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पिघला ‘खाकी’ का दिल, ड्यूटी खत्म कर 25 किमी बाइक चलाकर बीएचयू पहुंचे उप निरीक्षक ने द‍िया खून

By Shivam SinghEdited By: Abhishek sharma
Published: Wed, 23 Sep 2026 11:31 AM (IST)

उप निरीक्षक उमेश कुमार गुप्ता ने ड्यूटी खत्म होने के बाद 25 किलोमीटर बाइक चलाकर बीएचयू पहुंचकर 79 वर्षीय दुलारी ...और पढ़ें

खाकी का मानवीय चेहरा: वाराणसी पुलिस उप निरीक्षक ने 25 किमी बाइक चलाकर किया रक्तदान।

खाकी का मानवीय चेहरा: वाराणसी पुलिस उप निरीक्षक ने 25 किमी बाइक चलाकर किया रक्तदान।

HighLights

  1. उप निरीक्षक उमेश गुप्ता ने ड्यूटी के बाद किया रक्तदान।

  2. 25 किलोमीटर बाइक चलाकर बीएचयू पहुंचे, बुजुर्ग महिला को जीवनदान।

  3. खाकी के मानवीय चेहरे और संवेदनशीलता का उत्कृष्ट उदाहरण।

जागरण संवाददाताा, वाराणसी। रक्त की आवश्यकता की सूचना मिलते ही उप निरीक्षक उमेश कुमार गुप्ता ने अपनी ड्यूटी खत्म करने के बाद 25 किलोमीटर बाइक चलाकर बीएचयू पहुंचकर रक्तदान किया। वाराणसी के चौबेपुर थाने में तैनात उमेश ने 79 वर्षीय दुलारी देवी के लिए रक्तदान कर खाकी के मानवीय चेहरे को उजागर किया है।

दुलारी देवी, जो सैयदराजा, चंदौली की निवासी हैं, पिछले तीन महीनों से बीमारी के कारण अस्पताल में भर्ती थीं। उनकी पोती नेहा सिंह ने रक्त की आवश्यकता के चलते परिचितों से संपर्क किया, लेकिन जब कोई मदद नहीं मिली, तो उन्होंने काशी रक्तदान नेत्रदान कुटुंब समिति के संस्थापक सचिव राजेश कुमार गुप्ता से मदद मांगी।

राजेश कुमार गुप्ता ने दुलारी देवी की स्थिति को समझते हुए रक्तदाता की तलाश शुरू की। उन्होंने उप निरीक्षक उमेश कुमार गुप्ता से संपर्क किया और बताया कि दुलारी देवी को जिस ब्लड ग्रुप की आवश्यकता है, वही ब्लड ग्रुप उमेश का भी है। उमेश ने बिना किसी संकोच के रक्तदान के लिए सहमति दी।

हालांकि, उमेश की ड्यूटी रात करीब नौ बजे तक थी और बीएचयू की दूरी लगभग 25 किलोमीटर थी। लेकिन उन्होंने मरीज की जरूरत को प्राथमिकता दी। ड्यूटी खत्म करने के बाद, उन्होंने तुरंत मोटरसाइकिल से बीएचयू के लिए रवाना हुए और वहां पहुंचकर रक्तदान किया।

उमेश का यह प्रयास इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि उन्होंने रक्तदान किसी करीबी या परिचित के लिए नहीं, बल्कि एक अनजान बुजुर्ग महिला के लिए किया। उन्होंने अपनी ड्यूटी पूरी करने के बाद रक्तदान के लिए समय निकाला, जो उनकी संवेदनशीलता को दर्शाता है।

दुलारी देवी के परिवार ने उमेश कुमार गुप्ता के प्रति आभार व्यक्त किया। परिवार के लिए यह समय चिंता और परेशानी का था, और ऐसे में रक्तदाता मिलना उनके लिए बड़ी राहत थी। परिवार ने उमेश के इस सहयोग को यादगार बताया।

राजेश कुमार गुप्ता की पहल ने भी मदद की कड़ी को मजबूत किया। नेहा सिंह के फोन के बाद, उन्होंने तुरंत संभावित रक्तदाता से संपर्क किया और अंततः उमेश कुमार गुप्ता ने रक्तदान करके उस तलाश को सार्थक किया।

रक्तदान केवल एक प्रक्रिया नहीं, बल्कि किसी जरूरतमंद परिवार के लिए उम्मीद और जीवन के बीच की महत्वपूर्ण कड़ी बन जाता है। उमेश कुमार गुप्ता ने यह संदेश दिया कि मानवता के लिए उठाया गया छोटा-सा कदम किसी परिवार के लिए बड़ा सहारा बन सकता है।

उमेश का यह रक्तदान इस बात का प्रतीक है कि खाकी में भी संवेदना और सेवा की भावना भी सख्‍त म‍िजाज के बीच मौजूद है। उन्होंने रक्तदान को केवल सामाजिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि एक जरूरतमंद बुजुर्ग की तत्काल आवश्यकता के रूप में देखा।

आज जब रक्त की आवश्यकता के समय परिवारों को रक्तदाता तलाशने में कठिनाई होती है, ऐसे में स्वैच्छिक रक्तदाता किसी जरूरतमंद परिवार के लिए बड़ी राहत बनते हैं। उमेश कुमार गुप्ता का उदाहरण बताता है कि रक्तदान के लिए हमेशा बड़े अभियान की जरूरत नहीं होती। कभी-कभी एक फोन और कुछ किलोमीटर का सफर किसी परिवार की सबसे बड़ी चिंता को कम कर सकता है।

उप निरीक्षक उमेश कुमार गुप्ता का यह रक्तदान खाकी की जिम्मेदारी और इंसानियत की पुकार को एक साथ लेकर चलने वाली कहानी है। दुलारी देवी के लिए दिया गया यह रक्त केवल एक यूनिट रक्त नहीं, बल्कि एक अनजान बुजुर्ग के प्रति संवेदना और मानवता के प्रति जिम्मेदारी का प्रतीक बन गया।