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अ‍भ‍िनेत्री आकांक्षा दुबे की मौत मामले में सीबीआइ जांच के आदेश से कोर्ट का इन्कार, वाराणसी में संद‍िग्‍ध हाल में होटल में म‍िली थी लाश

By Digital Desk Edited By: Abhishek sharma
Published: Wed, 14 Oct 2026 01:46 PM (IST)

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अभिनेत्री आकांक्षा दुबे की संदिग्ध मौत के मामले में सीबीआई जांच की मांग वाली याचिका खारिज ...और पढ़ें

भोजपुरी अभिनेत्री आकांक्षा दुबे की मौत पर हाई कोर्ट का फैसला, सीबीआई जांच से इनकार।

भोजपुरी अभिनेत्री आकांक्षा दुबे की मौत पर हाई कोर्ट का फैसला, सीबीआई जांच से इनकार।

HighLights

  1. हाई कोर्ट ने आकांक्षा दुबे की मौत में सीबीआई जांच ठुकराई।

  2. वाराणसी होटल में अभिनेत्री संदिग्ध हालात में मृत मिली थी।

  3. कोर्ट ने चार्जशीट और मजिस्ट्रेट के संज्ञान का हवाला दिया।

विधि संवाददाता, जागरण, प्रयागराज/वाराणसी। काशी के सारनाथ स्थि‍त होटल में मृत पाई गई अभ‍िनेत्री आकांक्षा दुबे के प्रकरण की सुनवाई हाई कोर्ट में चल रही है। इस मामले में पुल‍िस‍िया व‍िवेचना के आधार पर मामले में सुनवाई के दौरान आरोप‍ितों को लेकर सीबीआई जांच की मांग की गई थी। इस सनसनीखेज मौत के पूर्व सोशल मीड‍िया पर आकांक्षा के रोने का वीड‍ियो भी वायरल हुआ था। 

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने भोजपुरी अभिनेत्री आकांक्षा दुबे की संदिग्ध हालात में मौत मामले की सीबीआइ जांच का आदेश देने से इन्कार करते हुए याचिका निस्तारित कर दी है। कोर्ट ने कहा, चार्जशीट दाखिल होने और मजिस्ट्रेट द्वारा संज्ञान लेने के बाद, बिना प्रोटेस्ट पिटीशन सीबीआइ जांच की मांग का कोई औचित्य नहीं है। शव मौजूद न होने पर मौत के कारण की दोबारा जांच संभव नहीं है।

यह आदेश न्यायमूर्ति राजीव मिश्रा और न्यायमूर्ति डा. अजय कुमार (द्वितीय) की खंडपीठ ने अभिनेत्री की मां मधु दुबे की याचिका पर दिया है। 26 मार्च 2023 को सारनाथ स्थित एक होटल के कमरे में अभिनेत्री मृत मिली थी। थाना सारनाथ, वाराणसी में आत्महत्या का केस दर्ज हुआ था। याची के अधिवक्ता सौरभ तिवारी ने इस बाबत कहा है कि खंडपीठ के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जाएगी।

घटनास्थल की परिस्थितियां, तस्वीर के साक्ष्य, कलाई पर चोट के निशान और फारेंसिक निष्कर्षों को समग्र रूप से देखने पर आत्महत्या के निष्कर्ष पर गंभीर सवाल उठते हैं। स्वतंत्र व वैज्ञानिक जांच जरूरी है। याची की ओर से यह भी दलील दी गई कि चार्जशीट दाखिल होने से संवैधानिक अदालत की शक्ति समाप्त नहीं होती। इस सिलसिले में सुप्रीम कोर्ट के पूजा पाल बनाम यूनियन आफ इंडिया (2016) मामले का हवाला दिया गया।

दूसरी प्रतिवादी के अधिवक्ता रघुवंश मिश्रा ने बताया कि इस केस में तीन जून 2023 को ही धारा 306 आइपीसी में चार्जशीट दाखिल हो चुकी है और मजिस्ट्रेट ने 6 जून 2023 को संज्ञान भी ले लिया है। खंडपीठ ने याची से पूछा कि क्या पोस्टमार्टम रिपोर्ट के खिलाफ जिलाधिकारी के समक्ष दोबारा मेडिकल जांच के लिए कोई आपत्ति दाखिल की गई? और क्या चार्जशीट के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के भगवंत सिंह बनाम पुलिस आयुक्त (1985) के तहत प्रोटेस्ट पिटीशन दाखिल की गई? अधिवक्ता ने स्वीकार किया कि ऐसी कोई आपत्ति दाखिल नहीं की गई। कोर्ट ने याचिका को रिकार्ड में भेजते हुए निस्तारित कर दिया।