वाराणसी [प्रमोद यादव]। सात वार और नौ त्योहार की मान्यता वाला पर्व-उत्सवों का रसिया शहर बनारस कार्तिक पूर्णिमा की शाम पूरे मूड में आएगा। देव दीपावली महाआयोजन के रूप में शहर का अनूूठा जल उत्सव मनाएगा। उत्तर वाहिनी गंगा की विशाल घाट श्रृंखला को दीपों से जगमग करेगा और जाह्नवी के गले में दीपों का चंद्रहार दमकने का आभास पाएगा। जमीन से आसमान तक एक समान ज्योति पुकार नजर आएगी तो इसकी लौ गांव से शहर तक के कुंड-सरोवरों तक भी जाएगी। धूप -दीप लोबान की सुवास के साथ ही राग -रागिनियां भी इसमें श्रद्धा भक्ति के भाव घोलती नजर आएंगी।

यह दृश्यावली पहली बार आए लोगों को तो चकित करेगी ही, बार-बार निरख जाने के लिए बुलाएगी। यह बात और है कि भीड़ से अंड़सी सड़कों में जाने की राह कहां और कैसे मिल पाएगी। इसके लिए घाटों पर युवाओं को मानो सांस लेने तक की फुर्सत नहीं है। कहीं घाट चमकाने हैैं तो झालर दीप लगाने हैैं। इसका खाका खींचा जा चुका है और अब पूरी टीम क्रियान्वयन के मोड में है। पूर्णिमा की सुबह तक सब चाक चौबंद कर लेना है, इस लक्ष्य संग युवाओं की टोली जुटी है।  

वास्तव में त्रिपुर नाम के दुर्दांत असुर पर भगवान शिव की विजय गाथा की पौराणिक कथा को जानने वाली कुछ श्रद्धालु महिलाएं कार्तिक पूर्णिमा पर गंगा घाटों तक आती थीं और श्रद्धा के कुछ दीप जला कर वापस लौट जाती थीं। काशी में 14वीं सदी से ही इस 'देव विजय' के उपलक्ष्य में घाट किनारे राजे-महाराजों की ओर से राजकीय स्तर पर भव्य दीपोत्सव मनाने के दृष्टांत तब तक लाल मारकीन में बंधी पोथियों में ही कैद थे। कुछ दूरदर्शी युवाओं ने अपनी कल्पनाओं को उड़ान दी। पौराणिक पृष्ठों को पलटा और मजबूत इरादों के साथ जुट गए काशी का गौरव रहे देवदीपावली उत्सव को फिर एक बार जमीन पर उतारने में। वर्ष 1986 में पंचगंगा सहित कुल छह घाट जब दीप मालाओं से जगमगाए तो नगर में उल्लास की एक नई लहर महसूस की गई। कलर फुल उत्सव के रंगों ने लोगों को आकर्षित किया। व्यक्तिगत ही नहीं संस्था, समितियों के स्तर पर भी हाथ से हाथ जुड़े और काशी ने देश ही नहीं दुनिया का अनूठा जल उत्सव खड़ा कर दिया। 

देव दीपावली नहीं देखी तो क्या देखा 

पुरनियों की भी याद है कि शहर बनारस में चार लक्खा मेला ख्यात हैैं। इस संख्या को देव दीपावली ने पांच तक विस्तार दे दिया। हालांकि राजघाट से अस्सी और कुंड-सरोवरों तक उमड़ते रेला को देखें तो भीड़ का दायरा और मेला इससे भी कई गुना पार तक जाएगा। इससे घबड़ाए और न आए तो देव दीपावली न देखी तो क्या देखा सवाल भी सिर उठाएगा। प्रशासन से लेकर शासन तक ऐसे ही स्लोगन के अंदाज में इस उत्सव का प्रचार कर रहे हैैं। 

15 मिनट बंद रहेंगी घाट की लाइटें

भारत सरकार के ऊर्जा बचत के आह्वान पर नगर आयुक्त गौरांग राठी ने देव दीपावली पर विशेष निर्देश दिए हैं। ऊर्जा संरक्षण के क्रम में सभी घाटों की लाइटें शाम 6:30 बजे से 6.45 बजे तक के लिए बंद रहेगी। नगर आयुक्त के मुताबिक इस दौरान घाटों पर सजे दीपों की छटा जहां दर्शनीय बन जाएगी, वहीं एक साथ बड़े पैमाने पर ऊर्जा की भी बचत हो सकेगी। 

देव दीपावली में शामिल होंगे मुख्यमंत्री

देव दीपावली पर्व पर राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी शामिल होंगे। प्रशासनिक सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक मुख्यमंत्री शाम को वाराणसी पहुंचेंगे और देव दीपावली में शामिल होंगे। अनुमान लगाया जा रहा है कि सीएम दीपावली पर अयोध्या में थे तो अब जब श्रीराम मंदिर को लेकर फैसला आ गया है तो वह काशी की विश्व प्रसिद्ध देव दीपावली में शामिल होंगे। प्रशासन ने उनके आगमन को लेकर तैयारियां भी शुरू कर दी हैं। 

Posted By: Abhishek Sharma

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