वाराणसी, [मुकेश चंद्र श्रीवास्तव]। ईपीएफ से जुड़े मामलों की सुनवाई में बहुत देर होती थी। दफ्तरों का चक्कर लगाते-लगाते लोग थक जाते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। अब इस तरह के मामलों की सुनवाई ऑनलाइन होने की उम्मीद बढ़ गई है। इसके लिए ई-कोर्ट लगेगी। हरियाणा के करनाल में ई-प्रोसेसिंग की पायलट प्रोजेक्ट के रूप में टेस्टिंग चल रही है। अफसरों का कहना है कि रिजल्ट सार्थक है। श्रम मंत्रालय से हरी झंडी मिली तो कोरोना काल में जारी अनलॉक के दौरान हजारों पीडि़तों को फायदा मिल सकेगा।

सभी कंपनियों में ईपीएफ अनिवार्य

कभी कंपनी के प्रतिनिधियों के पास समय रहता है तो कभी कोर्ट में तारीख नहीं मिलने की समस्या होती है। यही कारण है कि देश में 2010 के बाद अभी तक 68 हजार से अधिक मामले पेंडिंग हो गए हैं। इसके साथ ही कर्मचारी भविष्य निधि संगठन से ईपीएफ निकासी, ईपीएफ खाते के ट्रांसफर, केवाईसी से जुड़े समेत हजारों मामले लंबित पड़े हैं, उनके निस्तारण को भी बल मिलेगा। सभी कंपनियों में ईपीएफ (इंप्लाई प्रोविडेंट फंड) अनिवार्य है। देश में चार करोड़ से अधिक ईपीएफ खाता धारक हैं। ई-कोर्ट शुरू हो जाने के बाद पीडि़त को घर बैठे ही न्याय की उम्मीद बढ़ जाएगी।

लॉकडाउन के कारण नहीं लग रही कोर्ट

कोरोना संकट के कारण ईपीएफओ कोर्ट नहीं लग रही है। इससे मामले और बढ़ते जा रहे हैं। वैसे ई-कोर्ट सॉफ्टवेयर तो दो साल पहले ही तैयार गया था, लेकिन प्रभावी नहीं हो पाया। अब लॉकडाउन में इसकी जरूरत पड़ रही है। इस पर तेज से कार्य चल रहा है।

ईपीएफओ के कोर्ट में दो तरह के मामले

7 ए: इस धारा के तहत उन कंपनियों पर मामले दर्ज किए जाते हैं जिसने कर्मचारियों का पीएफ जमा नहीं किया। मामला दर्ज होने के बाद इसकी हियरिंग होती है, जो एक अर्थ न्यायिक प्रक्रिया है। इसमें दोषी पाए जाने पर कंपनी पर कार्रवाई की जाती है।

14 बी एंड 7 क्यू : इस धारा में उन कंपनियों पर मामला दर्ज किया जाता है जो समय पर कर्मचारियों का पीएफ जमा नहीं करतीं। इस मामले में दोषी पाए जाने पर कंपनी का खाता भी सीज कर आगे की कार्रवाई करने का अधिकार ईपीएफओ के पास है।

ई-कोर्ट बहुत ही कारगर, सुनवाई के लिए किसी को कार्यालय में आने की जरूरत नहीं

क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त-1, वाराणसी उपेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि कोरोना के कारण सभी को शारीरिक दूरी का ख्याल रखना बहुत जरूरी है। ऐसे में ई-कोर्ट बहुत ही कारगर होगा। सुनवाई के लिए किसी को कार्यालय में आने की जरूरत नहीं पड़ेगी। कंपनी के वकील, विभाग के निरीक्षक व अन्य सभी अधिकारी वीडियो कांफ्रेंङ्क्षसग से ही सुनवाई करेंगे। करनाल में टेङ्क्षस्टग के बाद उम्मीद है जल्द ही इसे लागू किया जा सकता है।

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