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खबर पढ़कर चौंक‍िए मत; पढ़े-लिखों के एमएलसी चुनाव में आधी आबादी की भागीदारी आंकड़ों में महज 31 प्रतिशत

By Ashok Singh Edited By: Abhishek sharma
Published: Mon, 12 Oct 2026 06:29 PM (IST)

वाराणसी खंड स्नातक एमएलसी चुनाव में शिक्षित महिला मतदाताओं की भागीदारी केवल 31% रही, जो चिंताजनक है। उच्च शिक्षा प्राप्त ...और पढ़ें

एमएलसी स्नातक चुनाव: शिक्षित महिलाओं की भागीदारी सिर्फ 31%, क्यों?

एमएलसी स्नातक चुनाव: शिक्षित महिलाओं की भागीदारी सिर्फ 31%, क्यों?

HighLights

  1. स्नातक एमएलसी चुनाव में महिला भागीदारी मात्र 31%।

  2. सोनभद्र में सर्वाधिक, भदोही में सबसे कम महिला मतदाता।

  3. मतदान केंद्र दूरी, पारिवारिक कारण कम भागीदारी के।

अशोक सिंह, जागरण, वाराणसी। शिक्षित और जागरूक वर्ग का प्रतिनिधित्व करने वाले विधान परिषद के वाराणसी खंड स्नातक चुनाव में महिला मतदाताओं की भागीदारी मात्र 31 प्रतिशत है। उच्च शिक्षा प्राप्त महिलाओं की लोकतंत्र के इस महत्वपूर्ण पर्व से यह दूरी गंभीर सवाल खड़ी करती है कि आखिर पढ़ी-लिखी महिलाएं इस चुनावी प्रक्रिया से पीछे क्यों छूट रहा है। यह स्थिति तब है जब महिलाओं की साक्षरता दर लगातार बढ़ रही है।

एमएलसी स्नातक चुनाव में केवल स्नातक उत्तीर्ण मतदाता ही पंजीकृत होते हैं। वाराणसी खंड के अंतर्गत आने वाले आठ जिलों में वाराणसी व मीरजापुर मंडल के जिलों के साथ बलिया शामिल है। इन जिलों की महिलाओं की साक्षरता दर के सापेक्ष देखा जाए तो एमएलसी चुनाव में भागीदारी काफी कम है।

इससे भी बड़ी बात यह है कि आठ जिलों में जंगलों और पहाड़ों के दुर्गम क्षेत्र में बसे सोनभद्र में सर्वाधिक 37.2 प्रतिशत महिलाएं मतदाता हैं। कालीन के कारोबार से समृद्ध भदोही में सबसे कम 27.2 प्रतिशत महिलाओं की हिस्सेदारी है। वाराणसी में जहां पांच विश्वविद्यालय, दर्जन भर से अधिक मेडिकल, इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट कालेज हैं, वहां के स्नातक मतदाताओं की भागीदारी भी मात्र 37.1 प्रतिशत है।

महिलाओं की भागीदारी में वाराणसी आठ जिलों में दूसरे नंबर पर है। आनलाइन मतदाता बनने की सुविधा मिलने के बावजूद आठ जिलों में मात्र 2.88 लाख स्नातक जुड़े।

इस संबंध में एक एमएलसी उम्मीदवार के मतदाता बनाने की जिम्मेदारी संभालने वाले डा. पंकज सिंह का कहना है कि वह निजी संबंधों के आधार पर और पुरुषों से ही संपर्क करते हैं। आम स्नातक अपने से नहीं जुड़ता है। हमने तो देखा कि ग्रामीण क्षेत्र में महिलाएं बहुतायत स्नातक हैं। पुरुष घर की महिलाओं को मतदान केंद्र दूर-दूर होने के कारण नहीं जोड़ते हैं। कुछ मामले में घरेलू महिलाएं स्नातक प्रमाणपत्र समय पर नहीं दे पाती हैं।