वाराणसी, जेएनएन। लॉकडाउन के चलते इस बार ईसाई बंधुओं ने घरों की दहलीज के भीतर ही रहकर ईस्टर की खुशियां मनाई। लाइव स्ट्रीमिंग के जरिए जहां लोग आराधना में शामिल हुए, वहीं प्रभु यीशु के दोबारा जी उठने की खुशी में अलसुबह निकलने वाला कैंडिल जुलूस स्थगित रहा। इसके बदले लोगों ने अपने-अपने घरों की छत पर कैंडिल जलाकर रवायत जारी रखी।

प्रभु यीशु के पुनरुत्थान दिवस पर मसीही लोगों ने घरों की आकर्षक सजावट कर रखी थी। सुबह प्रभु के जी उठने के समय निकलने वाले जुलूस के बजाय लोगों ने घर की छत, छज्जों व बरामदों में कैंडल जलाई। इसके बाद घर में ही बने ईस्टर बन व ईस्टर एग को खाकर परिवारीजनों संग पर्व की खुशियां साझा की। फोन पर एक-दूसरे को ईस्टर की मुबारकबाद देने का सिलसिला दिनभर चलता रहा। कोरोना वायरस के संक्रमण को देखते हुए सरकार और जिला प्रशासन के आदेश के साथ ही धर्मगुरुओं ने भी त्योहारों को घरों में ही मनाने की अपील की थी। इसके मद्देनजर गुड फ्राइडे की तरह ही ईस्टर भी लोगों ने घरों में रहकर ही मनाया। सभी चर्चों के पादरी और भी उनसे जुड़े कलीसिया ऑनलाइन माध्यम से एक-दूसरे से जुड़े थे। बाइबल पाठ सहित प्रभु यीशु के दोबारा जी उठने की गाथा को फादर और पादरियो ने यूट्यूब और फेसबुक के जरिए ही मसीही लोगों को सुनाया।

सेंट मेरिज महागिरजाघर में बिशप डा. यूजीन जोसेफ आराधना कराते हुए कहा कि इस समय इंसानियत पर बड़ा खतरा है। घरों में रहते हुए प्रशासन का पूरा सहयोग करें और इस महामारी से निजात के लिए ईश्वर से प्रार्थना करते रहें। उधर, लाल गिरजा में पास्टर संजय दान, सेंट थॉमस चर्च-गोदौलिया में पादरी न्यूटन स्टीफन, सेंट पॉल्स चर्च-सिगरा में पादरी सैम जोशुआ सिंह, बेथेल फुल गॉस्पल चर्च-महमूरगंज में पादरी अरविंद थॉमस ने पूजा-विधि संपन्न कराई।

 

Posted By: Saurabh Chakravarty

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