चूहों ने संभाली यहां मरीजों की तीमारदारी, वाराणसी में डीडीयू अस्पताल के प्राइवेट वार्ड का हाल
वाराणसी के डीडीयू अस्पताल के प्राइवेट वार्ड में मरीजों को प्रतिदिन 400 रुपये शुल्क देने के बावजूद चूहों के आतंक, ...और पढ़ें

वाराणसी डीडीयू अस्पताल के प्राइवेट वार्ड में अव्यवस्था, चूहों का आतंक और खराब सुविधाएं।
HighLights
मरीजों से प्राइवेट वार्ड के लिए 400 रुपये प्रतिदिन शुल्क
वार्ड में चूहों का आतंक, खराब एसी, गंदगी का अंबार
अस्पताल ने बजट की कमी बताई, जल्द सुधार का वादा
जागरण संवाददाता, वाराणसी। पंडित दीनदयाल उपाध्याय राजकीय अस्पताल पांडेयपुर के प्राइवेट वार्ड की व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। यहां मरीजों से प्रतिदिन 400 रुपये शुल्क लिया जाता है, लेकिन इसके बदले मिलने वाली सुविधाएं संतोषजनक नहीं हैं। वार्ड में न तो एसी ठीक से चलता है और न ही साफ-सफाई व रखरखाव की स्थिति बेहतर है। कमरों में चूहों का आतंक है।
खिड़कियों के शीशे और जालियां टूटी होने के साथ ही शौचालयों के फ्लश भी खराब होने की शिकायतें हैं। प्राइवेट वार्ड में भर्ती होने वाले मरीजों से पांच दिन का दो हजार रुपये शुल्क एकमुश्त जमा कराया जाता है। जबकि आने वाले मरीजों की खातिरदारी मोटे चूहे इस तरह करते हैं कि फल मरीज के लिए आता है और खा चूहे रहे हैं।
ऐसे में सवाल उठता है कि जब बुनियादी सुविधाएं ही दुरुस्त नहीं हैं, तो मरीजों से यह शुल्क किस सुविधा के नाम पर लिया जा रहा है। अस्पताल प्रशासन की ओर से भी इस शुल्क के बदले मिलने वाली सुविधाओं के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं मिल पा रही है।
हैरानी की बात यह है कि मरीजों को कमरा आवंटित करने से पहले ही वहां की जिम्मेदारों की ओर से संभावित परेशानियां गिना दी जाती हैं। उन्हें बताया जाता है कि कमरे में चूहे घुस सकते हैं, दवाओं को नुकसान पहुंचा सकते हैं, बेड पर चढ़ सकते हैं और बिजली के तार तक काट सकते हैं।
इसके अलावा कमरे से जुड़े शौचालय का फ्लश खराब होने तथा खिड़कियों की जाली और शीशे टूटे होने की बात भी कही जाती है। मरीजों को यह भी बताया जाता है कि यदि वे इन परिस्थितियों में रहने को तैयार हैं, तभी प्राइवेट वार्ड लें, अन्यथा जनरल वार्ड में चले जाएं।
अस्पताल में अन्य वार्डों में भर्ती होने के लिए मरीजों से कोई शुल्क नहीं लिया जाता है। ऐसे में भीड़भाड़ से बचने और अपेक्षाकृत निजी वातावरण में रहने की उम्मीद लेकर प्राइवेट वार्ड चुनने वाले मरीज अतिरिक्त शुल्क देने के बावजूद अव्यवस्थाओं से जूझने को मजबूर हैं। सवाल यह है कि शुल्क लेने के बाद भी मरीजों को बुनियादी सुविधाएं क्यों नहीं मिल रही है। प्राइवेट वार्ड में कुल 16 कमरे हैं। अगर सभी व्यवस्थाएं दुरुस्त रहती तो मरीज उसमें रहकर बढ़िया स्वास्थ्य लाभ लेते और अस्पताल की आय भी बढ़ती रहती।
इस संबंध में अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉक्टर सत्यप्रकाश मिश्रा ने बताया कि मेरी जानकारी में सारी बातें है। मैंने सभी व्यवस्थाएं दुरुस्त करने के लिए ठेकेदार को ठेका दे दिया है। क्योंकि बजट का अभाव है। जिसकी वजह से कुछ दिक्कतें आ रही हैं। लेकिन जल्दी ही सब कुछ ठीक-ठाक हो जाएगा।
