मोदी सरकार - 2.0 के 100 दिन

वाराणसी [राकेश पाण्डेय]। उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य दावा करते हैं कि प्रदेश में इससे पहले समाजवादी पार्टी के साथ बहुजन समाज पार्टी की सरकारों ने जो काम अपने पांच- पांच वर्ष के कार्यकाल में नहीं किए उससे अधिक विकास मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली भाजपा की सरकार ने एक साल में कर दिखाए हैं। इन कामों को गिनाने के लिए उनके पास लंबी फेहरिश्त है।

केशव प्रसाद मौर्य कल वाराणसी में थे और उन्होंने कहा कि केंद्र की नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार की कार्यप्रणाली के केंद्र में गरीब, किसान, महिलाएं और बेरोजगार हैं। इससे पहले की सरकारें आत्ममुग्धता में इन्हें हाशिए पर रखकर चल रही थीं। विपक्षी पार्टियों सपा, बसपा और कांग्रेस के पास अब मुद्दे नहीं रह गए हैं तो वे बेवजह के मामलों को तूल देकर जनता के बीच पैठ बनाने की नाकाम कोशिश कर रहे हैं।

उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने सर्किट हाउस में दैनिक जागरण से बातचीत की।

फूलपुर और गोरखपुर उपचुनाव में हार मिली, कैराना का उपचुनाव होने वाला है, यहां झटका खाने से बचने के लिए क्या रणनीति है?

-निश्चिंत रहिए कैराना और नूरपुर के उपचुनाव में भाजपा ही जीतेगी। रणनीति क्या होगी वो तो सार्वजनिक नहीं कर सकते लेकिन यह तय है कि विपक्ष की दाल नहीं गलेगी, उन्हें मुंह की खानी पड़ेगी। फूलपुर और गोरखपुर उपचुनाव का नतीजा हमारे लिए अप्रत्याशित जरूर रहा लेकिन अब सपा, बसपा और कांग्रेस की तिकड़ी भी इसे दोहरा नहीं पाएगी। समाजवादी पार्टी (सपा) और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के बीच कोई भी समझौता भाजपा को 2019 में लोकसभा चुनाव जीतने से नहीं रोक सकता। अगले साल होने वाले आम चुनाव से पहले कांग्रेस, सपा और बसपा सहित सभी विपक्षी पार्टियां एकजुट हो रही हैं। यह सभी दल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बढ़ती लोकप्रियता से डरे हैं। भाजपा सभी के विकास में विश्वास करती है जबकि सपा-बसपा महज कुछ लोगों के विकास में विश्वास करती हैं। पिता (मुलायम सिंह यादव) और पुत्र (अखिलेश यादव) के लंबे समय से लंबित विकास कार्य अब भाजपा सरकार में पूरे हो रहे हैं।

फूलपुर में आपने ऐसी क्या कमी छोड़ दी कि हार का सामना करना पड़ा?

-कहीं से कोई कमी नहीं छोड़ी थी बल्कि हमेशा जनता के बीच रहे और खूब काम किया। चुनाव के ठीक पहले सपा-बसपा के एक साथ आने से सपा प्रत्याशी के पक्ष में बसपा के वोट बैंक का चले जाना जरूर चकित कर गया, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। जातिवाद पर विकासवाद भारी पड़ेगा।

सूबे में सड़कों की हालत में सुधार को लेकर क्या कर रहा है आपका विभाग?

-सड़कों के निर्माण में हम नई तकनीक का इस्तेमाल करने जा रहे हैं जिससे लागत 25 से 30 फीसद तक कम होगी। पुरानी सड़कों के मैटेरियल भी इस्तेमाल किए जा सकेंगे। आने वाले दिनों में कूड़े से भी सड़क बनेगी। पूर्व की सरकारों में जहां सड़कें आठ वर्ष तक ही बामुश्किल चलने योग्य बनाई जाती थीं अब बन रही सड़कें कम से कम 25 वर्ष चलेंगी। हमारी सरकार में हर दो दिन में एक ब्रिज और चौबीस घंटे में 35 किमी सड़क बनाई जा रही है जिसमें मरम्मत भी शामिल है। इससे पूर्व की सरकार में सड़क बनाने का आंकड़ा दस किमी तक ही था।

पूर्वांचल एक्सप्रेस वे कब तक पूरा होगा?

-देखिए, सपा सरकार ने वोट बैंक की राजनीति में कई ऐसी योजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण कर दिया जिसकी तैयारी पूरी नहीं थी। पूर्वांचल एक्सप्रेस वे के लिए करीब 90 फीसद तक जमीन अधिग्रहण की जा चुकी है। तय मियाद से पूर्व ही इसे तैयार कर लिया जाएगा। भाजपा सरकार विकास कार्यों को समय पूर्व पूरा करने के लिए जानी ही जाती है। पीएम नरेंद्र मोदी और सीएम योगी आदित्यनाथ कड़े और बड़े फैसले लेते हैं जो देश और प्रदेश हित में हो न कि वोट बैंक साधने के लिए।

लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे पर चला तो अफसोस हुआ

-अभी कुछ दिनों पहले मैं लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस वे से होकर गुजरा। यह देखकर अफसोस हुआ कि जल्दीबाजी के चक्कर में सपा सरकार ने सर्विस रोड ऐसी बनाई जिससे गांव जुड़े ही नहीं हैं। इससे गरीब और किसानों को ऐसे हाइवे का फायदा ही नहीं मिल रहा। समाजवादी पार्टी सरकार ने विरासत में एक लाख 21 हजार किमी की जर्जर सड़कें हमें दी थीं जिसे तेजी से दुरुस्त किया जा रहा है। हम ऐसी व्यवस्था करने जा रहे हैं कि जो भी नेशनल या स्टेट हाइवे हो या मुख्य मार्ग उसके पांच किमी के दायरे के गांवों को सड़क से जोड़ा जाएगा। इसके लिए 1800 करोड़ बजट की व्यवस्था की गई है।

तैयार हो रही सड़कों की डायरेक्टरी

-डिप्टी सीएम का कहना है कि आने वाले समय में जनता को यह भ्रम नहीं रहेगा कि कौन सी सड़क किस विभाग की है और उसकी दुर्दशा के लिए कौन जिम्मेदार है। लोक निर्माण विभाग सभी सड़कों की डायरेक्टरी तैयार कर रहा है।

Posted By: Dharmendra Pandey

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