने खुद की सूची तैयार कर निर्धारित लक्ष्य के अनुसार शौचालयों का निर्माण करा दिया। 

प्रधान और सचिवों ने करा दिया जीओ टैग

बेसलाइन सर्वे में फीडिंग में फर्जीवाड़ा के बाद ग्राम पंचायतों में लाभार्थियों ने सूची तैयार कर लिया। सूची के आधार पर शौचालयों का निर्माण भी करा दिया। यही नहीं उसे आनलाइन जीओ टैग भी करा दिया। शौचालयों का जीओ टैग होने से ग्राम पंचायतों के साथ ही साथ अधिकारियों के भी लक्ष्य पूरे हो गए। इसके साथ ही जिले को शौचमुक्त घोषित कर दिया गया।

केस 1 : औराई के हरिनारायणपुर गांव में बेसलाइन सर्वे के अलावा भी चार अलग-अलग सूची तैयार कराया गया है। बेसलाइन सर्वे में कई ऐसे नाम शामिल है,गांव में उस नाम और जाति का लाभार्थी नहीं है। शिकायत करने वालों का कहना है कि गांव में चार अलग-अलग सूची है। ऐसे में किस सूची को सही माना जाए। वैसे बेसलाइन सर्वे के शामिल पात्र ही शौचालय के अधिकृत हैं। गांव में धांधली मिलने पर प्रधान के अधिकार भी सीज कर दिए गए हैं।

केस 2 : परगासपुर गांव में बेसलाइन सर्वे के आधार पर बजट आवंटित किया गया था। सर्वे में पात्रों का नाम गलत फीड होने पर ग्राम पंचायत ने खुद की सूची तैयार कर शौचालय का निर्माण करा दिया। शौचालय निर्माण में 5.60 लाख का घोटाला कर लिया गया था। ग्राम प्रधान और सचिव पर कार्रवाई की गई थी। 

केस 3 : सुरियावां ब्लाक के मंगुरा गांव में 77 शौचालय निर्माण में धांधली की गई। जांच में मामला सही पाया गया। जिलाधिकारी ने ग्राम प्रधान के वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकार को सीज कर दिया गया है।  

- बेसलाइन सर्वे की फीडिंग में व्यापक स्तर पर गड़बड़ी है। सर्वे कर रहे कर्मियों ने एक ही नाम के लाभार्थियों कई बार फीड कर दिया है। इसको संशोधित करने के लिए भारत सरकार की ओर से कई वेबसाइट खोली गई थी लेकिन किसी ने संशोधित नहीं किया। जिला पंचायत राज अधिकारी की ओर से भी कई बार भारत सरकार से संशोधित करने के लिए अनुमति मांगी गई लेकिन अभी तक नहीं मिल पाया है। बेसलाइन सर्वे में फीड सूची के आधार पर ही बड़ी शिकायतें मिल रही हैं। प्रधानों की सूची पर तैयार शौचालयों को ही अधिकृत माना जा रहा है। उसी आधार पर जांच भी कराई जा रही है। - सरोज पांडेय, जिला समन्वयक, स्वच्छता मिशन भदोही।

 

Posted By: Abhishek Sharma

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