वाराणसी : भगवान भाष्कर की तरेरती आंखों तथा भगवान इन्द्र के कोप से किसानों के माथे पर एक बार फिर से पसीना आने लगा है। बीते वर्ष सोनभद्र और आसपास कई इलाकों में फसलें सूखे की वजह से चौपट हो चुकी हैं। लिहाजा मानसून आने के बाद से ही लगभग एक सप्ताह से पूर्वाचल के अन्नदाता अच्छी बरसात की आस लगाएं बैठे हुए हैं लेकिन पूर्वाचल में खासकर सोनांचल के क्षेत्र के किसानों को अभी तक निराशा ही हाथ लगी हैं।

क्षेत्र के किसानों को अभी तक अच्छी बरसात नसीब नहीं होने के कारण उनके माथे पर चिंता की साफ लकीरें झलक दिख रही हैं कुछ किसान बैंक से व पास पड़ोस रिश्तेदारो से उधार लेकर अपने खेतों में बीज डालकर चिंतित हैं तो कुछ किसान बीज डालने को लेकर परेशान दिख रहे हैं जिन किसानों के पास सिंचाई के साधन हैं वे तो किसी तरह अपने खेतों में लगी फसल को बचाने में जुटे हुए हैं लेकिन जिनके पास साधन नहीं उनकी खेतों में लगी फसल मरने की कगार पर जिससे क्षेत्र के अन्नदाता काफी चिंतित हैं।

विगत दो-तीन वर्षो से लगातार किसान समय से बारिश न होने से सूखे की मार झेल रहा है जिससे क्षेत्र के अन्नदाताओं को काफी परेशानियों से जूझना पड़ रहा है। वहीं सोनांचल क्षेत्र में लंबे अर्से से सिचाई के लिए सोन लिफ्ट व पाण्डु लिफ्ट की माग समय समय पर उठती रहती है वावजूद शासन स्तर से अभी तक इस पर पहल नही किया गया यही नही जब दुद्धी व कनहर परियोजना की बात किसानों के कानों तक पड़ी तो किसानों के खुशी का ठिकाना नही रहा लेकिन जब क्षेत्र के सभी जगहों पर नहर नहीं पहुचने की बात पता चली तो पडरक्ष, हर्रा, चाचीकला, नकतवार, मझिगवा आदि दर्जनों गाव में नहर के लिए कोई योजना नही बनने से किसान अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों को अवगत करा चुके है वावजूद अभी तक उक्त गाव के लिए पहल नही किया गया जिससे किसान मायूस हैं। दूसरी ओर नहरों के भरोसे बैठा किसान अभी भी सूखे मानसून के बीच पानी की आस में धान का सीजन बिता रहा है।

Posted By: Jagran