विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

बीएचयू के व‍िज्ञानि‍यों के पास व‍िशेषज्ञता नहीं, बाबा दरबार में मंद‍िर श‍िखर के प्रभाव‍ित ह‍िस्‍से को दुरुस्‍त करने आईआईटी मद्रास से आएंगे इंजीन‍ियर

By Digital Desk Edited By: Abhishek sharma
Published: Wed, 14 Oct 2026 11:16 AM (IST)

बाबा काशी विश्वनाथ मंदिर के शिखर की मरम्मत अब आईआईटी मद्रास के इंजीनियर करेंगे। बीएचयू में विशेषज्ञता न होने के ...और पढ़ें

काशी विश्वनाथ मंदिर शिखर मरम्मत: आईआईटी मद्रास के विशेषज्ञ करेंगे दुरुस्त।

काशी विश्वनाथ मंदिर शिखर मरम्मत: आईआईटी मद्रास के विशेषज्ञ करेंगे दुरुस्त।

timer icon

समय कम है?

जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

संक्षेप में पढ़ें

जागरण संवाददाता, वाराणसी। बाबा काशी व‍िश्‍वनाथ मंद‍िर के श‍िखर का ह‍िस्‍सा बंदलों की उछलकूद में ग‍ि‍रने के बाद लंबे समय से मंद‍िर प्रशासन इसे दुरुस्‍त करने के ल‍िए इंजीन‍ियरों से संपर्क कर रहा था। इस बाबत बीएचयू में व‍िशेषता ना होने की वजह से आईआईटी मद्रास की ओर से इंजीन‍ियर इसी माह काशी आ रहे हैं। इस बाबत मंडलायुक्‍त ने बताया कि‍ काफी प्रयास के बाद भी श‍िखर का ह‍िस्‍सा व‍िशेषज्ञता के अभाव में दुरुस्‍त नहीं हो पा रहा था उसे मद्रास से आने वाले इंजीन‍ियर दुरुस्‍त करने आ रहे हैं। 

इस बाबत तकनीकी दक्षता के अभाव में काम लंबे समय से नहीं हो पा रहा था, जबक‍ि प्रयासों के बाद भी मंद‍िर प्रशासन इसे ठीक नहीं करवा पा रहा था। मंद‍िर प्रशासन ही अपने खर्च से इसे दुरुस्‍त करवा रहा है। जल्‍द ही मद्रास से आने वाले व‍िशेषज्ञ इसे ठीक करेंगे और श‍िखर को दुरुस्‍त कराया जाएगा। वहीं श‍िखर के ह‍िस्‍सों को लेकर श‍िकायत की भी बात सामने आई है। इस बाबत मंडलायुक्‍त एस. राजलिंगम ने स्‍पष्‍ट क‍िया क‍ि मंद‍िर के श‍िखर के प्रभाव‍ित ह‍िस्‍से सुरक्ष‍ित रखे गए हैंं। इसे व‍िशेषज्ञ लोग दुरुस्‍त करेंगे। 

श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर का गर्भगृह समेत बाहरी हिस्से को सोने से आच्छादित किया गया है। मंदिर के दक्षिणी द्वार के ठीक ऊपर एक छोटा टुकड़ा (पत्तर) टूट कर गिर गया था। इसको पुन: लगाने के संबंध में मद्रास आइआइटी स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग टीम को जिम्मेदारी दी गई है। टीम 26 अक्टूबर को आएगी और जांच करेगी।

कमिश्नर एस. राजलिंगम ने बताया कि सोने के स्तर के नीचे मंदिर का प्राचीन पत्थर का स्ट्रक्चर है। उसी के ऊपर सोने की परत चढ़ाई गई है। उसमें से एक टुकड़ा दो माह पूर्व गिर गया था। उसे मंदिर प्रशासन ने सुरक्षित रख दिया है। संभवत: समय और बारिश आदि के कारण क्षरण हो रहा होगा। इसकी जांच केवल तकनीकी विशेषज्ञ ही कर सकते हैं। इसे देखते हुए पहले बीएचयू आइआइटी से संपर्क किया गया।

बाद में मद्रास आइआइटी की स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग विभाग को जिम्मेदारी दी गई है। इसके लिए 18 लाख रुपये का भुगतान भी कर दिया गया है। इधर, नवरात्र, एयर शो आदि की व्यस्तता और भीड़ को देखते हुए टीम को 26 अक्टूबर को आने के लिए कहा गया है। टीम एक टुकड़ा टूटने के कारणों, उसकाे पुन: लगाने आदि के विषय में जांच करेगी। उनके निर्देशों के अनुसार ही आगे निर्णय लिया जाएगा।