काशी में वाटर टैक्सी का ठेका खत्म करने की मांग, निषाद समाज ने जल शक्ति राज्य मंत्री को सौंपा पत्र
मां गंगा निषादराज सेवा न्यास ने केंद्रीय जल शक्ति राज्य मंत्री को पत्र लिखकर काशी के घाटों से वाटर टैक्सी ...और पढ़ें

काशी में वाटर टैक्सी ठेका खत्म करने की मांग, निषाद समाज ने मंत्री को सौंपा पत्र।
HighLights
काशी के घाटों से वाटर टैक्सी ठेका समाप्त करने की मांग।
निषाद समाज की आजीविका पर वाटर टैक्सी से प्रभाव।
मोटर बोट लाइसेंस और जल पुलिस में गोताखोरों की नियुक्ति की अपील।
जागरण संवाददाता, वाराणसी। मां गंगा निषादराज सेवा न्यास ने केंद्रीय जल शक्ति राज्य मंत्री डाक्टर राज भूषण चौधरी निषाद को पत्र सौंपकर काशी के घाटों से वाटर टैक्सी की ठेकेदारी समाप्त करने की मांग की है। न्याय के लेटर पैड पर 27 सितंबर को दिए गए पत्र में कहा गया है कि वृंदावन की तर्ज पर वाराणसी में भी निषाद समाज की मोटर बोट संचालित नावों का लाइसेंस नगर निगम से तत्काल जारी किया जाए और जल पुलिस में गोताखोरों की नियुक्ति की जाए।
समाज के लोगों का आरोप है कि वाटर टैक्सी से उनकी रोजी-रोटी छिन रही है। उन्होंने कहा कि पहले किसी सरकार ने इस तरह का ठेका नहीं दिया। निषाद समाज का अनादि काल से नदियों पर नौकायन का अधिकार है। पत्र पर प्रमोद माझी, राकेश साहनी समेत कई पदाधिकारियों के हस्ताक्षर हैं।
निषाद समाज के प्रतिनिधियों ने कहा कि वाराणसी में जल परिवहन के क्षेत्र में निषाद समाज की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उनका मानना है कि वाटर टैक्सी के ठेके से उनकी पारंपरिक नौकायन गतिविधियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि नगर निगम द्वारा निषाद समाज को लाइसेंस दिया जाता है, तो इससे न केवल उनकी आजीविका में सुधार होगा, बल्कि यह स्थानीय पर्यटन को भी बढ़ावा देगा।
समाज के सदस्यों ने जल शक्ति राज्य मंत्री से अपील की है कि वे इस मामले में हस्तक्षेप करें और निषाद समाज के अधिकारों की रक्षा करें। उन्होंने यह भी कहा कि जल पुलिस में गोताखोरों की नियुक्ति से जल परिवहन की सुरक्षा में सुधार होगा और स्थानीय लोगों को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे।
पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि वाराणसी में जल परिवहन के विकास के लिए निषाद समाज की भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार निषाद समाज को उचित अवसर प्रदान करती है, तो यह न केवल उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत करेगा, बल्कि वाराणसी के घाटों की सांस्कृतिक धरोहर को भी संरक्षित करेगा।
निषाद समाज के सदस्यों ने यह भी कहा कि वे अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करते रहेंगे और यदि आवश्यक हुआ, तो वे आंदोलन भी करेंगे। उन्होंने जल शक्ति राज्य मंत्री से अनुरोध किया कि वे इस मुद्दे को गंभीरता से लें और निषाद समाज के हितों की रक्षा करें।
इस पत्र के माध्यम से निषाद समाज ने स्पष्ट किया है कि वे अपने अधिकारों के लिए किसी भी प्रकार की कार्रवाई करने के लिए तैयार हैं। उनका मानना है कि यदि सरकार उनकी मांगों पर ध्यान नहीं देती है, तो वे अपने अधिकारों के लिए सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर होंगे।
वाराणसी में वाटर टैक्सी के ठेके को समाप्त करने की मांग ने निषाद समाज के अधिकारों और उनकी आजीविका के मुद्दे को एक बार फिर से उजागर किया है। अब यह देखना होगा कि सरकार इस मामले में क्या कदम उठाती है और निषाद समाज को उनके अधिकारों का संरक्षण कैसे सुनिश्चित करती है।
