वाराणसी, जागरण संवाददाता। जीएसटी में मर्ज होने वाले करीब आठ सौ से ज्यादा व्यापारियों ने वैट का बकाया टैक्स अब तक जमा नहीं किया है। बावजूद इसके जीएसटी रिफंड के लिए दावा कर दिया है। वाणिज्य कर विभाग ने पोर्टल पर उपलब्ध आरसी मॉड्यूल और जीएसटी रिफंड सूची से जब इसका मिलान किया तब इसका पता चला है। विभाग का मानना है कि यह जीएसटी अधिनियम का उल्लंघन है।

अब वाणिज्य कर विभाग ने तय किया है कि जीएसटी रिफंड दावे के निस्तारण से पहले ऐसे व्यापारियों से वैट का बकाया टैक्स वसूला जाएगा। इसके साथ ही ऐसे व्यापारियों के बैंक खाते को भी संबद्ध करने की तैयारी हो रही है। वाणिज्य कर मुख्यालय ने इसके लिए सभी जोन के एडिशनल और ज्वाइंट कमिश्नर के साथ ही कर निर्धारण और कर वसूली अधिकारी को निर्देश दिया है। इसके तहत जीएसटी रिफंड का दावा करने वाले व्यापारियों को क्लेम देने से पहले आरसी मॉड्यूल से बकाया का जरूर मिलान करें। उसके बाद बैंक खाते को संबद्ध करने की कार्रवाई करें। जिन मामलों में बैंक खाता संबद्ध करने की आवश्यकता नहीं है उसके लिए ज्वाइंट कमिश्नर कार्यालय में एक रजिस्टर बनाया जाएगा। जिसमें ऐसे व्यापारियों का पूरा विवरण दर्ज किया जाएगा। वाराणसी में जीएसटी को लेकर कई विवाद शुरूआत काल से ही चला आ रहा है। कभी व्‍यापारियों ने नियम का पालन नहीं किया तो कभी विभाग की ओर से लापरवाही की गई। इससे दोनों को ही व्‍यवहारिक पक्षों में नुकसान उठाना हुआ।

ज्वाइंट कमिश्नर को दी गई है जिम्मेदारी

बकाए वैट और जीएसटी रिफंड के मामलों की निगरानी करने की जिम्मेदारी ज्वाइंट कमिश्नर को दी गई है। सभी अधिकारी अपने-अपने खंड का जिम्मा संभालेंगे। उनको यह भी ध्यान रखना होगा कि जीएसटी रिफंड निस्तारण में देरी न हो। मुख्यालय से मिले निर्देश के अनुरूप ऐसे व्यापारियों पर कार्रवाई की जाएगी।

- मिथिलेश कुमार शुक्ला, अपर आयुक्त वाणिज्य कर ग्रेड 2।

Edited By: Saurabh Chakravarty