वाराणसी [हिमांशु अस्थाना]। दशाश्वमेध घाट पर खाली बैठे नाविक काशी साहनी के स्मार्टफोन पर डिंगी एप का अलर्ट आया कि कल उन्हें नीदरलैंड्स से आए ड्योडेट व सैरा पर्लीजिन नामक पर्यटकों को नौकाविहार कराना है। एप कंपनी के एजेंट ने उन्हें फोन भी किया कि इन पर्यटकों को राजघाट से लेकर अस्सी घाट तक नौकाविहार कराने के साथ ही दशाश्वमेध घाट पर होने वाली गंगा आरती भी दिखानी है। साथ ही नाव पर ही पारंपरिक नाश्ते आदि का इंतजाम करना है, थोड़ी सजावट भी रहे तो बेहतर होगा...। फिर क्या, काशी अपने मेहमानों को नौकाविहार कराने की तैयारी में जुट गए।

अब अस्सी घाट का रुख करते हैैं। यहां मौजूद नाविक अंगद साहनी के मोबाइल पर भी इसी तरह का मैसेज आया है। उन्हें अमेरिका से आने वाले एक पर्यटक को जनवरी के पहले सप्ताह में नौकाविहार कराना है। अंगद इस पर्यटक को राजघाट से लेकर रामनगर किले तक नौकाविहार कराएंगे...। आइआइटी बीएचयू के पूर्व छात्र का स्टार्टअप 'डिंगी एप' इन दिनों काशी में चर्चा में है। देश-विदेश के सैलानियों को यहां गंगा में नौकाविहार के लिए जहां बुकिंग का आसान प्लेटफार्म मुहैया हो गया है, वहीं स्थानीय नाविकों को बेहतर रोजगार।

डिंगी एप नामक स्टार्टअप की शुरुआत करने वाले आइआइटी बीएचयू के पूर्व छात्र कपिल चावला बताते हैं कि काशी में पर्यटकों की आमद और गंगादर्शन को लेकर खास दिलचस्पी के ट्रेंड ने उन्हें इस स्टार्टअप का आइडिया दिया। कहते हैैं, हालांकि इस बिजनेस में और भी खिलाड़ी पहले से मौजूद हैैं, लेकिन हमने स्थानीय नाविकों को साथ जोड़कर कुछ अलग और बेहतर करने का प्रयास किया है। इस सर्विस को न केवल टूरिस्ट बल्कि स्थानीय लोग भी बेहद पसंद कर रहे हैं। इसके पीछे इसका किफायती किराया और बेहतरीन सर्विस है। कपिल बताते हैं कि पर्यटकों को अगर विकसित देशों जैसी आधुनिक सुविधाएं मुहैया कराई जाएं तो उनकी काशी यात्रा बेहद खास हो जाती है। हमारा प्रयास यही होता है कि हम बुकिंग से लेकर सेवा प्रदान करने तक, पर्यटकों को उच्चस्तरीय सर्विस देकर उनकी यात्रा को यादगार बना सकें।

आंध्रप्रदेश से बनारस आए मुरली कृष्णा ने बताया कि वह डिंगी की सेवा लेकर नौकाविहार करने के बाद बाबा विश्वनाथ का दर्शन करने जा रहे। उन्हें नाव बुकिंग की यह सुविधा बेहद खास लगी। राणा महल घाट पर नाविकों के प्रबंधक विनोद यादव बताते हैं कि हमारे नाविक अंग्रेजी, फ्रेंच व दक्षिण भारत की कई भाषाओं के जानकार हैं।  इससे वे गाइड का भी काम कर लेते हैं और किराए के अलावा अतिरिक्त भुगतान भी पाते हैैं। घाट के गरीब नाविकों को इस स्टार्टअप से नियमित रोजगार मिल रहा है। पर्यटक खोजने के बजाय वह मेहमानों की सेवा व तैयारियों में लगे रहते हैं।

आइआइटी बीएचयू से 2013 में एमसीए करने और फिर पांच वर्षों तक विभिन्न कंपनियों में सेवाएं देने के बाद कपिल ने यह स्टार्टअप शुरू किया। उनके इस स्टार्टअप को आइआइटी, बीएचयू के इंक्यूबेशन से मदद मिली, जिसके बाद इस साल नवंबर में एप को लांच किया गया। मालवीय नवप्रवर्तन एवं उद्यमिता केंद्र, आइआइटी, बीएचयू के समन्वयक प्रो. प्रदीप कुमार मिश्रा ने बताया कि कपिल का स्टार्टअप हमें पसंद आया और एग्रीमेंट के बाद उन्हें काम करने के लिए यहां से उचित सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं।

 

Posted By: Saurabh Chakravarty

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