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शारदीय नवरात्र 2026: हाथी पर मां का आगमन, मुर्गे पर विदाई, जानें कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त और देश पर प्रभाव

By Vns Shailesh Asthana Edited By: Abhishek sharma
Published: Sun, 11 Oct 2026 04:38 AM (IST)

इस वर्ष नवरात्र में मां भगवती का आगमन हाथी पर होगा, जिससे अत्यधिक वर्षा का योग है, जबकि विदाई मुर्गे ...और पढ़ें

अभिजित मुहूर्त में कलश स्थापना श्रेष्ठ मानी गई है।

अभिजित मुहूर्त में कलश स्थापना श्रेष्ठ मानी गई है।

HighLights

  1. मां का हाथी पर आगमन, अत्यधिक वर्षा का योग।

  2. मुर्गे पर विदाई, देश में अशांति की आशंका।

  3. कलश स्थापना के लिए अभिजित मुहूर्त सर्वोत्तम।

जागरण संवाददाता, वाराणसी। हाथी पर आएंगी मां, कुक्कुट पर विदाई इस वर्ष नवरात्र रविवार से आरंभ होने के कारण मां भगवती का आगमन हाथी पर हो रहा है, जिसके कारण देश में अत्यधिक वर्षा का योग बन रहा है। विसर्जन मंगलवार को होने के कारण मां का गमन कुक्कुट अर्थात् मुर्गे पर होगा, जिससे देश में अशांति और असहजता की स्थिति दिख सकती है।

शिव की नगरी काशी में अब शक्ति की भक्ति के रंग निखरने लगे हैं। कहीं मां के भव्य दरबार आकार ले रहे हैं तो कहीं प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने में कारीगर जुटे हैं। बाजारों से लेकर मंदिरों तक शारदीय नवरात्र के उल्लास की आहट सुनाई देने लगी है।

रविवार से घर-घर कलश स्थापना के साथ आदिशक्ति की नौ दिवसीय आराधना का क्रम शुरू होगा।इस बार तिथियों के विशेष संयोग से नवरात्र का पर्व दस दिनों तक चलेगा। महानवमी 19 अक्टूबर को, विजयदशमी 20 अक्टूबर को और दुर्गा प्रतिमाओं का विसर्जन 21 अक्टूबर को होगा।

अभिजित मुहूर्त में कलश स्थापना श्रेष्ठ : आश्विन शुक्ल प्रतिपदा 11 अक्टूबर को सुबह लगभग 10:35 बजे आरंभ होगी। बीएचयू के ज्योतिष विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. विनय कुमार पांडेय के अनुसार, रात्रि तक चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग विद्यमान होने के कारण कलश स्थापना अभिजित मुहूर्त में भारतीय मानक समयानुसार मध्याह्न 11:20 से 12:07 तक करना श्रेयस्कर होगा क्योंकि चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग में देवी स्थापना शास्त्रानुकूल नहीं होती है। नवरात्र में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना होगी। काशी में देवी के अलग-अलग स्वरूपों के मंदिरों में दर्शन-पूजन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ेगी।

व्रत पारण की तिथि पर रखें ध्यान : प्रो. पांडेय के अनुसार, अष्टमी तिथि की वृद्धि के कारण इस बार नवरात्र में आराधना के लिए अतिरिक्त समय मिल रहा है। केवल प्रतिपदा और महाष्टमी का व्रत रखने वाले श्रद्धालु 19 अक्टूबर को व्रत संबंधी विधान पूरा कर सकेंगे। पूरे नवरात्र का व्रत रखने वाले साधक हवन, पूजन और पूर्णाहुति के बाद 20 अक्टूबर को पारण कर सकते हैं। अपनी परंपरा के अनुसार शुद्ध उदयकाल व्यापिनी दशमी में 21 अक्टूबर को सुबह 10:50 बजे तक पारण का विकल्प भी रहेगा।