वाराणसी, जेएनएन। परिषदीय विद्यालय भी मार्च-2020 से ही बंद चल रहे हैं। हालांकि, विद्यालयों में अध्यापकाें की उपस्थिति अनिवार्य कर दी गई है ताकि मोहल्ला स्कूल का संचालन किया जा सके। इसके बावजूद तमाम अध्यापक बगैर सूचना के विद्यालयों से गायब हो जा रहे हैं। यही नहीं अध्यापकों के गायब होने से विद्यालयों का ताला तक नहीं खुल रहा है। निरीक्षण के दौरान ऐसे अध्यापकों की पोल खुल गई। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी राकेश सिंह ने बगैर सूचना के गायब रहने वाले ऐसे दो प्रभारी हेड मास्टराें सहित आठ शिक्षकों व एक अनुदेशक वेतन व मानदेय अगले आदेश तक के लिए रोक दिया है।

बीएसए ने हरहुआ ब्लाक के कई विद्यालयाें का औचक निरीक्षक किया। इस दौरान पूर्व माध्यमिक विद्यालय (पिसौर-हरहुआ ब्लाक) के  सहायक अध्यापकों में मंजू देवी, रंजना सोनकर, नासिरा खातून, नीतू सिंह, किरण कुशवाहा, ममता पांडेय, आकांक्षा मिश्र तथा अनुदेशक अंजू व आशीष कुमार पाल बगैर किसी सूचना के गायब मिले। बीएसए ने इसे घोर लापरवाही व अनुशासहीनता मानते हुए सभी शिक्षकों व शिक्षामित्र एक दिन का वेतन व मानदेय अग्रिम आदेश तक के लिए रोक दिया है। इसी प्रकार प्राथमिक विद्यालय (पश्चिमपुर-हरहुआ ब्लाक) प्रधानाध्यापिका विद्यादेवी बगैर किसी सूचना के गायब मिली। यही नहीं विद्यालय भी बंद था। इसे देखते हुए बीएसए ने अग्रिम आदेश तक के लिए उनका वेतन रोक दिया है।

साथ ही इस संबंध में तीन दिनों के भीतर स्पष्टीकरण मांगा गया है। इस क्रम में उच्चतर प्राथमिक विद्यालय  (चमांव-हरहुआ ब्लाक) बंद मिलने पर बीएसए ने प्रभारी हेडमास्टर अरूण कुमारी से स्पष्टीकरण मांगा है। साथ ही अग्रिम आदेश तक के लिए उनका वेतन भी रोक दिया है। वहीं पूर्व प्राथमिक विद्यालय (शिवरामपुर-हरहुआ ब्लाक) की सहायक अध्यापिका इसरावती देवी, संतोष कुमार, अनुदेशक गौरी गौड़ बगैर सूचना के गैरहाजिर मिले। बीएसए ने प्रभारी हेडमास्टर का भी एक दिन का वेतन रोक दिया है।

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