वाराणसी, जेएनएन। पीएम माेदी के हाथों गुरुवार को नए संसद भवन की आधारशिला रखते ही देश के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया। इस मौके पर ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना का सौहार्द्रपूर्ण संदेश देने के लिए ‘सर्वधर्म प्रार्थना’ का आयोजन किया गया, जिसमें जैनधर्म का प्रतिनिधित्व काशी की डा. इंदु जैन ने किया। उन्होंने भारत की प्राचीनतम भाषा प्राकृत एवं संस्कृत में गाथा, मंगलाष्टक एवं महावीराष्टक की स्वरमयी प्रस्तुति करके न केवल सस्वर मंगल पाठ किया बल्कि जैन धर्म के साथ-साथ भारत की प्राचीनतम भाषा एवं संस्कृति का भी प्रतिनिधित्व किया। 

डा. इंदूू राष्ट्रीय दिवसों पर आयोजित सर्वधर्म प्रार्थना में विगत एक दशक से जैन धर्म का प्रतिनिधित्व करती आ रही हैं। डा. इंदु जैन संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के पूर्व जैनदर्शन विभागाध्यक्ष एवं राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित प्रो. फूलचंद जैन प्रेमी एवं आदर्श महिला सम्मान से सम्मानित डा. मुन्नीपुष्पा जैन की सुपुत्री व समाजसेवी राकेश जैन की जीवनसंगिनी हैं।

डा. इंदु ने जागरण संवाददाता से बात करते हुए कहा कि इस ऐतिहासिक दृश्य की साक्षी बनकर वो बहुत अभिभूत महसूस कर रही हैं। लोकतंत्र का यह मंदिर निश्चित ही देशवासियों में नई चेतना और आत्मविश्वास का संचार करेगा। साथ ही दुनिया के तमाम देश भी हम से प्रेरणा लेंगे। माना जा रहा है कि अक्टूबर 2022 तक नए संसद भवन का निर्माण कार्य पूरा करने की तैयारी है, ताकि देश की आजादी की 75 वीं वर्षगांठ पर इसी भवन में सत्र का आयोजन हो सके। नए संसद भवन में लोक सभा का आकार वर्तमान से तीन गुना ज्यादा बड़ा होगा। वहीं राज्य सभा का भी आकार बढेगा।

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