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बीएचयू ट्रामा सेंटर की महिला प्रोफेसर के साथ छेड़छाड़ के मामले में लंका पुलिस की अंत‍िम र‍िपोर्ट अदालत से निरस्‍त

By Praween RaiEdited By: Abhishek sharma
Published: Fri, 02 Oct 2026 01:39 PM (IST)

बीएचयू ट्रामा सेंटर की महिला प्रोफेसर से छेड़छाड़ मामले में लंका पुलिस द्वारा दाखिल अंतिम रिपोर्ट को अदालत ने निरस्त ...और पढ़ें

बीएचयू प्रोफेसर छेड़छाड़ मामला: पुलिस की अंतिम रिपोर्ट निरस्त, कोर्ट ने दिए दोबारा जांच के आदेश। (AI Image)

बीएचयू प्रोफेसर छेड़छाड़ मामला: पुलिस की अंतिम रिपोर्ट निरस्त, कोर्ट ने दिए दोबारा जांच के आदेश। (AI Image)

HighLights

  1. बीएचयू प्रोफेसर छेड़छाड़ मामले में पुलिस की रिपोर्ट खारिज।

  2. अदालत ने पीड़िता की आपत्ति स्वीकार की, दोबारा जांच का आदेश।

  3. पूर्व प्रभारी सौरभ सिंह व सुरक्षाकर्मियों पर लगे हैं आरोप।

जागरण संवाददाता, वाराणसी। बीएचयू ट्रामा सेंटर की महिला प्रोफेसर के साथ छेड़छाड़ के मामले में लंका पुलिस द्वारा ट्रामा सेंटर के प्रभारी सौरभ सिंह के खिलाफ दाखिल अंतिम रिपोर्ट को अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (नवम) अमित कुमार यादव की अदालत ने निरस्त कर दिया है। पीड़ित महिला प्रोफेसर ने इस संबंध में कोर्ट में आपत्ति जताई थी। न्यायालय ने पीड़िता के प्रोटेस्ट प्रार्थना-पत्र को स्वीकार करते हुए लंका थानाध्यक्ष को अग्रिम विवेचना कराने का आदेश दिया है।

इस प्रकरण के अनुसार, महिला प्रोफेसर विभाग में कार्यरत हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि पूर्व ट्रामा सेंटर प्रभारी प्रो. सौरभ सिंह और सुरक्षाकर्मियों द्वारा उनके साथ लगातार अभद्रतापूर्ण व्यवहार किया जाता था। पीड़िता ने सौरभ सिंह और उनके सहयोगियों के खिलाफ निदेशक के समक्ष मौखिक शिकायत भी की थी। सुरक्षाकर्मियों द्वारा गलत नियत से धक्का-मुक्की करने पर उन्होंने लंका थाना में मुकदमा दर्ज कराया था।

विवेचना के दौरान बाउंसर धनंजय राय और आशीष सिंह का नाम भी सामने आया। पीड़िता द्वारा प्रस्तुत प्रोटेस्ट प्रार्थना-पत्र में आरोप लगाया गया था कि विवेचना के दौरान उनका समुचित बयान नहीं लिया गया, स्वतंत्र गवाहों के बयान दर्ज नहीं किए गए, घटनास्थल का निरीक्षण नहीं किया गया और उपलब्ध इलेक्ट्रानिक एवं अन्य साक्ष्यों की पर्याप्त जांच नहीं की गई।

अदालत ने इस मामले में पीड़िता की चिंताओं को गंभीरता से लिया और लंका थानाध्यक्ष को निर्देश दिया कि वे मामले की पुनः विवेचना करें। यह आदेश इस बात का संकेत है कि न्यायालय पीड़िता के अधिकारों की रक्षा के प्रति सजग है और किसी भी प्रकार की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं करेगा।इस मामले में न्यायालय का निर्णय यह दर्शाता है कि न्यायपालिका महिलाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए तत्पर है।