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रेलवे में 14 हजार रिक्त पदों पर भर्ती को लेकर रेलवे बोर्ड के सदस्‍यों संग मंथन, भर्ती को लेकर तैयारी

By Rakesh SrivastavaEdited By: Abhishek sharma
Published: Fri, 02 Oct 2026 12:31 PM (IST)

पूर्वोत्तर रेलवे मेंस कांग्रेस (एनईआरएमसी) ने रेलवे बोर्ड के अतिरिक्त सदस्य (एचआर) से मुलाकात कर कर्मचारियों की 21 सूत्रीय मांगों ...और पढ़ें

एनईआरएमसी ने रेलवे बोर्ड को सौंपा 21 सूत्रीय मांग पत्र 14 हजार पदों पर भर्ती की मांग।

एनईआरएमसी ने रेलवे बोर्ड को सौंपा 21 सूत्रीय मांग पत्र 14 हजार पदों पर भर्ती की मांग।

HighLights

  1. पूर्वोत्तर रेलवे में 14 हजार रिक्त पदों पर भर्ती की मांग।

  2. पुरानी पेंशन योजना (OPS) बहाल करने की प्रमुख मांग।

  3. रेलवे में निजीकरण और ठेकेदारी रोकने पर जोर दिया।

जागरण संवाददाता, वाराणसी। पूर्वोत्तर रेलवे के कर्मचारियों की लंबित समस्याओं और विभिन्न मांगों को लेकर एनई रेलवे मेंस कांग्रेस (एनइआरएमसी) के प्रतिनिधिमंडल ने रेलवे बोर्ड के अतिरिक्त सदस्य (एचआर) से मुलाकात की। एनइआरएमसी के महामंत्री एवं आइआरइएफ के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश पांडेय तथा केंद्रीय अध्यक्ष सुभाष दुबे के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने कर्मचारी हित के 21 सूत्रीय मांग-पत्र सौंपकर शीघ्र कार्रवाई की मांग उठाई।

मांग-पत्र में पूर्वोत्तर रेलवे में करीब 14 हजार रिक्त पदों पर नियमित भर्ती, स्वीकृत पदों का यार्डस्टिक के अनुसार पुनरीक्षण और जरूरत के अनुसार नए पद सृजित करने की मांग की गई। संगठन ने कहा कि नई ट्रेनों के संचालन और अन्य रेलवे से ट्रेनों के हस्तांतरण के बावजूद पर्याप्त मानव संसाधन नहीं मिलने से कर्मचारियों पर कार्यभार बढ़ा है। इन पदों पर रेलवे की भर्ती शुरू हुई तो पूर्वांचल और ब‍िहार के युवाओं को सर्वाध‍िक फायदा म‍िलेगा।  

ट्रैक मेंटेनर पुनरुद्धार योजना लागू करने, ग्रुप-डी की भर्ती ट्रैक मेंटेनर संवर्ग में करने, मल्टीस्किल्ड प्रशिक्षण के आधार पर विभाग परिवर्तन और ट्रैक मेंटेनरों को ग्रुप-सी के उच्चतम ग्रेड पे तक पदोन्नति का अवसर देने की मांग भी उठाई गई। संगठन ने एनपीएस और यूपीएस समाप्त कर ओपीएस बहाल करने, आठवें वेतन आयोग की प्रक्रिया जल्द पूरी करने और उत्पादन आधारित बोनस (पीएलबी) का भुगतान सातवें वेतन आयोग के अनुरूप करने की मांग की। बोनस गणना में न्यूनतम वेतन की वर्तमान प्रासंगिक सीमा को आधार बनाने का आग्रह किया गया।

करीब सात साल बाद जारी जीडीसीई (जनरल डिपार्टमेंटल कंपेटेटिव एक्जामिनेशन)में केवल 134 रिक्तियों का उल्लेख होने पर रिक्तियों का पुनर्मूल्यांकन करने तथा डीपीक्यू (डिपार्टमेंट प्रमोशन कोटा) और एडीसीइ (लिमिटेड डिपार्टमेंटल कंपेटेटिव एक्जामिनेशन) में रिक्त पदों को जीडीसीई में शामिल करने की मांग की गई। पदोन्नति कैलेंडर एचआरएमएस पर अपलोड करने, स्वीकृत पारस्परिक स्थानांतरण में शीघ्र कार्यमुक्ति और नियमानुसार ओवरटाइम भत्ते का भुगतान सुनिश्चित करने की मांग भी शामिल है।

प्रतिनिधिमंडल ने टीआरटी, सिग्नल, कैरेज एवं वैगन तथा विद्युत विभाग के हेल्परों और तकनीशियनों समेत संबंधित कर्मचारियों को कार्य प्रकृति के आधार पर हार्ड रिस्क भत्ता देने, सिग्नल कर्मचारियों के लिए निर्धारित ड्यूटी रोस्टर और एचओइआर के अनुसार कार्य समय लागू करने की मांग की। गंभीर बीमारी या दुर्घटना से मेडिकल अनफिट कर्मचारियों को वैकल्पिक पदों पर समायोजित करने और स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति की स्थिति में आश्रित को अनुकंपा नियुक्ति देने का प्रावधान करने का आग्रह किया गया।

मांग-पत्र में वाराणसी मंडल मुख्यालय में केंद्रीय विद्यालय खोलने, रेल कर्मचारियों के माता-पिता को परिवार के सदस्य के रूप में मान्यता देकर रेलवे पास, चिकित्सा समेत अनुमन्य सुविधाएं देने तथा जर्जर रेलवे आवासों की मरम्मत, रखरखाव और नए आवासों के निर्माण के लिए विशेष बजट देने की मांग की गई।

एनई रेलवे मेंस कांग्रेस ने रेलवे में निजीकरण, पीपीपी सार्वजनिक निजी भागीदारी, एफडीआइ (डायरेक्ट विदेशी निवेश), ठेकेदारी और आउटसोर्सिंग पर रोक, चारों श्रम संहिताओं को रद्द करने तथा गोरखपुर और वाराणसी में रेलवे की जमीनों को निजी कंपनियों को लीज पर देने की प्रक्रिया रोकने की मांग भी की। साथ ही आइआरइएफ को बनारस की तर्ज की तर्ज पर रेलवे बोर्ड में उचित मान्यता और प्रतिनिधित्व देने का आग्रह किया। संगठन ने सभी 21 मांगों पर रेलवे बोर्ड से सकारात्मक पहल और शीघ्र कार्रवाई की अपेक्षा जताई।

जागरण संवाददाता, वाराणसी : पूर्वोत्तर रेलवे के कर्मचारियों की लंबित समस्याओं और विभिन्न मांगों को लेकर एनई रेलवे मेंस कांग्रेस (एनइआरएमसी) के प्रतिनिधिमंडल ने रेलवे बोर्ड के अतिरिक्त सदस्य (एचआर) से मुलाकात की। एनइआरएमसी के महामंत्री एवं आइआरइएफ के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश पांडेय तथा केंद्रीय अध्यक्ष सुभाष दुबे के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने कर्मचारी हित के 21 सूत्रीय मांग-पत्र सौंपकर शीघ्र कार्रवाई की मांग उठाई। मांग-पत्र में पूर्वोत्तर रेलवे में करीब 14 हजार रिक्त पदों पर नियमित भर्ती, स्वीकृत पदों का यार्डस्टिक के अनुसार पुनरीक्षण और जरूरत के अनुसार नए पद सृजित करने की मांग की गई। संगठन ने कहा कि नई ट्रेनों के संचालन और अन्य रेलवे से ट्रेनों के हस्तांतरण के बावजूद पर्याप्त मानव संसाधन नहीं मिलने से कर्मचारियों पर कार्यभार बढ़ा है। ट्रैक मेंटेनर पुनरुद्धार योजना लागू करने, ग्रुप-डी की भर्ती ट्रैक मेंटेनर संवर्ग में करने, मल्टीस्किल्ड प्रशिक्षण के आधार पर विभाग परिवर्तन और ट्रैक मेंटेनरों को ग्रुप-सी के उच्चतम ग्रेड पे तक पदोन्नति का अवसर देने की मांग भी उठाई गई। संगठन ने एनपीएस और यूपीएस समाप्त कर ओपीएस बहाल करने, आठवें वेतन आयोग की प्रक्रिया जल्द पूरी करने और उत्पादन आधारित बोनस (पीएलबी) का भुगतान सातवें वेतन आयोग के अनुरूप करने की मांग की। बोनस गणना में न्यूनतम वेतन की वर्तमान प्रासंगिक सीमा को आधार बनाने का आग्रह किया गया। करीब सात साल बाद जारी जीडीसीई (जनरल डिपार्टमेंटल कंपेटेटिव एक्जामिनेशन)में केवल 134 रिक्तियों का उल्लेख होने पर रिक्तियों का पुनर्मूल्यांकन करने तथा डीपीक्यू (डिपार्टमेंट प्रमोशन कोटा) और एडीसीइ (लिमिटेड डिपार्टमेंटल कंपेटेटिव एक्जामिनेशन) में रिक्त पदों को जीडीसीई में शामिल करने की मांग की गई। पदोन्नति कैलेंडर एचआरएमएस पर अपलोड करने, स्वीकृत पारस्परिक स्थानांतरण में शीघ्र कार्यमुक्ति और नियमानुसार ओवरटाइम भत्ते का भुगतान सुनिश्चित करने की मांग भी शामिल है।प्रतिनिधिमंडल ने टीआरटी, सिग्नल, कैरेज एवं वैगन तथा विद्युत विभाग के हेल्परों और तकनीशियनों समेत संबंधित कर्मचारियों को कार्य प्रकृति के आधार पर हार्ड रिस्क भत्ता देने, सिग्नल कर्मचारियों के लिए निर्धारित ड्यूटी रोस्टर और एचओइआर के अनुसार कार्य समय लागू करने की मांग की। गंभीर बीमारी या दुर्घटना से मेडिकल अनफिट कर्मचारियों को वैकल्पिक पदों पर समायोजित करने और स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति की स्थिति में आश्रित को अनुकंपा नियुक्ति देने का प्रावधान करने का आग्रह किया गया। मांग-पत्र में वाराणसी मंडल मुख्यालय में केंद्रीय विद्यालय खोलने, रेल कर्मचारियों के माता-पिता को परिवार के सदस्य के रूप में मान्यता देकर रेलवे पास, चिकित्सा समेत अनुमन्य सुविधाएं देने तथा जर्जर रेलवे आवासों की मरम्मत, रखरखाव और नए आवासों के निर्माण के लिए विशेष बजट देने की मांग की गई।एनई रेलवे मेंस कांग्रेस ने रेलवे में निजीकरण, पीपीपी सार्वजनिक निजी भागीदारी, एफडीआइ (डायरेक्ट विदेशी निवेश), ठेकेदारी और आउटसोर्सिंग पर रोक, चारों श्रम संहिताओं को रद्द करने तथा गोरखपुर और वाराणसी में रेलवे की जमीनों को निजी कंपनियों को लीज पर देने की प्रक्रिया रोकने की मांग भी की। साथ ही आइआरइएफ को बनारस की तर्ज की तर्ज पर रेलवे बोर्ड में उचित मान्यता और प्रतिनिधित्व देने का आग्रह किया। संगठन ने सभी 21 मांगों पर रेलवे बोर्ड से सकारात्मक पहल और शीघ्र कार्रवाई की अपेक्षा जताई।