काशी में खाद्य पदार्थों में रंग कर रहे दंग, इन उत्पादों में सर्वाधिक होती है मिलावट
खाद्य सुरक्षा विभाग ने वाराणसी में कई खाद्य पदार्थों में रंग मिलाने पर प्रतिबंध लगाया है। यह निर्णय उपभोक्ताओं के ...और पढ़ें

वाराणसी में खाद्य पदार्थों में रंग मिलाना प्रतिबंधित, सेहत के लिए बड़ा कदम। (AI Image)
HighLights
खाद्य सुरक्षा विभाग ने कई खाद्य पदार्थों में रंग प्रतिबंधित किया।
मसालों, सूखे मेवों, शिशु आहार में रंग नहीं।
उपभोक्ताओं को शुद्धता के प्रति जागरूक रहना होगा।
शिवम सिंह, जागरण वाराणसी। खाद्य पदार्थों को आकर्षक बनाने के लिए उनमें रंग मिलाने की प्रवृत्ति लोगों की सेहत के लिए नुकसानदेह हो सकती है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) ने जिले को आदेश पत्र जारी कर दिया है। अब कई खाद्य पदार्थों में किसी भी तरह का रंग मिलाने की अनुमति नहीं है।
इसमें पिसी हल्दी, लाल मिर्च और धनिया पाउडर से लेकर अनाज, दालें, आटा, सूजी और ब्रेड जैसे रोजमर्रा के खाद्य पदार्थ शामिल हैं। अब उपभोक्ताओं को खाद्य पदार्थों की शुद्धता पर ध्यान देने और मिलावट के प्रति सतर्क रहने की जरूरत है।
जिले में 4400 दुकानदार लाइसेंसी और 26000 पंजीकृत हैं। अब दुकानदार किसी भी कीमत पर काजू, बादाम, पिस्ता और किशमिश जैसे सूखे मेवों में भी रंग नहीं मिला सकते हैं। इसी तरह शिशु आहार और शिशुओं को पिलाए जाने वाले पैकेज्ड दूध में रंग मिलाना प्रतिबंधित है।
पीने का पानी, प्राकृतिक फलों का रस, चाय की पत्ती, काफी, शहद, गुड़, खाद्य तेल और वसा भी उन खाद्य पदार्थों की सूची में शामिल हैं, जिनमें रंग मिलाने की अनुमति नहीं है। बाजार में कई बार खाद्य पदार्थों को अधिक आकर्षक दिखाने के लिए उनमें रंग मिलाया जाता है।
खासकर मसालों और सूखे मेवों में अस्वाभाविक चमक या गहरा रंग दिखने पर उपभोक्ताओं को सतर्क रहना चाहिए। हालांकि, केवल रंग या चमक देखकर किसी खाद्य पदार्थ में मिलावट की पुष्टि नहीं की जा सकती। इसके लिए जरूरत पड़ने पर खाद्य सुरक्षा विभाग से जांच कराई जा सकती है।
शुद्धता के प्रति जागरूकता जरूरी
खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और शुद्धता बनाए रखने के लिए उपभोक्ताओं की जागरूकता भी जरूरी है। खरीदारी करते समय पैकेट पर अंकित सामग्री, निर्माण एवं उपयोग की अंतिम तिथि और अन्य जरूरी विवरणों को ध्यान से पढ़ना चाहिए। खुले खाद्य पदार्थों की खरीदारी में भी सावधानी बरतनी चाहिए। किसी खाद्य पदार्थ में मिलावट का संदेह होने पर खाद्य सुरक्षा विभाग को इसकी सूचना दी जा सकती है।
