वाराणसी के मंगलपुर में संदिग्ध हालात में हो रही मौतें, अब बीमारी की जांच करने पहुंची टीम
वाराणसी के मंगलपुर गांव में पिछले एक महीने से मलेरिया, डेंगू और टाइफाइड से हो रही मौतों के बाद प्रशासन ...और पढ़ें
HighLights
मंगलपुर में मलेरिया, डेंगू, टाइफाइड से लगातार मौतें हो रही हैं।
स्वास्थ्य व सफाई टीमों ने गांव में जांच और छिड़काव किया।
ग्रामीणों ने गांव में अस्थायी स्वास्थ्य कैंप लगाने की मांग की।
जागरण संवाददाता, (लोहता) वाराणसी। काशी विद्यापीठ ब्लॉक के मंगलपुर गांव में पिछले एक महीने से मलेरिया, डेंगू और टाईफाइड बुखार से हो रही लगातार मौत से शनिवार को प्रशासन की नींद टूटी। आनन-फानन में स्वास्थ्य विभाग, ग्राम पंचायत और सफाई विभाग की संयुक्त टीमें गांव पहुंचीं।
स्वास्थ्य विभाग की टीम ने गांव में डोर-टू-डोर सर्वे कर लोगों के स्वास्थ्य की जांच की और डेंगू, टायफाइड व मलेरिया की पुष्टि के लिए सैंपल लिए। वहीं सफाईकर्मियों ने पूरे गांव में एंटी लार्वा का छिड़काव और फॉगिंग की। नालियों की सफाई भी कराई गई।
100 से ज्यादा लोगों की हुई जांच, 7000 की आबादी दहशत में
सीएचसी मिसिरपुर के डॉ. एन.के. भारती के नेतृत्व में एएनएम बिंदु देवी, एएनएम किरण देवी और आशा कार्यकर्ताओं की टीम ने जांच अभियान चलाया। पहले दिन करीब 100 से ज्यादा संदिग्ध मरीजों के ब्लड सैंपल लिए गए हैं। टीम ने बताया कि सैंपलों की रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी। गांव की कुल आबादी करीब 7000 है और हर घर में कोई न कोई बुखार से पीड़ित है, जिससे ग्रामीणों में दहशत का माहौल है।
परिजनों की जुबानी
1. गुलाम रब्बानी (70 वर्ष) की मौत: बेटे इरशाद ने बताया कि उनके पिता एक हफ्ते से तेज बुखार से पीड़ित थे। सेंट मैरी हॉस्पिटल में इलाज कराया, लेकिन एक दिन दवा खाने के बाद ही उनकी मौत हो गई। डॉक्टर ने रिपोर्ट में डेंगू और लिवर में सूजन की बात कही। परिवार की अम्मा नगीना (57 वर्ष) भी अभी बुखार से पीड़ित हैं। इरशाद का आरोप है कि उन्होंने एएनएम से लेकर प्रधान तक कई बार छिड़काव के लिए कहा, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। मौतों के बाद ही विभाग जागा है।
2. जुलेखा उर्फ मद्दर (53 वर्ष) की मौत: भाई अब्दुल करीम ने बताया कि उनकी बहन को ठंड लगकर तेज बुखार आया था। 30 सितंबर को अस्पताल में भर्ती कराया, जहां 2 अक्टूबर को उनकी मौत हो गई। अस्पताल की रिपोर्ट में है। परिजन ने बताया कि सितंबर में उनके पूरे परिवार के लोग बुखार के कारण अस्पताल में भर्ती हुए थे।
3. जमालूद्दीन (33 वर्ष) की मौत: पिता कलीम अंसारी ने बताया कि बेटे को अचानक तेज बुखार आया। जांच में डेंगू की पुष्टि हुई। मोढ़ैला के विवेक हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया, जहां 2 दिन इलाज के बाद 20 अक्टूबर को उसकी मौत हो गई। मृतक के दो बच्चे, 5 साल की बेटी और 8 साल का बेटा भी डेंगू से पीड़ित होकर भर्ती हुए थे। परिवार में कुल 17 सदस्य हैं, जिनमें अधिकांश बीमार हैं।
4. आयशा (50 वर्ष) की मौत: बेटे जमालुद्दीन ने बताया कि मां को बुखार के साथ सिर और पैर में तेज दर्द था और बीपी लो हो गया था। पहले लहरतारा के शर्मा हॉस्पिटल में इलाज कराया, वहां से जवाब मिलने पर स्टार हॉस्पिटल ले गए, जहां 11 अक्टूबर (रविवार) को उनकी मौत हो गई। परिवार में कुल 9 लोग हैं।
12 किमी दूर है सरकारी अस्पताल- ग्रामीणों ने बताया कि मंगलपुर से सबसे नजदीकी सरकारी अस्पताल काशी विद्यापीठ ब्लॉक और मिसिरपुर सीएचसी है, जो 12 से 14 किलोमीटर दूर है। इमरजेंसी में मरीजों को ले जाने में काफी दिक्कत होती है। ग्रामीणों ने गांव में ही अस्थायी स्वास्थ्य कैंप लगाने और नियमित फॉगिंग की मांग की है।
