वाराणसी [राकेश श्रीवास्तव]। बलिया से बनारस की दूरी कभी 80 तो कभी 189 किलोमीटर ...। आप सोच रहे होंगे ऐसा कैसे हो सकता है? कोई शहर चलायमान तो होता नहीं लेकिन ई-वे बिल की प्रक्रिया में हो रहे इस कमाल का खामियाजा व्यापारियों व उद्यमियों को भुगतना पड़ता है। इसकी वजह है दो स्थानों की दूरी में अंतर होना। वाणिज्य कर विभाग की कंप्यूटरीकृत प्रणाली में गूगल के माध्यम से दो स्थानों की दूरी कुछ तो वास्तव में कुछ और होती है। ऐसे में विभागीय अधिकारी ई-वे बिल को आधार मानकर जुर्माना व सीज की कार्रवाई कर देते हैं।

कंप्यूटर का शार्टकट, कारोबारियों के लिए संकट

कारोबारी ई-वे बिल खुद से जेनरेट करते हैं। माल भेजने एवं गंतव्य के शहर का पिनकोड अंकित करते ही दोनों शहरों के बीच की दूरी कंप्यूटर स्क्रीन पर दिखने लगती है। नियम मुताबिक सौ किमी दूर माल आपूर्ति को एक दिन तो उससे ऊपर की दूरी के लिए उसी अनुपात में रास्ते की अवधि बढ़ जाती है। कंप्यूटर ने बलिया से बनारस की दूरी 130 के बजाय 80 किमी दर्शाया तो चेकिंग में माल सीज हो जाएगा। हालांकि नियम मुताबिक 130 किमी दूर माल पहुंचाने के लिए कारोबारी को दो दिन मिलना चाहिए।

ऐसे समझिए हकीकत  

रामनगर औद्योगिक क्षेत्र से कोई उत्पाद जौनपुर भेजा गया। ई-बिल के लिए बनारस व जौनपुर का पिन कोड भरा गया तो कंप्यूटर ने राजघाट वाया वाराणसी दूरी सर्च किया जबकि रूट रामनगर वाया मोहनसराय जौनपुर है। वहीं, रास्ते में गाड़ी फंसी तो कारोबारी पर कार्रवाई तय है।

ई-वे बिल क्या है 

एक देश एक टैक्स (जीएसटी) में 50 हजार से ज्यादा का माल भेजने वाले कारोबारी को ई-वे बिल ऑनलाइन जेनरेट करना होता है। जीएसटी के नियम 138 में ई-वे बिल से संबंधित व 129 में जांच और कार्रवाई का प्रावधान है। 

बोले कारोबारी : जीएसटी की प्रक्रिया में पोर्टल की गड़बड़ी का खामियाजा कारोबारी झेल रहे हैं। जिम्मेदारों को तकनीकी खामियां दूर करने के लिए कदम उठाने चाहिए।  

- आरके चौधरी, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, आइआइए 

बोले अधिकारी : यह पोर्टल की गड़बड़ी है। किसी ने शिकायत की तो जरूरी कदम उठाए जाएंगे। 

- एसपी वर्मा, एडीशनल कमिश्नर, वाणिज्य कर।        

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Posted By: Abhishek Sharma

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