वाराणसी, जेएनएन। ईपीएफओ द्वारा खाते सीज होने के बाद पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड डिस्काम भी ठेकेदारों के खिलाफ अब कड़ा रूख अपनाने जा रहा है। संबंधित सभी ठेकेदारों के खिलाफ नोटिस जारी कर ईपीएफ की राशि वसूली की जाएगी। हालांकि कुछ ऐसे में भी इसमें ठेकेदार हैं जो काम छोड़ चुके हैं।

वर्ष 2010 से 2014 तक सरकारी राशि की जमकर बंदरबाट की गई। आरोप है कि डिस्काम की ओर से राशि जारी तो हो रही थी, लेकिन ठेकेदार ही इसको गटक जाते थे। वैसे प्रमुख नियोक्ता होने के नाते डिस्काम की भी जिम्मेदारी थी कि इस पर निगरानी की जाएं। डिस्काम की ओर से इसको कड़ाई से नहीं लिया जाने की वजह से नीचे से लेकर ऊपर तक के अधिकारियों की मिलीभगत से ठेकेदार लूट-खसोट करते रहे। सूत्र बताते हैं कि इस गड़बड़झाले एवं लापरवाही में प्रशासन एवं वित्त विभाग के अधिकारियों शिथिलता सामने आई है। इसको लेकर निगम भी गंभीर हो गया है। ठेकेदारों पर नोटिस जारी करने के साथ ही संबंधित विभाग के अधिकारियों पर भी कार्रवाई हो सकती है।

अब बदल गई है स्थिति, पोर्टल के माध्यम से भुगतान 

कर्मचारियों के हितों को लेकर मौजूदा सरकार काफी सक्रिय है। इसके कारण ठेकेदारों की लूट-खसोट की दुकान अब बंद हो गई है। कर्मचारियों द्वारा ईपीएफ व ईएसआइ नहीं जमा करने के साथ ही ठेकेदारों पर वेतन कम देने का भी आरोप लगाया। ऐसे आरोप 2014 के पहले ही लगते रहे, लेकिन इस पर किसी ने ध्यान नहीं दिया। अब उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन ने एक पोर्टल बना दिया है। इसी पोर्टल के माध्यम से संविदा या दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों का वेतन देना है। ताकि कर्मचारियों को यह जानकारी रहे कि उनको अनुबंध के अनुसार कितना वेतन मिल रहा है, उनका ईपीएफ जमा हो रहा है या नहीं। इस व्यवस्था से पारदर्शिता भी बढ़ी है और ठेकेदारी की मनमानी भी रूकी है।

Posted By: Saurabh Chakravarty

अब खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस, डाउनलोड करें जागरण एप