प्रसिद्ध आलोचक डॉ. नामवर सिंह की जन्मशती पर उदय प्रताप कॉलेज के हिंदी विभाग में आयोजन
उदय प्रताप कॉलेज, वाराणसी में डॉ. नामवर सिंह की जन्मशती पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें ...और पढ़ें

डा नामवर सिंह की जन्मशती पर आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी के दौरान संबोधित करते प्रो सूरज बहादुर थापा मंचासीन दाये से क्रमशः डॉ महेंद्र प्रसाद कुशवाहा, प्रो संजीव कुमार, प्रो रघुवंशमणि।
HighLights
डॉ. नामवर सिंह जन्मशती पर राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित।
उदय प्रताप कॉलेज, वाराणसी में साहित्यकारों का विमर्श।
नामवर सिंह की आलोचना, परंपरा और विचारों पर चर्चा।
जागरण संवाददाता, वाराणसी। प्रसिद्ध आलोचक डॉ. नामवर सिंह की जन्मशती पर उदय प्रताप कॉलेज के हिंदी विभाग की ओर से आयोजित हिंदी आलोचना का संवादी स्वर विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी के दूसरे दिन कई सत्रो में प्रसिद्ध साहित्यकारों ने अपने-अपने विचार रखे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कवि एवं आलोचक प्रो. श्रीप्रकाश शुक्ल ने कहा कि नामवर को नामवर ने नहीं, बल्कि उनकी परंपरा ने और परंपरा की समझ ने बनाया। नामवर जी को गहराई से समझने के लिए उनके परिवेश को टटोलना होगा। वे ज्ञानोन्मुखी परंपरा से जुड़ते हुए आलोचना के सर्वोच्च शिखर तक पहुंचे।
इस सत्र में बोलते हुए प्रो. अरविंद त्रिपाठी ने डॉ. नामवर सिंह की आलोचना और उनके संवादी स्वर पर चर्चा करते हुए कहा कि उनकी आलोचना का क्षेत्र किसी विशाल गंगा के पाट की तरह असीमित है। वही एक दिन दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ के अवसर पर अतिथियों द्वारा प्रख्यात आलोचक डॉक्टर नामवर सिंह जन्मशतवार्षिकी स्मारिका का विमोचन भी किया गया।
कई सत्रों में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी के प्रथम सत्र के मुख्य वक्ता प्रसिद्ध कवि मदन कश्यप ने कहा कि नामवर सिंह ने मार्क्सवादी आलोचना का जनवादी विस्तार किया। वे अपनी कविता को समय से जोड़कर परिभाषित करते हुए आलोचना करते थे।
उन्होंने वैचारिक बहुलता को बचाया बल्कि उसे साहित्य के माध्यम से समय और समाज को जोड़ा भी। कार्यक्रम के विशिष्ट वक्ता साहित्यकार डॉ राम सुधार सिंह ने कहा कि नामवर सिंह ने उदय प्रताप कॉलेज से शिक्षा ग्रहण किया तथा यहीं पर उन्होंने गलत का विरोध तथा गीत लिखना कहा जा सकता है कि डॉक्टर शंभू नाथ से सीखा।
उन्होंने कहा कि साहित्यकार नामवर हमेशा अपने आप को संशोधित करते रहे। कॉलेज के प्राचार्य प्रोफेसर धर्मेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि नामवर सिंह विचारों की एक जीवंत मिसाल थे, उन्होंने हिंदी आलोचना को एक नया आयाम प्रदान किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ कवि प्रोफेसर अष्टभुजा शुक्ला ने की ,संचालन प्रोफेसर गोरखनाथ ने किया।
इस अवसर पर प्रोफेसर तरुण कुमार, डॉक्टर गया सिंह, प्रोफेसर सदानंद शाही, प्रोफेसर राजकुमार ,प्रोफेसर एसके सिंह, प्रोफेसर सुधीर कुमार राय, प्रोफेसर नीलिमा सिंह समेत बड़ी संख्या में साहित्यकार व छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।
