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बनारस को साइबर अपराध‍ियों ने ब‍िगाड़ा, बनता जा रहा है 'जामताड़ा', र‍िपोर्ट ने चौंकाने वाला आंकड़ा जारी कि‍या

By abhishek sharma Edited By: Abhishek sharma
Published: Fri, 25 Sep 2026 11:59 AM (IST)

एक रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश के 10 जिलों में साइबर धोखाधड़ी का खतरा बढ़ गया है, जिसमें वाराणसी, बरेली ...और पढ़ें

बनारस बना साइबर अपराध का नया गढ़, रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे। (AI Image)

बनारस बना साइबर अपराध का नया गढ़, रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे। (AI Image)

HighLights

  1. उत्तर प्रदेश के 10 जिलों में साइबर धोखाधड़ी का खतरा बढ़ा।

  2. वाराणसी, बरेली, लखीमपुर खीरी सबसे अधिक जोखिम वाले जिले बने।

  3. धोखाधड़ी नेटवर्क तेजी से स्थान बदल रहे, चुनौती बढ़ी।

जागरण संवाददाता, वाराणसी। एक साइबर अपराध को लेकर जारी र‍िपोर्ट में उत्तर प्रदेश के 10 जिलों में साइबर धोखाधड़ी का खतरा बढ़ने की जानकारी सामने आई है। हालिया सर्वेक्षण से प्राप्त जानकारी के अनुसार लगभग 130 जिलों के वी-केवाइसी ऑनबोर्डिंग डेटा पर आधारित पूरी र‍िपोर्ट है। इस विश्लेषण में बरेली, लखीमपुर खीरी के साथ ही वाराणसी को सबसे अधिक जोखिम वाले जिलों के रूप में पहचाना गया है।

सर्वेक्षण के अनुसार, सख्त कार्रवाई के बावजूद धोखाधड़ी की गतिविधियां समाप्त नहीं हो रही हैं, बल्कि ये स्थान बदल रही हैं। IDfy द्वारा किए गए इस विश्लेषण में यह देखा गया है कि वी-केवाइसी और ऑनबोर्डिंग डेटा के माध्यम से उन क्षेत्रों की पहचान की गई है जहां म्यूल-अकाउंट और धोखाधड़ी गतिविधियों के बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं। जबक‍ि वाराणसी में कई बड़े सरगना अभी फरार भी चल रहे हैं। 

विश्लेषण में इन 10 जिलों की पहचान की गई है
1. लखीमपुर खीरी 14.03%
2. बरेली 13.37%
3. वाराणसी 12.32%
4. सहारनपुर 10.32%
5. मुजफ्फरनगर 9.77%
6. पानीपत 9.52%
7. फिरोजाबाद 8.81%
8. जोधपुर 7.61%
9. लखनऊ 6.00%
10. गाजियाबाद 5.91%

जारी रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि ये वी-केवाइसी से जुड़े मौजूदा रिस्क के बड़े सिग्नल भी हैं। कुछ जिले पहले से ही धोखाधड़ी के सक्रिय हॉटस्पॉट हो सकते हैं, जबकि अन्य उभरते हुए क्लस्टर के रूप में सामने आ सकते हैं। इस ल‍िहाज से जामताड़ा जो साइबर ठगी का बड़ा केंद्र था अब उससे भी बड़े नेटवर्क में वाराणसी जैसे ख्‍यात शहरों का नाम जुड़ना एक बड़ी चुनौती के रूप में है। 

धोखाधड़ी वाले नेटवर्क को ट्रैक करना कठिन क्यों है?

एक महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि सख्त कार्रवाई के बावजूद धोखाधड़ी की गतिविधियां खत्म नहीं होती हैं। आइडीएफवाई के 15 महीने के विश्लेषण से पता चला है कि 81 प्रतिशत मामलों में, किसी जिले में रिस्क का बढ़ा हुआ स्तर केवल एक महीने तक ही बना रहा। केवल 6.5 प्रतिशत मामलों में ही यह स्तर तीन महीने या उससे अधिक समय तक बना रहा। जब एक जिले में मामले कम होते हैं, तो पास के किसी अन्य जिले में नया हॉटस्पॉट बन सकता है।

र‍िसर्च में व‍ित्‍तीय वर्ष 2026 के दौरान हर तिमाही में जिला-स्तर पर धोखाधड़ी वाले लगभग 16 हॉटस्पॉट की पहचान की। इनमें से 85 से 90 प्रतिशत हॉटस्पॉट की पुष्टि बाद में कानून लागू करने वाली एजेंसियों की कार्रवाई या समाचार रिपोर्टों के माध्यम से हुई।

विश्लेषण में यह भी पाया गया कि धोखाधड़ी के हॉटस्पॉट बहुत तेजी से एक जिले से दूसरे जिले में जा सकते हैं। बैंकों और वित्तीय संस्थानों के लिए यह परिणाम महत्वपूर्ण हैं। धोखाधड़ी के लिए मशहूर हॉटस्पॉट पर केवल नज़र रखना पर्याप्त नहीं हो सकता। वित्तीय संस्थान पड़ोसी जिलों पर भी ध्यान दे सकते हैं और गतिविधियों में संभावित बदलावों के लिए तैयारी कर सकते हैं।