वाराणसी, मुकेश चंद्र श्रीवास्तव : चिकित्सा जगत ने बदलते परिवेश के साथ-साथ प्रगति के नित नए सोपान चढ़े और यह क्रम जारी है, किंतु आज लकदक करती इमारत के नींव के पत्थरों की जीवटता और उनका महत योगदान भी स्मरणीय है। ऐसे ही दूर द्रष्टा चिकित्सक थे प्रो. केएन उडुप्पा। वह बीएचयू में तत्कालीन मेडिकल कालेज के पहले शोधार्थी रहे। यहीं पढ़े-लिखे और बीएचयू को चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में असीम ऊंचाई पर ले जाने की ठानी। जो सोचा उसे कर भी दिखाया।

देश में पहली बार 1958 में प्रो. उडुप्पा कमेटी बनी, जिसने "आयुर्वेद ट्रीटमेंट आन माडर्न डायग्नोसिस कांसेप्ट' को संस्तुति दी थी। ताकि मेडिकल के छात्रों को एलोपैथ व आयुर्वेद दोनों का समुचित ज्ञान हो और वे संपूर्ण डाक्टर बनें। यह महामना पं. मदन मोहन मालवीय की सोच थी, जिसे प्रो. उडुप्पा ने आगे बढ़ाया।

प्रो. केएन उडुप्पा ने चिकित्सा विज्ञान संस्थान (आइएमएस), बीएचयू में करीब 60 साल पहले ही आयुर्वेद-एलोपैथ की संयुक्त पढ़ाई शुरू कराई थी। उन्होंने आयुर्वेद के साथ ही एलोपैथ को भी एक नई दिशा दी। बीएचयू में वे आयुर्वेद के डाक्टर थे, लेकिन विभिन्न संस्थानों में मार्डन मेडिसिन की पढ़ाई व प्रैक्टिस भी की। प्रो. उडुप्पा के उसी यत्न को फिर याद किया गया और पिछले साल केंद्र सरकार की ओर से देश के विभिन्न मेडिकल कालेजों में छात्रों को आयुर्वेद और एलोपैथ की समान जानकारी देने की पहल की गई। इसी के तहत बीएचयू में होलिस्टक मेडिसिन पीजी डिप्लोमा कोर्स का प्रारूप तैयार किया गया। हालांकि यह अभी लागू नहीं हो सका है। प्रो. उड़ुप्पा के समय में बीएचयू में न्यूक्लियर मेडिसिन के क्षेत्र में भी बेहतर कार्य हुए।

यह है होलिस्टक मेडिसिन पीजी डिप्लोमा

होलिस्टक मेडिसिन पीजी डिप्लोमा कोर्स में यह निर्धारित किया गया है कि एमबीबीएस उत्तीर्ण विद्यार्थी आयुर्वेद और बीएएमएस पास करने वाले छात्र-छात्राएं एलोपैथ की पढ़ाई भी कर सकें। उद्देश्य यही कि मेडिकल के छात्रों को माडर्न मेडिसिन (आधुनिक चिकित्सा पद्धति) व आयुर्वेद (परंपरागत भारतीय चिकित्सा पद्धति) दोनों का ज्ञान रहे और वे संपूर्ण डाक्टर बन सकें।

मेडिकल कालेज के प्रिंसिपल भी रहे प्रो. उडुप्पा

पद्मश्री प्रो. रामहर्ष सिंह के अनुसार बीएचयू में पहले आयुर्वेद कालेज हुआ करता था, जो बाद में मेडिकल कालेज बना। प्रो. केएन उड़ुप्पा सन् 1960 से 1971 तक यहां प्रिंसिपल रहे। उन्होंने ही इस कालेज को 1971 में चिकित्सा विज्ञान संस्थान बनाया। 1971 से 1980 तक वह इसके संस्थापक निदेशक रहे। कई स्पेशियलिटी विभाग भी उन्होंने बनाए। बीएचयू स्थित सेंटर आफ एक्सपेरीमेंटल मेडिसिन एंड सर्जरी (सीईएमएस) के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रशासनिक प्रभारी डा. संतोष कुमार सिंह बताते हैं कि प्रो. उडुप्पा ने 1960 में सर्जिकल रिसर्च लैब की स्थापना की थी। इसे गेटवे आफ आइएमएस भी कहा जाता था। यूजीसी ने इसे 1981 में इसे सेंटर आफ एक्सपेरीमेंटल मेडिसिन एंड सर्जरी नाम से अपग्रेड किया गया।

Edited By: Saurabh Chakravarty