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वाराणसी में लक्ष्मीकुंड पर 16 दिवसीय सोरहिया मेले की धूम, महालक्ष्मी की कथा सुन काशी आई मुस्कान

By Pradyuman Pandey RamuEdited By: Abhishek sharma
Published: Sun, 20 Sep 2026 12:49 PM (IST)

काशी के प्राचीन लक्ष्मीकुंड पर 16 दिवसीय सोरहिया मेले का आयोजन हो रहा है, जहाँ महिलाएं महालक्ष्मी की पूजा-अर्चना और ...और पढ़ें

काशी के लक्ष्मीकुंड पर सोरहिया मेले की धूम, महालक्ष्मी पूजन से खुशहाली की कामना।

काशी के लक्ष्मीकुंड पर सोरहिया मेले की धूम, महालक्ष्मी पूजन से खुशहाली की कामना।

HighLights

  1. काशी के लक्ष्मीकुंड पर 16 दिवसीय सोरहिया मेले का आयोजन।

  2. महिलाएं महालक्ष्मी की पूजा-अर्चना और कथा श्रवण कर रही हैं।

  3. खुशहाली के लिए पुरानी मूर्तियों का विसर्जन, नई प्रतिमाएं स्थापित।

जागरण संवाददाता, वाराणसी। काशी के लक्सा प्राचीन लक्ष्मीकुंड पर 16 दिवसीय सोरहिया मेले की रौनक देखने को मिल रही है। इस मेले में सुबह से ही महिलाएं झुंड बनाकर कुंड के बाहर महालक्ष्मी की मूर्ति रखकर पूजा-पाठ और कथा सुनने में व्यस्त हैं। पुराणों के अनुसार, काशी के महालक्ष्मी मंदिर के मुख्य गर्भगृह में विराजमान महालक्ष्मी, महासरस्वती और महाकाली के विग्रह के समक्ष श्रद्धालु पूजन करते हैं।

इसके बाद, विष्णु मंदिर में विवाह कराने के बाद श्रद्धालु इस कुंड पर कथा सुनते हैं और मूर्ति को घर ले जाकर अपने मंदिर में स्थापित कर पूजन करते हैं। इस परंपरा का उद्देश्य पूरे वर्ष खुशहाली की कामना करना है। अगले वर्ष फिर श्रद्धालु मूर्ति को घर से ले आकर कुंड में विसर्जन करते हैं और यही परंपरा दोहराई जाती है।

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श्रद्धालु मुस्कान जायसवाल ने बताया कि वह बनारस की निवासी हैं और बलिया में रहती हैं। उन्होंने कहा कि वह आज काशी के लक्ष्मी कुंड पर आई हैं, जहां उन्होंने लक्ष्मी पूजन किया और कथा सुनी। वहीं, उर्मिला यादव ने कहा कि उन्होंने एक साल पहले लाई गई मूर्ति का विसर्जन कर नई लक्ष्मी जी की शादी कराई है और कथा सुनकर प्रतिमा लेकर घर जा रही हैं।

इस मेले में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। महिलाएं विशेष रूप से इस अवसर का लाभ उठाते हुए अपने परिवार की खुशहाली के लिए प्रार्थना कर रही हैं। मेले में विभिन्न प्रकार के धार्मिक कार्यक्रम और सांस्कृतिक गतिविधियाँ भी आयोजित की जा रही हैं, जो श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं।

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लक्ष्मीकुंड का यह मेला न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह काशी की सांस्कृतिक धरोहर को भी दर्शाता है। यहां आने वाले श्रद्धालु न केवल पूजा-पाठ करते हैं, बल्कि स्थानीय संस्कृति और परंपराओं का भी अनुभव करते हैं। मेले में विभिन्न प्रकार के हस्तशिल्प और स्थानीय व्यंजनों की दुकानें भी सजाई गई हैं, जो श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रही हैं।

इस मेले का आयोजन हर वर्ष किया जाता है और यह काशीवासियों के लिए एक महत्वपूर्ण धार्मिक और सांस्कृतिक अवसर है। श्रद्धालुओं का मानना है कि इस मेले में भाग लेने से उन्हें मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति मिलती है। लक्ष्मीकुंड पर चल रहे सोरहिया मेले ने न केवल धार्मिक आस्था को प्रगाढ़ किया है, बल्कि यह काशी की सांस्कृतिक विविधता को भी उजागर कर रहा है। श्रद्धालुओं की आस्था और उत्साह इस मेले को विशेष बनाते हैं, जो हर वर्ष हजारों लोगों को आकर्षित करता है।