इसरो के यूआर राव सैटेलाइट सेंटर के नए निदेशक रहे हैं बीएचयू के मेधावी छात्र, भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु को दे चुके हैं प्रशिक्षण
दिनेश कुमार सिंह को इसरो के यू आर राव सैटेलाइट सेंटर (यूआरएससी) का निदेशक नियुक्त किया गया है। काशी के ...और पढ़ें

काशी के मेधावी दिनेश कुमार सिंह बने इसरो यूआरएससी के नए निदेशक।
HighLights
दिनेश कुमार सिंह इसरो यूआरएससी के नए निदेशक नियुक्त।
काशी के निवासी, आईआईटी बीएचयू से एमटेक किया।
भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ल को प्रशिक्षण दिया।
शैलेश अस्थाना, जागरण, वाराणसी। इसरो के तीन प्रमुख तकनीकी केंद्रों, स्पेस एप्लीकेशंस सेंटर (एसएसी) अहमदाबाद, ह्यूमन स्पेस फ्लाइट सेंटर (एचएसएफसी) में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाने के बाद अब यूआर राव सैटेलाइट सेंटर (यूआरएससी) का निदेशक बनाए गए दिनेश कुमाार सिंह ने एक बार फिर काशी को गौरवान्वित किया है।
पहड़िया क्षेत्र के अकथा गांव निवासी दिनेश कुमार सिंह की प्रारंभिक शिक्षा काशी में ही हुई है। यहीं राजकीय क्विंस इंटर कालेज में कक्षा छह से 12वीं तक अध्ययन करने के बाद वह हरकोर्ट बटलर तकनीकी विश्वविद्यालय (एचबीटीयू), कानपुर से बीटेक किया और फिर 1988 में आइआइटी बीएचयू से माइक्रोवेव इंजीनियरिंग में एम टेक किया।
उनके पिता संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय परिसर स्थित आयुर्वेद अस्पताल में तकनीशियन थे, उनके बड़े भाई भी संस्कृत विश्वविद्यालय में गैर शैक्षणिक पद पर कार्यरत हैं। क्विंस कालेज में उनके सहपाठी रहे बीएचयू भू-भौतिकी विभाग के आचार्य प्राे. मनोज कुमार सिंह ने बताया कि दिनेश बचपन से ही अत्यंत मेधावी व बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। खेलकूद व सांस्कृतिक कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी करने के साथ ही पढ़ाई में बहुत तेज थे।
उस समय हम सभी सहपाठियों का लक्ष्य इंजीनियरिंग करना था और लगभग सभी उसमें सफल हुए। उन्होंने बताया कि 1989 में ही इसरो से जुड जाने के बाद उन्होंने इसरो की अनेक महत्वपूर्ण योजनाओं पर काम किया। फिर भी अपने बचपन के सहपाठियों के हमेशा संपर्क में रहे। वह आज भी क्विंस कालेज एलुमुनाई ग्रुप से जुड़े हुए हैं और ग्रुप में प्राय: सक्रियता भी बनी रहती है।
प्रो. श्रीवास्तव ने बताया कि दिनेश तीव्र बुद्धि के थे और क्वालिटी स्टडी करते थे, यानी जितना पढ़ना, उतना स्पष्ट रूप से याद हो जाना और उसे अवधारणात्मक स्तर तक उतार लेना। यह उनकी प्रतिभा और मेधा की ही देन है कि इसरो में 35 वर्षों से अधिक लंबे करियर में उनकी तकनीकी विशेषज्ञता ने उन्हें पेलोड इंजीनियर से शीर्ष प्रशासक के पद तक पहुंचाया।
वह बताते हैं वह काफी दिनों तक अहमदाबाद के स्पेस एप्लीकेशन सेंटर (एसएसी) में रहे। एसएसी उनके करियर के लिए एक महत्वपूर्ण लांचपैड साबित हुआ, जहा उन्होंने हाई-भूपुट संचार उपग्रह पेलोड और उन्नत अंतरिक्ष-आधारित लेजर संचार प्रणालियों पर काम किया। उन्होंने अहमदाबाद स्थित स्पेस एप्लीकेशंस सेंटर (एसएसी) में एसोसिएट निदेशक के रूप में सेवाएं दीं और रेडियो फ्रीक्वेंसी सिस्टम्स ग्रुप का नेतृत्व ग्रुप डायरेक्टर के रूप में किया।
एसएसी अहमदाबाद में उनके नेतृत्व में भारत की रक्षा और नागरिक उपग्रह प्रणालियों के लिए कई अत्याधुनिक पेलोड कान्फ़िगरेशन तथा उन्नत संचार प्रौद्योगिकियों का सफलतापूर्वक विकास किया गया। उनके अनुभव में अमेरिका स्थित बोइंग सैटेलाइट सिस्टम्स सुविधा में एंट्रिक्स कारपोरेशन का प्रतिनिधित्व करते हुए आनसाइट तकनीकी सलाहकार के रूप में एक विशेष कार्यकाल भी शामिल है। अंतरिक्ष यान प्रौद्योगिकियों में उनके उत्कृष्ट योगदान को मान्यता देते हुए उन्हें प्रतिष्ठित इसरो मेरिट अवार्ड और एस्ट्रोनाटिकल सोसाइटी आफ इंडिया (एएसआइ) अवार्ड से सम्मानित किया गया।
पिछले वर्ष आए थे बीएचयू में आयोजित स्पेस डे में
दिनेश कुमार सिंह पिछले वर्ष आठ अगस्त को बीएचयू में इसरो की पहल पर मनाए गए अंतरिक्ष दिवस समारोह में बतौर मुख्य अतिथि आए थे। उन्होंने छात्रों को स्पेस इंजीनियरिंग मेें करियर के बाबत उनकी जिज्ञासाओं का भरपूर समाधान भी किया।
शुभांशु शुक्ल को अंतरिक्ष में जाने से पूर्व दिया था प्रशिक्षण
अभी हाल में ही अंतरिक्ष यात्रा से लौटे वायुसेना में ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ल को अंतरिक्ष में जाने के पूर्व बेंगलुरु स्थित मानव अंतरिक्ष उड़ान केंद्र (एचएसएफसी) और अमेरिका में दिनेश कुमार सिंह के नेतृत्व में टीम ने एक माह का प्रशिक्षण दिया था।
भारतीय अंतरिक्ष अवसंरचना को और गति मिलने की संभावना
यूआरएससी देश के संपूर्ण उपग्रह बेड़े के डिजाइन, विकास और संचालन का प्रमुख केंद्र है। दिनेश कुमार सिंह द्वारा अहमदाबाद में अपने कार्यकाल के दौरान विकसित की गई उद्योग सहयोग की उनकी मजबूत विरासत से इस केंद्र को लाभ मिलने की उम्मीद है। यूआरएससी वर्तमान में आगामी पांच-माड्यूल वाले भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (भारत के आगामी स्पेस स्टेशन) और डीप-स्पेस वैज्ञानिक ट्रैकर्स के लिए सबसिस्टम तैयार कर रहा है। सिंह की गहरी अकादमिक और तकनीकी सहभागिता से निजी एयरोस्पेस स्टार्टअप्स और विद्यार्थियों द्वारा संचालित नवाचारों, जैसे इसरो रोबोटिक्स चैलेंज और विभिन्न इंजीनियरिंग इंटर्नशिप अभियानों, को बड़ा प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।
