वाराणसी, जागरण संवाददाता : बर्मिंघम कामनवेल्थ के फाइनल मुकाबले में हम स्वर्ण पदक जीतने के इरादे से उतरे थे। तैयारी भी उसी के अनुरूप की थी लेकिन खेल के दौरान मिले मौकों को गोल में तब्दील नहीं कर पाने की वजह से रजत पदक पर संतोष करना पड़ा। यह कहना है भारतीय हाकी टीम के सदस्य ललित उपाध्याय का। बनारस के शिवपुर निवासी ललित ने मैच के बाद दैनिक जागरण से फोन पर बातचीत में बताया कि हम बेहतर तरीके से जानते थे कि आस्ट्रेलिया हमारे लिए मजबूत प्रतिद्वंद्वी है।

हमें मैच में उससे कड़ी चुनौती मिलेगी। इसलिए हमने अटैक के साथ डिफेंस की रणनीति बनाई थी। हम उसके अनुरूप ही खेले। हमने गोल जरूर खाए लेकिन गोल करने के मौके भी मिले। इन मौकों पर हम लाभ नहीं उठा सके। वहीं आस्ट्रेलिया गोल की बढ़त बनाने के साथ ही मैच पर अपनी पकड़ मजबूत बनाती गई। वहीं चोट ने भी हमारी टीम का काफी नुकसान किया। पिछले मैचों में बेहतर खेल दिखाने वाले दो खिलाड़ी चोट की वजह से फाइनल में शामिल नहीं हो सके। जबकि हम सबको उम्मीद थी कि वह फाइनल मैच से पहले स्वस्थ होकर टीम का हिस्सा बन सकेंगे।

Edited By: Saurabh Chakravarty