जागरण संवाददाता, वाराणसी। जिले में डेंगू के मामले थमने का नाम ही नहीं ले रहे। स्वास्थ्य विभाग सहित अन्य महकमों की कवायदों का नतीजा नतीजा निकलता नहीं दिख रहा है। सरकारी से लेकर निजी अस्पताल डेंगू मरीजों से पटे पड़े हैं। बुधवार को जहां अलग-अलग क्षेत्रों में डेंगू के तीन पुष्ट व तीन संदिग्ध मरीज मिले वहीं होमी भाभा कैंसर हास्पिटल में तैनात स्टाफ नर्स नीलू बघेल की डेंगू से मौत हो गई। दोपहर एक बजे शोक सभा आयोजित कर हास्पिटलकर्मियों ने स्टाफ नर्स को श्रद्धासुमन अर्पित किए।

सूत्रों के मुताबिक तबीयत बिगड़ने पर पांच दिन पहले ही नीलू बघेल को निजी हास्पिटल में भर्ती कराया गया था। बीती रात इलाज के दौरान ही उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन से न केवल नर्सिंग स्टाफ, बल्कि समूचा हास्पिटल परिवार दुखी है। ज्ञात हो कि डेंगू के चलते जिले में यह कोई पहली मौत नहीं है। इससे पहले विगत 25 अगस्त 2021 को ज्ञानवापी परिसर में तैनात उप-निरीक्षक रामविलास यादव की भी डेंगू से मौत हो गई थी। पुलिस महकमा मृत्यु का कारण डेंगू को ही बताता रहा, लेकिन स्वास्थ्य महकमे ने ब्रेन हैमरेज को मौत का कारण करार दिया था। हालांकि स्वास्थ्य विभाग अन्य महकमों के साथ मिलकर लगातार एंटी लार्वल अभियान चलाने के साथ ही फागिंग भी करा रहा है।

बावजूद इसके सरकारी विभागों से लेकर आमजनजन में डेंगू को लेकर डर का माहौल बन गया है। ब्लड बैंकों में सुबह से लेकर देर रात तक प्लाज्मा लेने वालों की लाइनें लगी हैं। उधर, जिला मलेरिया अधिकारी शरद चंद पांडेय ने बताया कि बीते 24 घंटे में तीन मरीजों में डेंगू की पुष्टि हुई है, जिनमें चौकाघाट का 50 वर्षीय पुरुष, गंगापुर की 21 वर्षीय युवती व टेंगरा मोड़ का 25 वर्षीय युवक शामिल है। वहीं रैपिड टेस्ट में रामनगर व पांडेयपुर से तीन संदिग्ध मिले हैं। वर्तमान में पुष्ट डेंगू मरीजों की संख्या 120 व संदिग्धों की संख्या बढ़कर 1466 हो गई है।

 

Edited By: Saurabh Chakravarty