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एयर शो में शाम‍िल हर विमानों का अपना शौर्य, कहान‍ियां नहीं हकीकत को जीते हैं ये वायु योद्धा

By Prakash Pandey Edited By: Abhishek sharma
Published: Sun, 25 Oct 2026 08:09 PM (IST)

वाराणसी एयर शो में भारतीय वायुसेना और नौसेना के विभिन्न युद्धक विमानों और हेलीकॉप्टरों की विशेषताओं का प्रदर्शन किया गया। ...और पढ़ें

वाराणसी एयर शो: भारतीय वायुसेना के शौर्यवान विमानों और हेलीकॉप्टरों की अद्भुत गाथा।

वाराणसी एयर शो: भारतीय वायुसेना के शौर्यवान विमानों और हेलीकॉप्टरों की अद्भुत गाथा।

HighLights

  1. सी-17 ग्लोबमास्टर-3 भारी सैन्य परिवहन में अत्यधिक उपयोगी।

  2. रुद्र और प्रचंड जैसे हेलीकॉप्टर युद्ध अभियानों हेतु विकसित।

  3. नेत्र और पी-8आई निगरानी क्षमता को मजबूत करते हैं।

जागरण संवाददाता, वाराणसी। वायुसेना की ओर से युद्धक व‍िमानों जो आयोजन में शमा‍िल हुए उनकी अपनी ही व‍िशेषता रही है। इनका उपयोग भारतीय सेना करती रही है। इनके उपयोग से कई बड़े लक्ष्‍यों को वायुसेना ने साधा है। आइए जानते हैं कुछ व‍िशेषताएं। 

सी-17 ग्लोबमास्टर-3

अमेरिकी कंपनी बोइंग का सी-17 ग्लोबमास्टर-3 भारी सैन्य परिवहन विमान है। इसका इस्तेमाल सैनिकों, सैन्य वाहनों और बड़े आकार की सामग्री को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने के लिए किया जाता है। प्राकृतिक आपदाओं के दौरान राहत सामग्री और लोगों को पहुंचाने में भी यह उपयोगी है। इसका बड़ा मालवाहक कक्ष और आधुनिक सामान प्रबंधन प्रणाली इसकी प्रमुख विशेषताएं हैं।

सी-130जे-30 सुपर हरक्यूलिस
सी-130जे-30 अमेरिका की लाकहीड मार्टिन कंपनी का मध्यम श्रेणी का सैन्य परिवहन विमान है। भारत ने इसे विशेष सैन्य अभियानों और सैनिकों व सामग्री के परिवहन के लिए खरीदा था। यह विमान सभी मौसमों में संचालन और सैनिकों या सामान को हवाई मार्ग से पहुंचाने के लिए तैयार किया गया है। इसकी मदद से रात के समय भी विशेष परिवहन अभियान चलाए जा सकते हैं। यह वायुसेना के सामरिक परिवहन बेड़े का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

सी-295
सी-295 यूरोपीय विमान निर्माता एयरबस का सैन्य परिवहन विमान है। इसे पुराने एवरो परिवहन विमानों की जगह लेने के लिए चुना गया। इसका इस्तेमाल सैनिकों और सामग्री को पहुंचाने तथा दूरदराज के क्षेत्रों में परिवहन सहायता के लिए किया जाता है। इसकी बनावट ऐसे हवाई अड्डों पर संचालन के अनुकूल है जहां रनवे की सुविधाएं सीमित हों।

एएन-32
एएन-32 सोवियत संघ में विकसित सैन्य परिवहन विमान है। इसका इस्तेमाल सैनिकों, सामान और आवश्यक सामग्री को पहुंचाने के लिए किया जाता रहा है। भारतीय वायुसेना के परिवहन बेड़े में इसकी लंबे समय तक महत्वपूर्ण भूमिका रही है। यह विमान सैन्य रसद और दूरस्थ क्षेत्रों में आपूर्ति पहुंचाने जैसे कार्यों के लिए उपयोगी है।

डोर्नियर-228
डोर्नियर-228 हल्का बहुउद्देशीय विमान है, जिसका निर्माण भारत में हिंदुस्तान एयरोनाटिक्स लिमिटेड करती है। इसमें 19 यात्रियों के बैठने की व्यवस्था है। इसका इस्तेमाल सैनिकों और लोगों के परिवहन, समुद्री निगरानी, हवाई सर्वेक्षण, खोज एवं बचाव तथा संपर्क कार्यों में किया जा सकता है। छोटे और सीमित सुविधाओं वाले हवाई अड्डों पर इसकी उपयोगिता इसे बड़े परिवहन विमानों से अलग बनाती है। भारतीय सशस्त्र बलों के साथ तटरक्षक बल भी इस विमान का उपयोग करता है।

आईएल-78
आईएल-78 रूस में विकसित हवा में ईंधन भरने वाला टैंकर विमान है। भारतीय वायुसेना इसका इस्तेमाल लड़ाकू विमानों में उड़ान के दौरान ईंधन भरने के लिए करती है। इस व्यवस्था से विमान अपने अभियान के दौरान अधिक समय तक हवा में बने रह सकते हैं। सितंबर 2018 में भारतीय वायुसेना ने इसी श्रेणी के आईएल-78 टैंकर की मदद से तेजस विमान की हवा में ईंधन भरने की प्रक्रिया का परीक्षण किया था।

नेत्र (एईडब्ल्यूएंडसी)
नेत्र भारतीय हवाई निगरानी और नियंत्रण प्रणाली का नाम है। डीआरडीओ ने भारतीय वायुसेना और भारतीय उद्योगों के सहयोग से विकसित किया है। यह प्रणाली एम्ब्रेयर-145 विमान पर लगाई गई है। इसमें लगे सेंसर हवाई और समुद्री सतह पर मौजूद लक्ष्यों तथा अन्य गतिविधियों का पता लगाने में मदद करते हैं। इससे विमान में मौजूद नियंत्रण दल और जमीन पर स्थित केंद्रों तक संबंधित जानकारी पहुंचाई जा सकती है। नेत्र का मुख्य उद्देश्य हवाई निगरानी, स्थिति की जानकारी और अभियानों के समन्वय में सहायता करना है।

पी-8आई
पी-8आई अमेरिकी कंपनी बोइंग का समुद्री निगरानी विमान है, जिसे भारतीय नौसेना के लिए तैयार किया गया। इसका इस्तेमाल समुद्री क्षेत्र की निगरानी, पनडुब्बियों का पता लगाने, समुद्री सुरक्षा और खोज एवं बचाव जैसे अभियानों में किया जाता है। विमान में निगरानी के लिए विशेष सेंसर और संचार प्रणालियां हैं। यह नौसेना को समुद्र में दूर तक निगरानी रखने और संबंधित जानकारी कमान केंद्र तक पहुंचाने में मदद करता है।

एएलएच ध्रुव
ध्रुव भारत में विकसित उन्नत हल्का बहुउद्देशीय हेलीकाप्टर है। इसे हिंदुस्तान एयरोनाटिक्स लिमिटेड ने बनाया है। इसका विकास 1980 के दशक में शुरू हुआ और पहली उड़ान 20 अगस्त 1992 को हुई। ध्रुव का उपयोग सैनिकों और लोगों के परिवहन, रसद सहायता, खोज एवं बचाव, प्रशिक्षण तथा आपातकालीन सहायता में होता है। इसके अलग-अलग संस्करणों में अलग उपकरण और प्रणालियां हैं। भारतीय वायुसेना की सारंग प्रदर्शन टीम भी ध्रुव हेलीकाप्टरों का इस्तेमाल करती है।

रुद्र (एएलएच मार्क-4)
रुद्र, ध्रुव हेलीकाप्टर का सशस्त्र संस्करण है। इसे एचएएल ने भारतीय सेना और वायुसेना की जरूरतों के अनुरूप विकसित किया है। यह ध्रुव परिवार के मूल ढांचे पर आधारित है, लेकिन इसमें सैन्य अभियानों के लिए विशेष उपकरण और हथियार प्रणाली लगाई गई है। इसका उपयोग सशस्त्र निगरानी, सैन्य सहायता, सुरक्षा और अन्य अभियानों में किया जा सकता है। रुद्र में इलेक्ट्रानिक युद्ध से संबंधित प्रणालियां और लक्ष्य पहचानने वाले उपकरण भी शामिल हैं।

एमआई-17 वी5
एमआई-17 वी5 रूस में विकसित मध्यम श्रेणी का सैन्य परिवहन हेलीकाप्टर है। इसमें आधुनिक उड़ान उपकरण, नेविगेशन प्रणाली, मौसम रडार और ऑटोपायलट जैसी सुविधाएं हैं। इसका उपयोग सैनिकों और सामग्री के परिवहन, दुर्गम क्षेत्रों में आपूर्ति पहुंचाने तथा आपदा राहत कार्यों में किया जाता है। हेलीकाप्टर में जरूरत के अनुसार विशेष उपकरण लगाए जा सकते हैं। इसका उपयोग कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में भी परिवहन और सहायता संबंधी कार्यों के लिए किया जाता है।

चेतक
चेतक हेलीकाप्टर फ्रांस के अलुएट-3 डिजाइन पर आधारित है। भारत में इसका निर्माण हिंदुस्तान एयरोनाटिक्स लिमिटेड करती है। इसका इस्तेमाल संपर्क, प्रशिक्षण, लोगों और हल्की सामग्री के परिवहन, खोज एवं बचाव तथा आपातकालीन सहायता जैसे कार्यों में किया जाता है। इसका अपेक्षाकृत छोटा आकार इसे कई प्रकार के कार्यों के लिए उपयोगी बनाता है। इसकी क्रूज गति 185 किलोमीटर प्रति घंटा और रेंज 500 किलोमीटर है।

चिनूक
चिनूक अमेरिका में बोइंग द्वारा निर्मित भारी सामान ढोने वाला हेलीकाप्टर है। इसकी पहचान आगे और पीछे लगे दो बड़े रोटरों से होती है। इसका उपयोग भारी उपकरण, सैन्य सामग्री और सैनिकों को पहुंचाने के लिए किया जाता है। यह दूरदराज के क्षेत्रों में ऐसे सामान को पहुंचाने में सहायता करता है जहां सामान्य परिवहन व्यवस्था उपलब्ध न हो।

अपाचे
अपाचे अमेरिका में विकसित सैन्य हमला हेलीकाप्टर है, जिसका निर्माण बोइंग करती है। इसका डिजाइन सैन्य अभियानों में हवाई सहायता और सशस्त्र भूमिका के लिए तैयार किया गया है। इसमें दो लोगों के बैठने की व्यवस्था है। हेलीकाप्टर में उड़ान नियंत्रण, निगरानी और लक्ष्य पहचानने से जुड़ी आधुनिक प्रणालियां हैं। भारतीय वायुसेना के लिए अपाचे की खरीद सैन्य हेलीकाप्टर बेड़े के आधुनिकीकरण का हिस्सा रही है।

एलसीएच प्रचंड
प्रचंड भारत में विकसित हल्का लड़ाकू हेलीकाप्टर है। इसे हिंदुस्तान एयरोनाटिक्स लिमिटेड ने बनाया है। इसका विकास ऊंचाई वाले क्षेत्रों और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में सैन्य कार्यों को ध्यान में रखकर किया गया। इसमें दो इंजन हैं और इसे सैन्य सहायता, निगरानी तथा सशस्त्र अभियानों के लिए विकसित किया गया है। यह भारत में विकसित सैन्य हेलीकाप्टर तकनीक का उदाहरण है।

कामोव-31
कामोव-31 रूस में विकसित नौसैनिक हेलीकाप्टर है, जिसका इस्तेमाल भारतीय नौसेना करती है। इसे भारतीय नौसेना में 2003 में शामिल किया गया था। यह नौसैनिक जहाजों के साथ काम करने के लिए बनाया गया है। इसकी प्रमुख भूमिका हवाई निगरानी और नौसैनिक बेड़े को आसपास की हवाई गतिविधियों की जानकारी उपलब्ध कराना है। वाराणसी एयर शो में इसे ‘त्रिदेव’ फार्मेशन में भारतीय वायुसेना और थल सेना के एएलएच हेलीकाप्टरों के साथ शामिल किया गया था।