काशी में एसआइआर पर मंथन, कहा - 'मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने देश को बचा लिया'
वाराणसी में विशाल भारत संस्थान ने मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR) पर कार्यशाला आयोजित की, जिसमें चुनाव आयोग के प्रयासों की ...और पढ़ें

वाराणसी में एसआईआर कार्यशाला: फर्जी वोटर्स पर लगाम, चुनाव आयोग के फैसले का समर्थन।
HighLights
विशाल भारत संस्थान ने मतदाता सूची पुनरीक्षण पर कार्यशाला की।
एसआईआर ने फर्जी मतदाताओं की पोल खोली, लोकतंत्र मजबूत।
चुनाव आयोग के निष्पक्ष चुनाव प्रयासों का समर्थन किया।
जागरण संवाददाता, वाराणसी। चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची के पुनरीक्षण के प्रति जागरूकता उत्पन्न करने की दृष्टि से विशाल भारत संस्थान की ओर से सुभाष भवन लमही में एसआईआर पर कार्यशाला का आयोजन किया। कार्यशाला का शुभारम्भ विशाल भारत संस्थान के प्रदेश अध्यक्ष नौशाद अहमद दूबे ने नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीपोज्वलन करके किया।
विशाल भारत संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. राजीव श्रीगुरुजी ने कहा कि पहले बीएलओ घर वालों के कहने पर सदस्यों के नाम लिख देता था, कोई जांच पड़ताल नहीं करता था। बहुत लोग जो शहर के बाहर रहते थे या मर चुके थे उनका भी वोटरलिस्ट में नाम हो जाता था। जब चुनाव आयोग ने फैसला किया कि तीन पीढ़ी से वोट कहा पड़ रहा है वहां का बूथ नम्बर बताओ तब इन फर्जी वोटर्स की पोल खुल गयी।
चुनाव आयोग ने ऐसे सभी नामों को काट दिया। इसी कारण से विपक्षी और काक्रोच सरकार को घेरना चाहते हैं। एसआईआर का मुद्दा देश को बचाने वाला है, इसलिए एसआईआर से समझौता करना देश के हितों एवं सुरक्षा की दृष्टि से अनिवार्य है।
कार्यशाला की अध्यक्षता करते हुए नौशाद दूबे ने कहा कि फर्जी वोट बनवाकर जीतना कांग्रेस की पुरानी बीमारी है, बस चुनाव आयोग ने इसी बीमारी का इलाज कर दिया, इसी से तड़प रहे हैं काक्रोच। एसआईआर को देश के हर हिस्से में लागू करें नहीं तो घुसपैठियों और रोहिंग्या के अलावा कोई वोट दे नहीं पायेगा।
युवा परिषद बीएचयू की चेयरपर्सन जीनत रहमान ने कहा कि भारत में चुनाव आयोग स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए जिम्मेदार है। इसके लिए मतदाता सूची का सही होना बहुत जरूरी है। चुनाव आयोग मतदाता सूची की जाँच करने के लिए विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) करता है। इस प्रक्रिया में मृत लोगों, दूसरे स्थान पर चले गए लोगों और एक से अधिक बार दर्ज नामों की जाँच की जाती है।
बूथ स्तर के अधिकारी घर-घर जाकर लोगों की जानकारी और दस्तावेजों की जाँच करते हैं। गरीबों, बुजुर्गों और दिव्यांग लोगों की सहायता के लिए विशेष शिविर भी लगाए जाते हैं। एसआइआर के दौरान बड़ी संख्या में लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं। लेकिन नाम हटने का अर्थ हमेशा वोट देने का अधिकार छिनना नहीं होता।
चुनाव आयोग नए युवा मतदाताओं को जोड़ने और चुनाव प्रक्रिया को सुरक्षित बनाने के लिए भी कदम उठाता है। ईवीएम की जांच और वीवीपैट जैसी व्यवस्थाओं का उद्देश्य चुनाव में लोगों का विश्वास बनाए रखना है। विशाल भारत संस्थान के राष्ट्रीय परिषद सदस्य मयंक श्रीवास्तव ने कहा कि मतदाताओं का गहन परीक्षण इसलिए जरूरी है क्योंकि सरकार बनाने में इनकी बड़ी भूमिका है।
बीएचयू के इतिहास विभाग की सहायक प्रोफेसर डॉ. मृदुला जायसवाल ने कहा कि जिनका वोट कटा उनको चिंता नहीं है। चिंता उनको है जो सिर्फ फर्जी वोटिंग के सहारे जीतते हैं। एस.आई.आर. हमें भारतीय होने की पहचान देता है और जो भारतीय नहीं है उनकी पहचान करता है। जहां बूथ लूटने एवं फर्जी वोटर्स बनवाने की मंशा हो ऐसे समय में एसआईआर तो जरूरी है।
एक-एक व्यक्ति के वोट की जांच हो तभी लोकतंत्र मजबूत रहेगा। चुनाव आयोग का निर्णय सही है। कार्यशाला के बाद मानव कड़ी बनाकर सभी ने शपथ लिया कि एस.आई.आर. लागू करवाने में सरकार का साथ देंगे। दोनों हाथ उठाकर सामाजिक कार्यकर्त्ताओं ने चुनाव आयोग का समर्थन किया और विशाल भारत संस्थान ने स्पष्ट कर दिया कि हम चुनाव आयोग के फैसलों के साथ हैं।
इस कार्यशाला का संचालन डॉ. अर्चना भारतवंशी ने किया एवं धन्यवाद विवेकानंद सिंह ने दिया। कार्यशाला में डॉ. नजमा परवीन, दक्षिता भारतवंशी, सृष्टि त्यागी, प्रज्ञा परमिता महारी, सत्यम राय, वीरेन्द्र राय, अशरफ दूबे, हुबैद दूबे, मुदस्सीर दूबे, प्रदीप कुमार, आनन्द राय, सूरज राजभर, अंकित राय, इली भारतवंशी, उजाला भारतवंशी, शिखा भारतवंशी आदि लोग शामिल हुए।
