पूर्व आइएएस दिव्या मित्तल का चुनाव लड़ना अब तय है, मीरजापुर के उस स्कूल की भी कहानी भी जान लें जो चर्चा में है
पूर्व आईएएस दिव्या मित्तल का चुनाव लड़ना तय माना जा रहा है, जिसकी शुरुआत मीरजापुर से विधायकी से होने की ...और पढ़ें
HighLights
पूर्व आईएएस दिव्या मित्तल का चुनाव लड़ना अब तय।
मीरजापुर के लहुरियादह गांव में अधूरा स्कूल निर्माण।
स्थानीय लोग दिव्या मित्तल से विकास की उम्मीदें।
राकेश मिश्र, जागरण, ड्रमंडगंज (मीरजापुर)। पूर्व आइएएस दिव्या मित्तल का चुनाव लड़ना अब तय माना जा रहा है, जिला मीरजापुर भी लगभग तय है और शुरुआत विधायकी से ही होने की चर्चा है। उनके इस्तीफे के बाद से उनके चुनाव लड़ने की चर्चा तेज हो गई थी, लेकिन उन्होंने एक वीडियो जारी कर इस चर्चा को विराम दे दिया है। यह स्पष्ट है कि वे चुनाव अब लड़ेंगी ही लड़ेंगी।
उन्होंने एक दिन पूर्व बतौर जिलाधिकारी उस स्कूल की वीडियो जारी कर चर्चा की, जहां महिलाओं ने लड़कियों के लिए उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए स्कूल को अपग्रेड करने की मांग एक गरीब महिला ने की थी। बताया कि वह स्कूल जस का तस है और विकास के धरातल से यह कोसों दूर नजर आ रहा है। उनके दावों की दैनिक जागरण पड़ताल की तो उस स्कूल और गांव की स्थिति का धरातल जस का तस नजर आया।

मंडल मुख्यालय का तमगा पाए हुए मीरजापुर जिले के मुख्य शहर से कुछ कोस दूर सड़क से होते हुए बदहाल राहों को तय कर आप लहुरियादह पहुंचेंगे जहां के निवासियों को आज भी इस बात का मलाल है कि पूर्व जिलाधिकारी दिव्या मित्तल वर्ष 2023 में कुछ दिनों तक जनपद में डीएम पद पर रहती तो लहुरियादह के विकास की तस्वीर कुछ और होती।
लहुरियादह गांव में शासन से उच्च प्राथमिक विद्यालय स्वीकृत होने के बावजूद भवन का निर्माण न हो पाना जिम्मेदारों की घोर उदासीनता को दर्शाता है। वर्ष 2023 में तत्कालीन जिलाधिकारी दिव्या मित्तल के निरीक्षण के दौरान लहुरियादह गांव की गरीब महिला देवकली ने गांव की अन्य महिलाओं के साथ मिलकर बालिकाओं की शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए दिव्या मित्तल से गांव में उच्च प्राथमिक विद्यालय खोले जाने की मांग की थी।

बताया था कि प्राथमिक स्कूल के बाद बच्चियां दूरी की वजह से आगे पढ़ने में असहाय हैं। इसके साथ ही गांव में पंचायत भवन और अस्पताल भी खोले जाने की मांग देवकली ने की गई थी। तत्कालीन जिलाधिकारी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए उच्च प्राथमिक विद्यालय खोले जाने का आश्वासन दिया था।
हालांकि, तीन वर्ष बीत जाने के बाद भी उच्च प्राथमिक विद्यालय का निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका। इसके चलते गांव के बच्चों को पांचवीं कक्षा के बाद पढ़ाई के लिए दूसरे गांव के विद्यालयों में जाना पड़ता है। लहुरियादह निवासी देवकली ने पूर्व जिलाधिकारी दिव्या मित्तल के दौरे का स्मरण करते हुए दैनिक जागरण को बताया कि दिव्या मित्तल के आश्वासन के बाद भी गांव में उच्च प्राथमिक विद्यालय नहीं खुल सका। यदि डीएम साहिबा कुछ दिन और मीरजापुर में रहतीं तो लहुरियादह गांव के लोगों को उच्च प्राथमिक विद्यालय नसीब हो जाता।
देवकली ने बताया कि गांव में पानी का संकट दूर होने के बाद ग्रामीणों में स्कूल खोले जाने की उम्मीद जगी थी, लेकिन अभी तक उच्च प्राथमिक विद्यालय का निर्माण कार्य शुरू न होने पर उम्मीदों पर पानी फिर गया। देवकली अपने मायके लहुरियादह गांव में ही रहती हैं, जबकि उनकी ससुराल मध्यप्रदेश के मऊगंज जिले के तिलया गांव में है। तीन महीने पूर्व उनके पति छोटे बसोर की बीमारी से मृत्यु हो गई थी। देवकली ने बताया कि उन्हें शासन से आवास का लाभ नहीं मिल पाया है।

देवकली को उम्मीद है कि भविष्य में दिव्या मित्तल लहुरियादह सहित क्षेत्र के अन्य गांवों में विकास को लेकर अपनी आवाज बुलंद करेंगी। उनका कहना है कि गांव में जिस जगह उच्च प्राथमिक विद्यालय के लिए भूमि का चयन हुआ है, वहीं पर विद्यालय का निर्माण करवाया जाए।
इस प्रकार, दिव्या मित्तल का चुनाव लड़ना निश्चित है, लेकिन उनके कार्यकाल के दौरान लहुरियादह गांव में शिक्षा और विकास के मुद्दे पर जो स्थिति बनी, वह चिंताजनक है। स्थानीय निवासियों की उम्मीदें अब भी जीवित हैं कि दिव्या मित्तल अपने चुनावी अभियान के दौरान इन मुद्दों को उठाएंगी और गांव के विकास के लिए ठोस कदम उठाएंगी।
लहुरियादह गांव की यह कहानी न केवल शिक्षा के मूलभूत अधिकार की आवश्यकता को दर्शाती है, बल्कि यह भी बताती है कि कैसे स्थानीय प्रशासन की उदासीनता से विकास की संभावनाएं प्रभावित होती हैं। दिव्या मित्तल के चुनावी सफर में यह मुद्दा महत्वपूर्ण रहेगा, और यह देखना दिलचस्प होगा कि वे अपने कार्यकाल के अनुभवों को कैसे अपने चुनावी अभियान में शामिल करती हैं। फिलहाल लहुरियादह गांव एक बानगी भर ही है।
